नई दिल्ली/ढाका। विपक्षी INDIA ब्लॉक ने शनिवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘पब्लिक इम्पीचमेंट’ कार्यक्रम आयोजित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसमें ज्ञानेश कुमार पर छह प्रमुख आरोप लगाए और कहा कि उन्हें राजद्रोह (ट्रीजन) के आरोप में अदालत में मुकदमा झेलना चाहिए। वहीं सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इस पूरे कार्यक्रम को संसद का मजाक और लोकतंत्र का अपमान बताया।
इस बीच बांग्लादेश की राजधानी ढाका में प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन हुआ, जिसमें महंगाई, बिजली संकट और ईंधन की कमी के मुद्दे पर नारेबाजी के साथ ‘दिल्ली ना ढाका’ जैसे भारत-विरोधी नारे भी गूंजे।
दिल्ली में मॉक इम्पीचमेंट: क्या हुआ?
कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आधिकारिक आवास (राजाजी मार्ग) पर आयोजित किया गया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इसकी अध्यक्षता की। बारिश के कारण कार्यक्रम एक दिन टाल दिया गया था। लगभग 21 विपक्षी दलों के नेता इसमें शामिल हुए।
खड़गे ने प्रस्ताव पेश करते हुए ज्ञानेश कुमार पर निम्नलिखित छह आरोप लगाए:
- चुनाव चोरी की साजिश में शामिल होना और बीजेपी के साथ मिलकर राष्ट्रीय व राज्य चुनावों को प्रभावित करना।
- स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के जरिए करीब 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाना।
- संसद की अनुमति के बिना फॉर्म-6 में बदलाव करना।
- ECINET प्लेटफॉर्म के जरिए मतदाता सूचियों पर नियंत्रण करना।
- चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों को प्रमुख फैसलों से बाहर रखना।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर काम करना।
खड़गे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के प्रत्यक्ष निर्देश पर चला रहे हैं। उन्होंने 2023 के सीईसी अधिनियम का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि यह कानून उनके ‘आपराधिक कृत्यों’ को ढाल देने के लिए लाया गया था। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन के सांसद, जो देश की 60 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, और दिल्ली में इकट्ठा हुए नागरिक इस बात पर सहमत हैं कि ज्ञानेश कुमार को संविधान के अनुसार राजद्रोह का मुकदमा झेलना चाहिए।
विपक्ष का यह कदम ‘वोट चोरी’ अभियान और SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के विरोध का हिस्सा है। विपक्ष पहले भी संसद में इम्पीचमेंट नोटिस ला चुका है, लेकिन उसे अस्वीकार कर दिया गया था। अक्टूबर की शुरुआत में पूर्व सिविल सेवकों और कार्यकर्ताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘पीपल्स चार्ज शीट’ जारी की थी, जिसमें छह समान आरोप लगाए गए थे।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
बीजेपी ने पूरे कार्यक्रम को संसद का मजाक और लोकतंत्र का अपमान करार दिया। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसे प्रतीकात्मक कार्यक्रम आयोजित कर रहा है।
बांग्लादेश में ‘दिल्ली ना ढाका’ नारे
उधर बांग्लादेश में नेशनल सिटीजन पार्टी (NCP) के संयोजक नाहिद इस्लाम के नेतृत्व में तारिक रहमान सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई, लंबे समय से चल रहे बिजली संकट, ईंधन और गैस की कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने गृह मंत्री सलाउद्दीन अहमद और ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद टुकू के इस्तीफे की मांग की। रैली में ‘दिल्ली ना ढाका? ढाका, ढाका’ के नारे भी लगे। ये नारे बांग्लादेश की संप्रभुता पर जोर देते हैं और भारत के कथित प्रभाव का विरोध करते हैं। नाहिद इस्लाम ने तारिक रहमान पर ‘नए तानाशाह’ बनने का आरोप लगाया और कहा कि देश में भ्रष्टाचार, लूट और आतंक फैलाने की योजना बनाई जा रही है।
पृष्ठभूमि और आगे क्या?
ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में सीईसी बने थे। विपक्ष लंबे समय से SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और विपक्षी मतदाताओं को निशाना बनाया जा रहा है। चुनाव आयोग ने इन आरोपों से इनकार किया है।
INDIA ब्लॉक 1 नवंबर को रामलीला मैदान में बड़ा रैली भी करने जा रहा है। बांग्लादेश में भी आर्थिक संकट और राजनीतिक असंतोष बढ़ता दिख रहा है, जिसमें भारत-विरोधी भावनाओं को फिर से जगह मिल रही है। ये दोनों घटनाक्रम दक्षिण एशिया की मौजूदा राजनीतिक अस्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर उठ रहे सवालों को रेखांकित करते हैं।

