राहुल गांधी की वियतनाम यात्रा और रामलीला मैदान रैली: साजिश के दावे असत्यापित, सियासी विवाद तेज

नई दिल्ली, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बीते दिनों की वियतनाम यात्रा और आज दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘इंडिया’ गठबंधन की प्रस्तावित महारैली को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। भाजपा ने विपक्ष के प्रदर्शन के दौरान विदेश यात्रा पर सवाल उठाया, जबकि कांग्रेस ने इसे राहुल गांधी के निजी समय का अधिकार बताया।

सोशल मीडिया पर यात्रा और रैली को लेकर कई आक्रामक दावे वायरल हो रहे हैं, जिनमें राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर विदेशी ताकतों के सहयोग से “भारत को कमजोर करने की साजिश” का आरोप लगाया जा रहा है। हालांकि, इन दावों के समर्थन में कोई प्रमाणित सरकारी बयान, न्यायिक दस्तावेज या स्वतंत्र जांच रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन्हें अभी असत्यापित आरोप ही माना जाना चाहिए।

वियतनाम यात्रा पर सियासत

सुप्रीम न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता धुरुव कुमार जो की एक मानवाधिकार कार्यकर्ता भी है,  के अनुसार, राहुल गांधी गोवा में कांग्रेस की ‘गॉय रखोण यात्रा’ में हिस्सा लेने के बाद चार दिन के विदेश दौरे पर वियतनाम रवाना हुए थे। भाजपा ने इसे विपक्ष के प्रदर्शनों के बीच “गैर-जिम्मेदाराना” बताते हुए तंज कसा, जबकि कांग्रेस ने कहा कि कोई भी नागरिक अपने निजी समय में विदेश यात्रा कर सकता है।

कांग्रेस का तर्क है कि राहुल गांधी ने यात्रा से पहले गोवा में पार्टी कार्यक्रम में भाग लिया और राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रहे।  वहीं, भाजपा ने इस यात्रा को ‘वोट चोरी’ आंदोलन के धीमे पड़ने से जोड़कर राजनीतिक हमला बोला।

रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ रैली

‘इंडिया’ गठबंधन ने 1 नवंबर को रामलीला मैदान में ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ महारैली बुलाई है। रैली का मुख्य मुद्दा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR), कथित चुनाव अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग है।

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर दोपहर 12 बजे मिंटो रोड-कनॉट प्लेस जंक्शन से शुरू होकर अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पैदल मार्च का न्योता दिया। उन्होंने इसे किसी एक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का प्रयास बताया। दिल्ली पुलिस ने, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, रैली स्थल के लिए अनुमति देने की बात कही है, लेकिन कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च के लिए अलग से अनुमति नहीं मांगी गई। प्रशासन ने सुरक्षा के लिए 14 सुरक्षा जोन, लगभग 4,000 पुलिसकर्मी और 200 से अधिक कैमरे तैनात करने की तैयारी की है।

वायरल दावे बनाम उपलब्ध साक्ष्य

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि रैली में “पेड एजेंट” भेजे जा रहे हैं और विदेशी फंडिंग तथा क्रिप्टोकरेंसी के जरिए देशभर में अशांति फैलाने की योजना है। ये दावे गंभीर हैं, परंतु अभी तक किसी प्रमाणित एजेंसी, अदालत या स्वतंत्र तथ्य-जांच संस्था द्वारा सत्यापित नहीं हुए हैं।

राजनीतिक माहौल

रैली से पहले 1984 के सिख-विरोधी दंगों के कुछ पीड़ितों ने भी इसका विरोध करने की घोषणा की है, जिससे कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक तनाव और बढ़ा है।  राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि अन्य राज्यों से आने वाले समर्थकों को रोका जा रहा है, जबकि प्रशासनिक पक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था को कार्यक्रम के अनुरूप बताया है।

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