जर्मनी के प्रमुख शहरों में शनिवार को जेन जेड युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े पैमाने के प्रदर्शन दिन में काफी हद तक शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम होते-होते फ्रैंकफर्ट समेत कई जगहों पर हिंसा भड़क उठी। हूड पहने दंगाइयों ने दुकानों की खिड़कियां तोड़ीं, सामान लूटा और पुलिस व आपातकालीन कर्मियों पर मोलोटोव कॉकटेल, पत्थर और पटाखे फेंके।
“जेन जेड रेगेल्ट!” नाम के युवा अभियान ने देशभर में 30 से अधिक शहरों में प्रदर्शनों का आह्वान किया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें थीं – शिक्षा व्यवस्था में बेहतर निवेश, महंगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत से राहत, अनिवार्य सैन्य सेवा का विरोध, सामाजिक सेवाओं में कटौती का विरोध और बेहतर भविष्य। ये प्रदर्शन यूरोप में चल रहे जेन जेड आंदोलनों से प्रेरित थे, खासकर फ्रांस में हुए प्रदर्शनों से।
आयोजकों का दावा है कि पूरे जर्मनी में करीब 1.20 लाख लोग सड़कों पर उतरे, जबकि पुलिस के आंकड़ों के अनुसार फ्रैंकफर्ट, म्यूनिख और बर्लिन समेत प्रमुख शहरों में कुल उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही। फ्रैंकफर्ट में पुलिस ने करीब 8,000 और आयोजकों ने करीब 9,000 लोगों की उपस्थिति बताई। कई युवा हैलोवीन के मौके पर डायनासोर, बैटमैन जैसे पोशाक पहनकर भी पहुंचे थे।
फ्रैंकफर्ट में सबसे ज्यादा हिंसा
जर्मनी के वित्तीय केंद्र फ्रैंकफर्ट में स्थिति सबसे खराब रही। शाम को शहर के प्रमुख शॉपिंग स्ट्रीट ज़ाइल (Zeil) पर दंगाइयों ने कई दुकानों की शीशे तोड़े। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस के अनुसार स्नीकर्स की दुकान, परफ्यूम स्टोर और एक हथियार की दुकान समेत कई जगहों पर लूटपाट हुई। हथियार की दुकान से दो हथियार भी जब्त किए गए और एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। फ्रैंकफर्ट पुलिस ने सोशल मीडिया पर लिखा, “शहर के केंद्र में हिंसक दंगे जारी हैं। कई दुकानों की खिड़कियां तोड़ी गई हैं। आपातकालीन कर्मियों पर मोलोटोव कॉकटेल भी फेंके जा रहे हैं। सभी आम लोगों से अनुरोध है कि शहर केंद्र से दूर रहें या क्षेत्र छोड़ दें।” पुलिस ने ज़ाइल सड़क को पूरी तरह बंद कर दिया।
हेस्से राज्य के गृह मंत्री रोमन पोसेक ने कहा कि प्रदर्शन में करीब 100 स्पष्ट रूप से पहचाने गए वामपंथी उग्रवादियों ने घुसपैठ की थी। उन्होंने पुलिस पर बोतलें, पत्थर और पायरोटेक्निक से हमला किया। कई पुलिसकर्मी घायल हुए। पुलिस ने स्थिति नियंत्रण में लेने के लिए वाटर कैनन और पेपर स्प्रे का इस्तेमाल किया।
अन्य शहरों में भी झड़पें
कोलोन में कैथेड्रल के पास पुलिस पर बोतलें और साइकिलें फेंकी गईं। बर्लिन में शाम को प्रदर्शन के दौरान पत्थरबाजी और आतिशबाजी हुई, जिसके बाद पुलिस को प्रदर्शन भंग करना पड़ा। हैम्बर्ग में कुछ बैरिकेड्स में आग लगाई गई। कई जगहों पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
अधिकारियों ने कहा कि दिन के प्रदर्शन ज्यादातर शांतिपूर्ण रहे, लेकिन हैलोवीन की शाम को उग्र तत्वों ने स्थिति बिगाड़ दी। संघीय गृह मंत्रालय ने पहले ही चेतावनी दी थी कि वामपंथी उग्रवादी और कुछ विदेशी उग्रपंथी समूह इस आंदोलन का फायदा उठाने की कोशिश कर सकते हैं।
जेन जेड रेगेल्ट की प्रवक्ता लीना फ्रेडरिक ने बर्लिन में कहा, “हम आज शांति और आजादी के लिए लड़ने आए हैं, युद्ध और जबरदस्ती के लिए नहीं।” आयोजकों ने हिंसा की निंदा की है और कहा है कि हिंसक तत्व उनके आंदोलन से जुड़े नहीं हैं। जर्मनी में ये प्रदर्शन यूरोप भर में युवाओं के असंतोष का हिस्सा माने जा रहे हैं, जहां शिक्षा की गुणवत्ता, आर्थिक दबाव और भविष्य की अनिश्चितता को लेकर नई पीढ़ी सड़कों पर उतर रही है। फ्रैंकफर्ट और अन्य शहरों में हुई हिंसा ने इस मुद्दे को और गंभीर बना दिया है। पुलिस जांच जारी है और गिरफ्तारियां भी हुई हैं।