देश के तीनों सशस्त्र बलों थल सेना, नौसेना और वायुसेना में अब तक करीब 3.18 लाख अग्निवीर सेवा कर रहे हैं। इस फैसले से उन युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी, जिन्हें पहले चार साल की सेवा के बाद ही सेना छोड़नी पड़ती। पहला अग्निवीर बैच 2022 में भर्ती हुआ था। नौसेना के पहले बैच का कार्यकाल 21 नवंबर 2026 को, वायुसेना का 21 दिसंबर को और थल सेना का 31 दिसंबर को पूरा हो रहा था। इससे पहले 18,300 से अधिक अग्निवीरों को इसी साल के अंत तक सेवामुक्त किया जाना था।
सेवा निधि और अन्य विकल्प
जो अग्निवीर विस्तार न लें और चार साल बाद सेना छोड़ें, उन्हें कर-मुक्त सेवा निधि पैकेज के तहत लगभग 11.71 लाख रुपये मिलेंगे। सेवामुक्त अग्निवीरों के लिए सीमा सुरक्षा बल, असम राइफल्स, राज्य पुलिस, रेलवे, तटरक्षक बल और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में आरक्षण व भर्ती सुविधाओं की भी व्यवस्था की जा रही है। कुछ राज्यों ने पूर्व अग्निवीरों के लिए 10 से 20 प्रतिशत तक के आरक्षण की घोषणा की है।
क्यों महत्वपूर्ण है फैसला
यह निर्णय अग्निपथ योजना के सबसे बड़े विवादों छोटा सेवाकाल और स्थायी रोजगार की अनिश्चितता को कम करने की दिशा में माना जा रहा है। दो साल के अतिरिक्त अनुभव से अग्निवीरों का प्रशिक्षण और सेना में योगदान अधिक उपयोगी होगा, जबकि सरकार को अनुभवी जवानों को बरकरार रखने का अवसर मिलेगा। हालांकि, कितने अग्निवीरों को विस्तार मिलेगा और छह साल बाद कितने प्रतिशत को स्थायी किया जाएगा, इसकी स्पष्ट संख्या अभी सार्वजनिक नहीं हुई है।

