गंगा मैया की अपमान या पशु-प्रेम? हरिद्वार के श्रद्धानंद घाट पर कुत्ता नहलाने का VIDEO वायरल, श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश, महिला ने दी धमकी

“मंत्रालय से जुड़ी हूँ, सबको परिणाम भुगतना होगा” महिला का बयान बना नए विवाद की जड़। देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र तीर्थस्थल हरिद्वार में गंगा घाट की पवित्रता को लेकर एक नया और संवेदनशील विवाद उठ खड़ा हुआ है। हरिद्वार के गंगा घाट से एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है जो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। इसमें एक महिला अपने पालतू कुत्ते को पवित्र गंगा नदी में नहलाती नज़र आती है, जिसके बाद वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं और उस महिला के बीच तीखी बहस हो जाती है। मामला इतना बढ़ गया कि घाट पर तनावपूर्ण माहौल बन गया और पूरा देश सोशल मीडिया पर दो खेमों में बँट गया।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना हरिद्वार के श्रद्धानंद घाट की बताई जा रही है, जहाँ महिला ने अपने पालतू कुत्ते को गंगा में नहलाया। जब वहाँ उपस्थित श्रद्धालुओं ने उसे रोकने की कोशिश की, तो महिला ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और खुद को मंत्रालय का कर्मचारी बताया।

जानकारी के अनुसार सबसे पहले घाट पर उपस्थित पुजारी ने महिला को ऐसा करने से मना किया, लेकिन महिला ने उनकी बात नहीं मानी। इसके बाद वहाँ मौजूद श्रद्धालु भी इकट्ठा हो गए और विरोध करने लगे। वीडियो में एक व्यक्ति कहते हुए सुना जा सकता है “इनको पहले पंडित जी ने मना किया, फिर भी ये नहीं मानीं।” महिला के रवैये ने माहौल को और भड़का दिया। वह कथित तौर पर कहती नज़र आती है कि “याद रखना ये डेट और टाइम — सबको परिणाम भुगतना होगा।” इस दौरान उसने खुद को किसी मंत्रालय से जुड़ा बताने का दावा भी किया, हालाँकि इसकी अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

श्रद्धालुओं का आक्रोश “यहाँ इंसान नहाएंगे या कुत्ते?”

घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं ने इस घटना को धार्मिक मर्यादा के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि गंगा घाट पर जहाँ लोग आस्था के साथ स्नान करने आते हैं, वहाँ इस तरह का व्यवहार अनुचित है। कई लोगों ने महिला के रवैये पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि उसे कुत्ते को अलग स्थान पर नहलाना चाहिए था। मौके पर मौजूद एक बुज़ुर्ग तीर्थयात्री ने कहा “हम यहाँ मोक्ष की कामना से गंगा स्नान के लिए आते हैं, यह आस्था का स्थान है, पालतू जानवरों का स्नानघर नहीं।”

सोशल मीडिया पर दो धड़े — बहस हुई तीखी

वीडियो के वायरल होते ही इंटरनेट दो खेमों में बँट गया। एक वर्ग का तर्क है कि धार्मिक स्थलों पर कुछ नियम होते हैं और लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का सम्मान होना चाहिए। दूसरे वर्ग ने पलटकर सवाल उठाया कि कुत्ते भी ईश्वर की रचना हैं और एक मूक जानवर को नदी में नहलाने में क्या बुराई है। सोशल मीडिया यूज़र @DharmaRakshak ने लिखा — “गंगा माँ का अपमान बर्दाश्त नहीं होगा, यह तीर्थ है, पार्क नहीं।” वहीं एक अन्य यूज़र ने लिखा “जानवरों को पानी पिलाना या नहलाना पाप कैसे हो सकता है? अंधभक्ति को छोड़ो।” हालाँकि अधिकांश टिप्पणीकारों ने कहा कि असली मुद्दा कुत्ता नहलाना नहीं, बल्कि महिला का अहंकारपूर्ण रवैया और उसकी “धमकी भरी भाषा” है।

राजनीतिक गलियारों में भी हलचल

इस घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। हिंदूवादी संगठनों और कुछ भाजपा नेताओं ने इसे “गंगा की पवित्रता पर सीधा हमला” करार दिया है और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की माँग की है। स्थानीय धर्म परिषद के एक प्रतिनिधि ने कहा “यदि महिला सच में किसी मंत्रालय से जुड़ी है, तो यह और भी गंभीर मामला है। सरकारी पद का दुरुपयोग करके धार्मिक मर्यादा की अनदेखी बिल्कुल स्वीकार्य नहीं।”

विपक्षी नेताओं ने इस मामले को अलग नज़रिए से उठाया। एक वरिष्ठ कांग्रेस नेता ने कहा “अगर महिला सरकारी कर्मचारी है और उसने सत्ता का दुरुपयोग किया, तो भाजपा सरकार को जवाब देना होगा। यह ‘VIP culture’ की बीमारी है।” समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता ने टिप्पणी की “एक तरफ गंगा सफाई पर करोड़ों खर्च होते हैं, दूसरी तरफ सत्ता के मद में चूर लोग धार्मिक स्थलों को अपनी जागीर समझते हैं।”

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल

घटना 1 मई को हुई और वीडियो तेज़ी से वायरल हुआ, लेकिन अब तक हरिद्वार प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या कार्रवाई सामने नहीं आई है। स्थानीय पुरोहित समाज ने माँग की है कि महिला की पहचान सार्वजनिक की जाए, उसके “मंत्रालय से जुड़े” दावे की जाँच हो, घाटों पर नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानून बनाया जाए

धर्म, कानून और पशु-अधिकार का त्रिकोण

यह मामला एक जटिल बहस को भी जन्म दे रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि गंगा नदी को 2017 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने “जीवित इकाई” का दर्जा दिया था (हालाँकि यह फैसला बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती का सामना करना पड़ा)। ऐसे में धार्मिक घाटों पर प्रदूषण फैलाने संबंधी नियमों के तहत कार्रवाई की माँग उठ रही है। पशु कल्याण कार्यकर्ताओं ने हालाँकि महिला का समर्थन करते हुए कहा कि जानवरों को पानी पिलाना या नहलाना मानवीय कृत्य है, परंतु उन्होंने भी माना कि “सार्वजनिक धार्मिक स्थल पर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए थी।”

पृष्ठभूमि: बार-बार उठता है गंगा-प्रदूषण का सवाल

यह पहला मौका नहीं है जब हरिद्वार के घाटों पर मर्यादा और प्रदूषण का सवाल उठा हो। इससे पहले ऋषिकेश के साई घाट पर एक महिला द्वारा पूजा का प्लास्टिक कचरा नदी किनारे दफनाने का वीडियो भी वायरल हो चुका है, जिसने गंगा की स्वच्छता पर राष्ट्रीय बहस को पुनर्जीवित किया था।

आगे क्या?

मामला अभी थमता नहीं दिख रहा। स्थानीय गंगा सभा और पुरोहित संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपने की तैयारी की है। सोशल मीडिया पर #HaridwarGhatControversy और #GangaKiMaryada जैसे हैशटैग ट्रेंड हो रहे हैं। अंतिम सवाल जो इस पूरे विवाद से उभरता है वह यह है: क्या पवित्र तीर्थस्थलों पर आचार-संहिता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस कानूनी ढाँचा होना चाहिए  या धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बीच की यह खींचतान अनिश्चित काल तक चलती रहेगी?

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