नई दिल्ली, दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता एक बार फिर चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। सोमवार को दिल्ली का औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 324 दर्ज किया गया, जो ‘बहुत खराब’ (Very Poor) श्रेणी में आता है। इस तेज गिरावट को देखते हुए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के स्टेज-2 को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली का AQI 31 अक्टूबर को 117 (मध्यम श्रेणी) था। 1 नवंबर को यह बढ़कर 261 (खराब श्रेणी) हो गया और 2 नवंबर को 324 पर पहुंच गया। सुबह के समय कुछ स्थानों पर AQI 307 से 312 के आसपास था, जबकि दोपहर-शाम तक औसत 324 हो गया। जहांगीरपुरी में AQI 417 तक पहुंच गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में है। रोहिणी, पंजाबी बाग, मुंडका, नरेला और आरके पुरम समेत कई क्षेत्रों में AQI 350 से ऊपर दर्ज किया गया।
CAQM की सब-कमेटी ने मौसम विभाग (IMD) और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM) के पूर्वानुमान की समीक्षा के बाद यह फैसला लिया। आयोग ने कहा कि प्रतिकूल मौसम की स्थिति के कारण आने वाले दिनों में भी वायु गुणवत्ता ‘बहुत खराब’ श्रेणी में बनी रहने की संभावना है। इसलिए प्रदूषण को और बढ़ने से रोकने के लिए स्टेज-1 के साथ-साथ स्टेज-2 की सभी कार्रवाइयां पूरे एनसीआर में लागू की जा रही हैं।
GRAP स्टेज-2 के तहत मुख्य उपाय और प्रतिबंध
स्टेज-2 तब लागू होता है जब दिल्ली का AQI 301 से 400 के बीच होता है। इसके तहत एजेंसियों को निम्नलिखित कदम उठाने होंगे:
सड़कों की रोजाना मैकेनिकल/वैक्यूम स्वीपिंग और पानी का छिड़काव (खासकर रात या सुबह के समय)। धूल दबाने वाले रसायनों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण की सख्त निगरानी और निरीक्षण। निजी वाहनों के उपयोग को कम करने के लिए पार्किंग शुल्क में बढ़ोतरी। सार्वजनिक परिवहन और कारपूलिंग को बढ़ावा देना। कचरा और बायोमास के खुले में जलाने पर सख्त कार्रवाई। होटल-रेस्तरां समेत जगहों पर कोयले और लकड़ी के इस्तेमाल (तंदूर सहित) पर रोक। डीजल जनरेटर सेट्स के उपयोग पर कड़ी निगरानी और नियमन। व्यस्त चौराहों और सड़कों पर ट्रैफिक पुलिस की तैनाती बढ़ाकर जाम कम करना। निर्माण मलबे और धूल का उचित निपटान सुनिश्चित करना।
ये उपाय स्टेज-1 के मौजूदा नियमों के अलावा लागू होंगे। स्टेज-1 में पहले से ही निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण, कचरा जलाने पर रोक और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की सख्ती जैसे नियम लागू हैं।
पहले से लागू सर्दियों के अतिरिक्त उपाय
1 नवंबर से दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के तहत भी कुछ प्रतिबंध शुरू हो चुके हैं। इनमें दिल्ली के बाहर पंजीकृत नॉन-बीएस-VI पेट्रोल और डीजल वाहनों के प्रवेश पर रोक शामिल है (CNG, इलेक्ट्रिक और बीएस-VI वाहन छूट के दायरे में हैं)। केंद्र ने 5 से 20 नवंबर तक पूरे एनसीआर में निर्माण और ध्वस्तीकरण गतिविधियों को पूरी तरह निलंबित करने की भी घोषणा की है।
दिवाली 8 नवंबर को है। पिछले वर्षों की तरह त्योहार के आसपास प्रदूषण बढ़ने की आशंका को देखते हुए अधिकारियों ने सतर्कता बढ़ा दी है। पिछले सप्ताह हुई बारिश से कुछ राहत मिली थी, लेकिन उसके बाद हवा की दिशा और शांत मौसम की स्थिति ने प्रदूषकों को फैलने से रोक दिया, जिससे AQI तेजी से बढ़ा।
नागरिकों से अपील
CAQM ने नागरिकों से अपील की है कि वे नागरिक चार्टर का पालन करें। निजी वाहनों का कम से कम उपयोग करें, सार्वजनिक परिवहन अपनाएं, कचरा न जलाएं और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण नियमों का पालन करें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने N95 मास्क पहनने, बच्चों-बुजुर्गों को बाहर कम निकालने और घर के अंदर रहने की सलाह दी है।
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों का प्रदूषण हर साल गंभीर समस्या बन जाता है। GRAP एक आपातकालीन तंत्र है, जो प्रदूषण के स्तर के अनुसार चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंध बढ़ाता है। स्टेज-3 (गंभीर, AQI 401-450) और स्टेज-4 (गंभीर+, AQI 450 से ऊपर) में और सख्त उपाय जैसे निर्माण पूर्ण बंद, पुराने वाहनों पर पाबंदी और ट्रकों के प्रवेश पर रोक शामिल होते हैं। अभी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। अगर AQI और बढ़ता है तो आगे के स्टेज भी लागू हो सकते हैं। नागरिकों और एजेंसियों के सहयोग से ही प्रदूषण को नियंत्रित रखा जा सकता है।

