दिल्ली के तुगलकाबाद में भीषण अग्निकांड: 3 की मौत, 8 घायल, तंग गली में खड़े वाहनों से भड़की आग ने छह मंजिला इमारत को लपेटा

राजधानी दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में शुक्रवार की तड़के एक छह मंजिला आवासीय इमारत में भीषण आग लग गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और आठ अन्य घायल हो गए। यह अग्निकांड मध्यम मार्ग पर नया तारा अपार्टमेंट के पास गली नंबर 1 स्थित एक इमारत में हुआ, जो ओखला फायर स्टेशन-1 के अधिकार क्षेत्र में आती है।

आग की शुरुआत कहाँ से हुई?

दिल्ली अग्निशमन सेवा (DFS) के सहायक मंडल अधिकारी (ADO) यशवंत सिंह मीणा ने बताया कि यह इमारत एक ग्राउंड फ्लोर और पाँच ऊपरी मंजिलों से मिलकर बनी है और एक संकरी गली में स्थित है, जिसके कारण बचाव एवं अग्निशमन कार्य में गंभीर चुनौतियाँ आईं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग की शुरुआत मकान के भीतर खड़े वाहनों से हुई, जो देखते-देखते ऊपरी मंजिलों तक फैल गई।

रात के अँधेरे में मची चीख-पुकार

अग्निशमन विभाग को रात 2:35 बजे से 2:37 बजे के बीच आग और लोगों के फँसे होने की कई आपातकालीन कॉलें प्राप्त हुईं।इसके जवाब में विभाग ने तत्काल तीन वाटर टेंडर, दो वाटर बाउज़र, एक ब्रीदिंग सपोर्ट यूनिट और एक क्विक रिस्पॉन्स व्हीकल रवाना किए। बाद में कई और संकट कॉल आने पर एक अतिरिक्त वाटर टेंडर/लाइट फायर यूनिट भी मौके पर भेजी गई।

तीन की मौत, कैसे हुआ सब?

पाँच घायलों को अस्पताल पहुँचाया गया दो महिलाओं और एक पुरुष को AIIMS ट्रॉमा सेंटर, जबकि पाँच महिलाओं को सफदरजंग अस्पताल भेजा गया। सफदरजंग में दो महिलाओं की मौत हो गई और तीन का उपचार जारी है। AIIMS में एक पुरुष की मौत हुई और दो महिलाएँ उपचाराधीन हैं।

बचाव अभियान और आग पर काबू

ADO मीणा के साथ स्टेशन ट्रेनिंग ऑफिसर मुकुल भारद्वाज, स्टेशन ऑफिसर समर्थ लाल और स्टेशन ऑफिसर राज कुमार ने बचाव अभियान का नेतृत्व किया। रात 3:45 बजे ADO मीणा ने बताया कि आग पर काबू पा लिया गया है। रात 4:00 बजे DFS ने स्टॉप मैसेज जारी किया, जिसका अर्थ था कि अग्निशमन कार्य पूरा हो गया। आग बुझने के बाद भी बचाव कार्य जारी रहा और अंतिम चरण में एक और व्यक्ति को सुरक्षित निकाला गया, जिससे DFS द्वारा बचाए गए लोगों की कुल संख्या छह हो गई।

संकरी गलियाँ — मौत की राह

यह घटना दिल्ली की उस पुरानी और गंभीर समस्या की ओर फिर से ध्यान खींचती है जहाँ अवैध निर्माण, तंग गलियाँ और इमारतों के भीतर वाहन खड़े करने की आदत जानलेवा साबित होती है। कुछ हफ्ते पहले दिल्ली की एक अन्य इमारत में लगी आग में भी बेसमेंट में चल रहे रेस्तराँ को जिम्मेदार बताया गया था, जहाँ कम से कम 20 लोगों की जान गई थी। विशेषज्ञों का कहना है कि इमारतें “चिमनी” की तरह काम करती हैं जैसे ही आग लगती है, बंद संरचना में घना धुआँ और तीव्र गर्मी तेजी से ऊपरी मंजिलों तक पहुँच जाती है, जिससे रहवासियों के पास सुरक्षित भागने का समय नहीं बचता।

पिछले महीनों में दिल्ली में आग की झड़ी

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब दिल्ली में पिछले कुछ महीनों में अग्निकांड की घटनाएँ बढ़ी हैं। मई 2026 में विवेक विहार की एक आवासीय इमारत में AC के फटने से लगी आग में नौ लोगों की जान गई थी, जिनमें पूरे परिवार के सदस्य शामिल थे।  एक अन्य भीषण अग्निकांड में दिल्ली की एक आवासीय इमारत में 20 लोग मारे गए थे।

जाँच जारी, प्रशासन सतर्क

पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। आग के सटीक कारण की पुष्टि अभी बाकी है। अधिकारियों ने इमारत मालिकों को अग्नि सुरक्षा मानकों का पालन न करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। CATS एम्बुलेंस सेवा ने घायलों को समय पर अस्पताल पहुँचाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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