जबलपुर बरगी डैम क्रूज त्रासदी: आंधी-तूफान ने पर्यटन की सैर को बनाया मौत का सैलाब, 9 मौतें, 4-5 अब भी लापता; लापरवाही के आरोप, जांच शुरू

जबलपुर बरगी डैम क्रूज त्रासदी: मध्य प्रदेश के जबलपुर में नर्मदा नदी पर बने बरगी डैम के पर्यटन क्रूज ने गुरुवार शाम (30 अप्रैल 2026) को भयावह रूप ले लिया। अचानक चली तेज आंधी और ऊंची लहरों ने पर्यटकों से भरे क्रूज को पलट दिया। इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4-5 लोग अभी भी लापता हैं। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमें रेस्क्यू अभियान में जुटी हुई हैं। घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया है और जल पर्यटन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हादसे का भयावह विवरण

शाम करीब सवा छह बजे खमरिया टापू के पास क्रूज अचानक हिचकोले खाने लगा। चश्मदीदों और उत्तरजीवियों के अनुसार, तेज आंधी से क्रूज में पानी घुसने लगा, संतुलन बिगड़ा और महज कुछ ही मिनटों में यह पलट गया। एक वायरल वीडियो में क्रूज में पानी भरते और यात्रियों के चीख-पुकार की आवाज साफ सुनाई दे रही है। कई यात्रियों ने बताया कि लाइफ जैकेट स्टोर रूम में बंद थीं, जिन्हें यात्रियों को खुद तोड़कर निकालना पड़ा। ओवरलोडिंग की भी शिकायतें आई हैं – रिपोर्ट्स के मुताबिक 29-31 टिकटों पर 40 से ज्यादा लोग सवार थे।

माँ का आखिरी आलिंगन जिसने देश को रुला दिया

इस पूरे हादसे में एक दृश्य ऐसा है जिसने पत्थर दिल इंसान को भी झकझोर दिया। दिल्ली से जबलपुर घूमने आई मरीना मैसी अपने परिवार के साथ क्रूज पर सवार थीं। शुक्रवार सुबह जब गोताखोरों ने उनका शव निकाला, तो उनके हाथ अभी भी अपने चार वर्षीय बेटे त्रिशान को छाती से लगाए हुए थे। मरीना खुद लाइफ जैकेट पहने हुई थीं वह तैर सकती थीं, बच सकती थीं। लेकिन उन्होंने अपनी जैकेट बेटे को लपेटते हुए उसे अपने सीने से लगा लिया। उनकी बेटी सिया, पिता प्रदीप मैसी और पति बच गए, लेकिन मरीना और त्रिशान को नहीं बचाया जा सका। बचाव दल के अनुभवी जवान भी यह दृश्य देखकर रो पड़े।

चमत्कारिक बचाव — 70 वर्षीय रियाज हुसैन

जबलपुर निवासी रियाज हुसैन क्रूज के एसी चैंबर में नीचे की ओर बैठे थे और क्रूज डूबने के 3 घंटे बाद भी चमत्कारिक रूप से जीवित बच गए। उन्होंने बताया कि हादसे में उनका बेटा जाफर भी सुरक्षित है। रियाज हुसैन ने भावुक होकर बताया, “तीन घंटे गले तक पानी में फंसे रहे। मां को डूबते देखा, पत्नी, पोता और साली अभी लापता हैं।”

आम जनता और परिजनों का दर्द व गुस्सा

परिजन क्रूज संचालकों और प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि मौसम विभाग ने एक दिन पहले ही 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाली आंधी का येलो अलर्ट जारी किया था, फिर भी क्रूज को पानी में उतारा गया। गांव वालों की चीख-पुकार को पायलट ने नजरअंदाज कर दिया। संगठिता कोरी जैसी पीड़ितों ने बताया कि सुरक्षा उपकरण समय पर उपलब्ध नहीं थे। दिल्ली में मरीना और उनके परिवार के शव पहुंचने पर हजारों लोगों ने अंतिम विदाई दी। सोशल मीडिया पर #JabalpurCruiseTragedy ट्रेंड कर रहा है। आम नागरिकों में आक्रोश है – “पर्यटन के नाम पर लोगों की जान क्यों जोखिम में डाली जा रही है?” कई लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही की साजिश है।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और सरकारी कार्रवाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मृतकों के परिजनों को गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मुआवजे की घोषणा की, जांच के आदेश दिए और पूरे राज्य में क्रूज संचालन पर तत्काल रोक लगा दी। बहादुरों को स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित करने का वादा भी किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त करते हुए पीएमएनआरएफ से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता की घोषणा की। प्रशासन ने कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया है और उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है।

ताजा अपडेट और आगे की चुनौतियां

शुक्रवार-शनिवार तक रेस्क्यू जारी है। क्रूज को बाहर निकालने के प्रयास हो रहे हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका है। सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त दिशानिर्देश बनाने का भरोसा दिया है, जिसमें मौसम अलर्ट, क्षमता से अधिक सवारियों पर रोक और बेहतर सुरक्षा उपकरण शामिल हैं। बरगी डैम मध्य प्रदेश का प्रमुख पर्यटन स्थल है, लेकिन यह त्रासदी जल पर्यटन की कमजोरियों को उजागर कर गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित ड्रिल, बेहतर मौसम निगरानी और प्रशिक्षित स्टाफ जरूरी है। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी का परिणाम लग रहा है। पीड़ित परिवार न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि पूरा देश उम्मीद कर रहा है कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। प्रशासन और पर्यटन विभाग पर अब जिम्मेदारी है कि वे न केवल मुआवजा दें, बल्कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई भी करें ताकि अन्य पर्यटक स्थलों पर भी सबक लिया जा सके।

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