इंफाल, मणिपुर में लंबे समय से जारी संकट के बीच शनिवार को इंफाल, सेनापति और चंदेल जिलों में हजारों मेइतेई, नागा, मेइतेई पंगल और अन्य मूलनिवासी समुदायों के लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार को यह आंदोलन ‘अंतिम कॉल’ या ‘आखिरी चेतावनी’ बताया और राज्य सरकार से इस्तीफे की मांग की।
क्या हुआ?
इंफाल में Coordinating Committee on Manipur Integrity (COCOMI), United Naga Council (UNC) और कई अन्य नागरिक संगठनों की ओर से विशाल रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारी टिड्डिम ग्राउंड से निकलकर THAU ग्राउंड पहुंचे, जहां कई प्रस्ताव पारित किए गए। इसी दौरान सेनापति और चंदेल में भी बड़ी रैलियां आयोजित हुईं। प्रदर्शनकारियों ने ‘हमें शांति चाहिए, प्रॉक्सी वॉर नहीं’, ‘मणिपुर को बचाओ’ और ‘जो सरकार अपने लोगों की रक्षा नहीं कर सकती, उसे इस्तीफा देना चाहिए’ जैसे नारे लगाए।
मुख्य मांगें
कुकी-ज़ो सशस्त्र समूहों के साथ Suspension of Operations (SoO) समझौते को तुरंत समाप्त किया जाए और उसे आगे न बढ़ाया जाए।
असम राइफल्स को राज्य और सीमा-ड्यूटी से हटाया जाए। मणिपुर में 1951 को आधार वर्ष मानकर NRC लागू किया जाए। हिंसा से विस्थापित हजारों परिवारों की सुरक्षित और सम्मानजनक घर वापसी सुनिश्चित की जाए। मौजूदा सरकार का इस्तीफा हो, क्योंकि उस पर स्थानीय लोगों की जान-माल की रक्षा और सामान्य स्थिति बहाल करने में विफलता का आरोप लगाया गया। उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन को मंत्रिमंडल से तुरंत हटाया जाए; चंदेल की नागा रैली में यह मांग विशेष रूप से उठाई गई।
केंद्र को ‘अंतिम कॉल’
COCOMI के संयोजक वाई.के. धीरेन ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार मूलनिवासी समुदायों की जान और संपत्ति की रक्षा करने में नाकाम रही है। उन्होंने कहा कि लंबे संकट को खत्म करने में असफल रहने के कारण सरकार को इस्तीफा देना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र पर ‘प्रॉक्सी वॉर’ चलाने और मणिपुर में नार्को-टेररिज्म को संरक्षण देने का भी आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि ऐसी नीतियों को तुरंत बंद किया जाए।
SoO समझौते पर विवाद
SoO समझौता कुकी सशस्त्र समूहों और सुरक्षा बलों के बीच युद्धविराम व संचालन रोकने की व्यवस्था है। प्रदर्शनकारी संगठनों का कहना है कि यह समझौता 24 सितंबर 2026 को समाप्त हो चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं बढ़ाया जाना चाहिए। मेइतेई संगठनों ने मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग की, जबकि नागा संगठनों ने उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन की हटाई जाने की मांग को प्रस्ताव में शामिल किया।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह आंदोलन ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में हिंसा, विस्थापन और सुरक्षा संकट को लेकर असंतोष गहरा रहा है। कांग्रेस ने भी पहले ही मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के इस्तीफे, विधानसभा भंग करने और नए चुनाव कराने की मांग की थी। रैली में शामिल संगठनों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे सरकार के इस्तीफे की मांग को और तेज करेंगे।
मणिपुर में हजारों की रैली: SoO समझौता खत्म करो, सरकार इस्तीफा दो केंद्र को ‘अंतिम चेतावनी’

