ट्विशा शर्मा मौत मामला: पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज, जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट आना बाकी

भोपाल/जबलपुर। भोपाल की मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को आरोपी उनकी सास और सेवानिवृत्त जिला व सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ ने कहा कि मामले की जांच अभी जारी है और फॉरेंसिक तथा डिजिटल एक्सट्रैक्शन रिपोर्ट आना बाकी है।

कोर्ट ने क्यों नहीं दी जमानत

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में आरोपों की प्रकृति और गंभीरता, जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य, मृतिका की मौत से तुरंत पहले की परिस्थितियां, सीसीटीवी फुटेज तथा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट को ध्यान में रखा। कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(9) के तहत आगे की जांच चल रही है और महत्वपूर्ण फॉरेंसिक व डिजिटल रिपोर्ट का इंतजार है, इसलिए इस स्तर पर गिरिबाला सिंह को जमानत देना उचित नहीं है। अदालत ने विशेष रूप से ट्विशा की मौत से पहले परिजनों से हुई व्हाट्सएप बातचीत, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों की भूमिका की गहन जांच की आवश्यकता बताई। इन सबूतों और लंबित जांच के मद्देनजर जमानत याचिका खारिज कर दी गई।

मामला क्या है

33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की मौत 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित उनके ससुराल घर में फांसी लगाकर आत्महत्या के रूप में हुई थी। गिरिबाला सिंह पर आरोप है कि उन्होंने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी अपने बेटे समर्थ सिंह का साथ दिया। मामले की जांच सीबीआई कर रही है। सीबीआई ने हाईकोर्ट में गिरिबाला सिंह की जमानत का विरोध किया था और आरोप लगाया था कि वे जांच में सहयोग नहीं कर रहीं तथा साक्ष्य प्रभावित करने की संभावना है।

जेल में पांच महीने से अधिक

गिरिबाला सिंह को 2 जून 2026 से भोपाल सेंट्रल जेल में रखा जा रहा है। बताया जाता है कि 4 नवंबर तक वे लगभग पांच महीने और दो दिन से न्यायिक अभिरक्षा में हैं। उनकी ओर से याचिका में उनकी उम्र, बीमारी और लंबी हिरासत का हवाला देते हुए जमानत की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि उनके खिलाफ सीधा साक्ष्य नहीं है, लेकिन हाईकोर्ट ने जांच की स्थिति और साक्ष्यों को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।

अगला कदम

अब मामले में फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल एक्सट्रैक्शन रिपोर्ट आने के बाद जांच एजेंसी की ओर से आगे की कार्रवाई की जा सकती है। जमानत से इनकार के बाद गिरिबाला सिंह के पास उच्च न्यायालय में कानूनी उपाय का विकल्प बचा है।
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