चुनाव आयोग का बड़ा यू-टर्न: फॉर्म 6 से हटाया SIR घोषणापत्र, दो कमिश्नरों की आपत्ति के बाद अलग किया गया फॉर्म

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने नए मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले ऑनलाइन फॉर्म 6 से विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) से जुड़े घोषणापत्र (Declaration) को हटा दिया है। अब यह घोषणापत्र मुख्य फॉर्म 6 से अलग एक स्वतंत्र फॉर्म के रूप में उपलब्ध है। यह फैसला दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की कड़ी आपत्तियों तथा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे के बाद लिया गया है।

क्या था विवाद?

जुलाई 2026 में ECINet पोर्टल पर उपलब्ध ऑनलाइन फॉर्म 6 में सेक्शन J और K के बीच SIR से जुड़ी एक घोषणा जोड़ दी गई थी। इसमें आवेदक को बताना अनिवार्य था कि:

क्या उसका नाम 2000 के दशक की शुरुआत में हुई पिछली SIR की मतदाता सूची में था?
क्या उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम उस सूची में शामिल था?
या न तो उसका और न ही उसके माता-पिता का नाम पिछली SIR सूची में था?

इसके बिना फॉर्म जमा नहीं हो पाता था। चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मई 2026 में फाइल पर नोट किया था कि मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित वैधानिक फॉर्म में बिना कानूनी संशोधन के बदलाव नहीं किया जा सकता। सुखबीर सिंह संधू ने भी सहमति जताई। बाद में 13 अगस्त को संधू ने इस बदलाव को “अनाधिकृत और अवैध” करार देते हुए तत्काल हटाने की मांग की।

इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार दोनों आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी। इनमें फॉर्म 6 में बदलाव, मतदाता सूची से नाम हटाने-बहाल करने की प्रक्रिया, केंद्रीकृत डेटाबेस तक पहुंच और आईटी सिस्टम संबंधी मुद्दे शामिल थे।

आयोग का रुख और सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा

26 सितंबर 2026 को पूर्ण आयोग की बैठक के बाद ECI ने कहा था कि SIR अवधि के बाहर नियम 1960 के अनुसार सामान्य फॉर्म इस्तेमाल होंगे। इसके बाद 29-30 सितंबर की रात उन राज्यों में जहां SIR पूरा हो चुका था, पोर्टल से घोषणा हटा दी गई। जहां SIR जारी था, वहां यह बनी रही।

26 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जवाबी हलफनामे में आयोग ने स्पष्ट किया कि फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया। SIR घोषणापत्र एक अलग दस्तावेज है, जिसका उद्देश्य आवेदक को पिछली SIR सूची से मैप करना था ताकि अतिरिक्त दस्तावेज जमा न करने पड़ें। ऑनलाइन सिस्टम में इसे फॉर्म 6 के साथ इसलिए जोड़ा गया था ताकि आवेदकों को दो बार OTP और ई-सिग्नेचर न करना पड़े।

हालांकि आयोग ने स्वीकार किया कि ऑनलाइन डिस्प्ले से भ्रम हो सकता था कि फॉर्म में संशोधन हो गया है, जबकि फॉर्म संशोधित करने का अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है। इसलिए इलेक्टोरल रोल डिवीजन ने 21 अक्टूबर 2026 को फैसला लिया कि ऑनलाइन आवेदन भी फिजिकल फॉर्म की तरह दो हिस्सों में होगा—वैधानिक फॉर्म 6 और अलग SIR घोषणा।

अन्य बड़े सुधार

इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट के बाद आयोग ने दोनों आयुक्तों द्वारा उठाए गए लगभग सभी मुद्दों पर कदम उठाए:

बैठकें: अब हर बैठक से पहले एजेंडा भेजा जाएगा और बाद में मिनट्स जारी किए जाएंगे।
विदेश यात्रा: निर्वाचन सदन के अधिकारियों की विदेश यात्राओं के लिए पूरे आयोग की मंजूरी अनिवार्य।
नया आईटी सिस्टम (ECINet): नए मॉड्यूल और पोर्टल पहले अधिकारियों की समिति और फिर आयोग से मंजूरी लेंगे। नियमों के अनुपालन की जांच के लिए आईआईटी बॉम्बे और आईआईएससी बेंगलुरु के विशेषज्ञों सहित समिति बनाकर ECINet का ऑडिट शुरू किया गया।
स्थानीय अधिकारियों के अधिकार: सॉफ्टवेयर द्वारा जमीनी अधिकारियों के अधिकारों में की गई कटौती वापस ली गई। अब बूथ स्तर के अधिकारी (BLO) विसंगतियों के मामलों में खुद घर जाकर दस्तावेज सत्यापित कर सकेंगे और आवेदकों को तय 13 श्रेणियों से बाहर के दस्तावेज जमा करने की छूट होगी।

यह विकास SIR प्रक्रिया पर चल रहे विवाद और आंतरिक मतभेदों के बीच आया है। आयोग का कहना है कि सभी SIR आदेश सर्वसम्मति से पारित हुए थे। सुप्रीम कोर्ट में संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई जारी है। नए मतदाता अब ECINet पर फॉर्म 6 भरते समय SIR घोषणा को अलग से देख सकते हैं।

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