थिरुवनंतपुरम, केरल विधानसभा ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग वाला ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित कर दिया। कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) सरकार द्वारा लाए गए इस प्रस्ताव को विपक्षी लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) का भी समर्थन मिला, जबकि तीन भाजपा विधायकों ने इसका विरोध किया।
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने नियम 118 के तहत यह प्रस्ताव पेश किया। उन्होंने इसे देश में किसी भी राज्य विधानसभा द्वारा लाया गया पहला ऐसा प्रस्ताव बताया। सतीशन ने सोशल मीडिया पर लिखा, “केरलम इतिहास रच रहा है। पहली बार केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव पारित किया है। हमारे चुनावी प्रक्रिया की अखंडता पर कोई समझौता नहीं हो सकता।”
प्रस्ताव की तीन मुख्य माँगें
प्रस्ताव में चुनाव आयोग की निष्पक्षता और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंताएँ जताई गईं। इसमें कहा गया कि योग्य मतदाताओं, खासकर हाशिए के समुदायों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी मजदूरों और युवा मतदाताओं के नाम बिना स्पष्ट मापदंड या पूर्व सूचना के मतदाता सूची से हटाए जाने की शिकायतें हैं।
प्रस्ताव में तीन स्पष्ट माँगें रखी गईं:
1. मतदान अधिकार बहाल करें: SIR प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं को दूर किया जाए और गलत तरीके से बाहर किए गए सभी योग्य मतदाताओं के मतदान अधिकार तुरंत बहाल किए जाएँ।
2. मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाएँ: CEC ज्ञानेश कुमार की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठने के कारण उन्हें हटाने की कार्यवाही शुरू की जाए।
3. नियुक्ति प्रक्रिया में सुधार: चुनाव आयुक्तों की चयन समिति का पुनर्गठन किया जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों, ताकि संस्था की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता सुनिश्चित हो।
पृष्ठभूमि
यह प्रस्ताव चुनाव आयोग के SIR अभियान को लेकर चल रहे देशव्यापी विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी SIR में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची से नाम हटाने के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चुनाव आयोग के अंदर मतभेद और फॉर्म-6 में बदलाव के आरोप भी लगे थे, हालांकि चुनाव आयोग ने पहले कहा था कि SIR से जुड़े सभी आदेश सर्वसम्मति से पारित हुए थे। केरल विधानसभा में पहले भी सितंबर में SIR के खिलाफ प्रस्ताव पारित हो चुका था। इस बार का प्रस्ताव और मजबूत है क्योंकि इसमें सीधे CEC को हटाने की माँग शामिल है। प्रस्ताव पारित होने के साथ केरल विधानसभा देश का पहला राज्य सदन बन गया है जिसने बैठे हुए मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग की है। अब यह देखना होगा कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग इस प्रस्ताव पर क्या रुख अपनाते हैं।
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