म्यांमार से तस्करी होकर आ रहा ‘कोटा’, नशा में सूखा बिहार बना उड़ता बिहार

पटना। बिहार में अप्रैल 2016 से लागू शराबबंदी के 10 साल पूरे होने के बाद पुलिस ने करीब 3.16 करोड़ लीटर शराब जब्त की है और लगभग 7.15 लाख गिरफ्तारियां की हैं। रोजाना औसतन 8,650 लीटर शराब और 196 गिरफ्तारियां। यह आंकड़ा जगजाहिर है। लेकिन शराब की बोतल के पीछे एक और खतरनाक दुनिया चुपचाप आकार ले रही है। जेब के छोटे पैकेट, गोली की स्ट्रिप्स, हेरोइन का कच्चा रूप ‘कोटा’, शीशियां, साबुन के डिब्बे और यहां तक कि पेटीकोट की तह में छिपा नशा। द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शराब पर सख्ती के बीच नशीले पदार्थों का बाजार तेजी से फैल रहा है।

NDPS मामलों में चौंकाने वाली बढ़ोतरी
बिहार पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक:
– 2019 में NDPS एक्ट के तहत 697 मामले दर्ज हुए।
– 2025 में यह आंकड़ा 2,716 पहुंच गया।
– 2026 के जनवरी से मई तक अकेले 1,905 मामले दर्ज हो चुके हैं (2022 के पूरे साल से भी 83 ज्यादा)।

गोलियों की जब्ती में और भी तेज उछाल देखा गया है। 2022 में पूरे साल 29,762 गोलियां जब्त हुईं, जबकि 2026 के पहले पांच महीनों में ही लगभग 9.29 लाख गोलियां जब्त की गईं—करीब 30 गुना बढ़ोतरी। गांजा की जब्ती भी 2022 के 16,692 किलोग्राम से बढ़कर 2025 में 31,915 किलोग्राम हो गई।

क्या है ‘कोटा’?
‘कोटा’ कच्ची हेरोइन का एक रूप है। यह हल्के पीले या केसरिया-सफेद दानेदार पदार्थ जैसा दिखता है, जिसे आसानी से छोटे हिस्सों में तोड़ा जा सकता है। नाम ‘कोटा’ ‘क्वोटा’ (खुराक) शब्द से निकला है। एक शीशी अब 300-400 रुपये में बिक रही है। जांचकर्ताओं के अनुसार इसमें चाक पाउडर, चीनी, कैफीन पाउडर, माल्टेड ड्रिंक्स और यहां तक कि सूखा गोबर भी मिलाया जा रहा है।

तस्करी का रूट
अधिकांश हेरोइन, ‘कोटा’ और मेथामफेटामाइन म्यांमार के गोल्डन ट्रायंगल (म्यांमार-लाओस-थाईलैंड) से आते हैं। वहां गुप्त लैब में तैयार माल मिजोरम और मणिपुर की सीमा से भारत में घुसता है। चम्फाई-आइजोल-सिलचर कॉरिडोर होते हुए असम पहुंचता है, फिर ट्रेन से बिहार। नेपाल सीमा भी एक प्रमुख रास्ता है। बिहार के अंदर किशनगंज, पूर्वी चंपारण, वैशाली, भोजपुर जैसे जिलों से होकर यह फैलता है। साबुन के डिब्बे, माचिस की डिब्बी, कपड़ों की तह और महिलाओं के पेटीकोट में छिपाकर ट्रेन से लाया जा रहा है। चाय की दुकान, पान-सिगरेट की दुकान और सड़क किनारे के विक्रेता वितरण का काम करते हैं। पटना, वैशाली (खासकर राघोपुर), समस्तीपुर और मुजफ्फरपुर नए हॉटस्पॉट बन रहे हैं। ‘कोटा’ मामलों में गिरफ्तार करीब 80 प्रतिशत लोगों का वैशाली से लिंक बताया जा रहा है।

स्वास्थ्य तंत्र पर दबाव
डी-एडिक्शन सेंटर अपनी क्षमता से 20 गुना तक मरीजों को संभाल रहे हैं। नशा अब शहरों से गांवों तक पहुंच चुका है। पौध-आधारित पदार्थों से हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स की तरफ शिफ्ट साफ दिख रहा है। शराब पर सख्ती के बावजूद नशीले पदार्थों का यह समानांतर बाजार सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों को चुनौती दे रहा है। पुलिस अब शराब की तलाशी के साथ-साथ इन छोटे पैकेट और शीशियों पर भी नजर रख रही है, लेकिन नेटवर्क गहरा और अंतरराष्ट्रीय है।

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