पटना/नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का एक बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भारी चर्चा का विषय बन गया है। 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में बिहार सरकार और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (NHAI के सहयोग से) के बीच नदी जल प्रबंधन एवं गाद निकालने संबंधी समझौता ज्ञापन (MoU) हस्ताक्षर कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था पर बोलते हुए कहा, “हमारे यहां कोई अपराध नहीं है। अपराध का कॉन्सेप्ट ही खत्म हो चुका है। क्राइम हो सकते हैं, लेकिन अपराध नहीं… कोई अपराधी नहीं है।”
इस बयान में उन्होंने अंग्रेजी शब्द ‘क्राइम’ और हिंदी शब्द ‘अपराध’ के बीच अंतर बताने की कोशिश की। कानूनी और प्रशासनिक दृष्टि से दोनों शब्दों का अर्थ एक ही है, इसलिए यह शाब्दिक खेल (wordplay) कई लोगों को हैरान करने वाला लगा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सम्राट चौधरी ने आगे जल प्रबंधन को बिहार की दूसरी बड़ी चुनौती बताया और कहा कि अगर पानी का प्रबंधन ठीक कर लिया जाए तो बिहार नए सिरे से खड़ा हो सकता है।
विपक्ष का पलटवार
बयान वायरल होते ही विपक्ष ने सरकार को घेर लिया। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने वीडियो शेयर करते हुए लिखा, “बिहार में ‘Crime’ हो सकता है, ‘अपराध’ नहीं! मेरे प्यारे देशवासियों, ये बात 7 हत्याओं का आरोपी नमूना मोदी जी द्वारा चयनित मुख्यमंत्री कह रहा है। क्या मंच पर बैठे IAS-IPS अधिकारी इनके साथ काम करने पर सम्मानित महसूस करते हैं या अपमानित? क्या नरेंद्र मोदी जी ने इस व्यक्ति के माध्यम से बिहार को बर्बाद करने की सुपारी ले ली है?”
तेजस्वी ने 1990 के दशक के मुंगेर जिले से जुड़े सात हत्याओं के पुराने आरोप का हवाला दिया। सम्राट चौधरी, जो पहले RJD से जुड़े थे, इन आरोपों को झूठा बताते रहे हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने भी शब्दों की परिभाषा बदलने से जमीन पर अपराध की हकीकत नहीं बदलने की बात कही।
सरकार का रुख और दावा
सरकार और समर्थकों का कहना है कि मुख्यमंत्री का तात्पर्य संगठित अपराध, माफिया राज और बड़े अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करने से था। वे जीरो टॉलरेंस की नीति पर जोर देते हैं। सम्राट चौधरी ने कहा कि जो भी गड़बड़ी करेगा या अपराध करेगा, वह जेल जाएगा। अपराधियों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है। आधुनिक तकनीक और AI आधारित कैमरों के जरिए संदिग्धों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सम्राट चौधरी के पास गृह विभाग की जिम्मेदारी भी है। इसलिए उनके कानून-व्यवस्था संबंधी बयानों पर विशेष नजर रहती है। 4 नवंबर को उन्होंने नीतीश कुमार से मुलाकात के दौरान कहा कि नीतीश कुमार ने बिहार को संगठित अपराध से मुक्त किया है। इससे पहले वाले बयान में थोड़ा बदलाव नजर आया।
पृष्ठभूमि और बहस
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप आम हैं। सरकार दावा करती है कि पुलिस को सख्त कार्रवाई की छूट दी गई है, जबकि विपक्ष हालिया घटनाओं का हवाला देकर सवाल उठाता है। शब्दों के खेल से वास्तविकता नहीं बदलती—यह विपक्ष का मुख्य तर्क है।
सम्राट चौधरी का यह बयान सोशल मीडिया पर मीम और चुटकुलों का भी विषय बन गया। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर ‘क्राइम’ और ‘अपराध’ में क्या फर्क है। राजनीतिक विश्लेषक इसे राजनीतिक बयानबाजी का उदाहरण मान रहे हैं, जिसमें सत्ता पक्ष उपलब्धियां गिनाता है और विपक्ष कमजोरियों पर हमला बोलता है। बिहार की कानून-व्यवस्था और हालिया पुलिस कार्रवाइयों की विस्तृत जानकारी या विपक्षी नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट के लिए और पूछें।

