आशुतोष रांका-सौरव दास को 5 दिन की न्यायिक हिरासत

नई दिल्ली, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख नेता आशुतोष रांका और सौरव दास को बुधवार को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट ने 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों को तिहाड़ जेल में भेज दिया गया है। अजिंक्य शिंदे को 6 महीने के शांति बॉन्ड (व्यक्तिगत बॉन्ड और 5,000 रुपये की जमानत) पर रिहा कर दिया गया।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, मंगलवार (13 अक्टूबर) सुबह रांका, दास, शिंदे और 11 अन्य CJP सदस्यों ने निजी परिसर से होकर बैरिकेड्स और गेट फांदकर जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश किया। यह जगह हाल ही में प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई कर दी गई थी। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की। पुलिस ने सभी 14 लोगों को हिरासत में लिया।

दो FIR दर्ज की गईं—एक कनॉट प्लेस थाने में (धारा 223A, 332, 61(2) BNSS) और दूसरी पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में (धारा 221, 115(2), 132, 121(1), 3(5))। आरोपों में अवैध प्रवेश (trespass), निषेधाज्ञा का उल्लंघन, शांति बॉन्ड तोड़ना और लोक सेवक को ड्यूटी से रोकना शामिल हैं। रांका और दास ने इससे पहले शनिवार (10 अक्टूबर) की हिरासत के बाद एक साल तक शांति बनाए रखने का बॉन्ड साइन किया था। कोर्ट ने उनके बार-बार कानून तोड़ने और रिहा होने पर दोबारा उल्लंघन व दूसरों को उकसाने की आशंका को देखते हुए उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत दी।

पुलिस कब छोड़ेगी?
5 दिन की न्यायिक हिरासत 14 अक्टूबर से शुरू हुई है। सामान्यतया 5 दिन बाद (करीब 18-19 अक्टूबर) उन्हें कोर्ट में पेश किया जाएगा। आगे जमानत या रिहाई का फैसला कोर्ट करेगा। फिलहाल दोनों तिहाड़ जेल में हैं।

प्रिवेंटिव अरेस्ट और सामान्य अरेस्ट में अंतर
प्रिवेंटिव अरेस्ट (निवारक गिरफ्तारी): अपराध होने से पहले या शांति भंग रोकने के लिए बिना वारंट के हिरासत। BNSS की संबंधित धाराओं के तहत। मजिस्ट्रेट के सामने पेशी और बॉन्ड/कस्टडी का प्रावधान।
सामान्य अरेस्ट: अपराध होने के बाद FIR के आधार पर। जांच, चार्जशीट और मुकदमे की प्रक्रिया। इस मामले में शुरुआत प्रिवेंटिव अरेस्ट से हुई, लेकिन बॉन्ड उल्लंघन और FIR के कारण न्यायिक हिरासत में बदल गया।

CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने इस कार्रवाई की आलोचना की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अभिजीत दीपके को संदेश दिया था कि “भले ही बैनर अलग हों…”। जंतर-मंतर को डीनोटिफाई करने के फैसले के खिलाफ CJP का विरोध जारी है। वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल—रामलीला मैदान, बुरारी ग्राउंड और CBD ग्राउंड—निर्धारित किए गए हैं।

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