बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे कल 4 मई को आने वाले हैं, लेकिन मतगणना से पहले ही राजनीतिक रणभूमि में इतनी हलचल है जितनी शायद चुनाव प्रचार के दौरान भी नहीं थी। एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एग्जिट पोल को “शेयर बाजार को झटका देने की साजिश” बता रही हैं, तो दूसरी तरफ फाल्टा में हिंसा के आरोप, सुप्रीम कोर्ट में TMC को झटका, ईवीएम छेड़छाड़ की शिकायतें और दक्षिण 24 परगना में पुनर्मतदान ये सब मिलकर बंगाल के सियासी माहौल को भारी बना रहे हैं। ममता का एग्जिट पोल पर बड़ा हमला: “यह शेयर बाजार को प्रभावित करने की चाल है”
TMC सुप्रीमो और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एग्जिट पोल को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ये सर्वेक्षण महज शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव लाने और जनमानस को प्रभावित करने का जरिया हैं, और दावा किया कि TMC 200 से अधिक सीटें जीतेगी। विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल में भाजपा को 142 से 203 और TMC को 89 से 187 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है यानी मुकाबला बेहद करीबी और अनिश्चित बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार ममता ने कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने के लिए यह बयान दिया। जनता की प्रतिक्रिया देखें तो कोलकाता के व्यापारी सुब्रत घोष कहते हैं, “एग्जिट पोल देखकर हम कन्फ्यूज हैं कोई कह रहा है TMC जीतेगी, कोई BJP। अब सोमवार को ही सच्चाई पता चलेगी।” वहीं उत्तर 24 परगना के एक युवा मतदाता का कहना था, “दीदी ने विकास किया, लेकिन भ्रष्टाचार के मामलों ने उनकी छवि खराब की है।”

फाल्टा में सुलगता असंतोष: TMC पर हिंसा और धमकी के आरोप
चुनाव में 92.93 प्रतिशत की ऐतिहासिक मतदान प्रतिशत दर्ज हुई जो 2011 के बाद का सर्वोच्च रिकॉर्ड है। इतने उच्च मतदान के बावजूद पश्चिम बंगाल के फाल्टा इलाके में भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि TMC कार्यकर्ताओं ने उन्हें हिंसा और आगजनी की धमकी दी।
मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय सुरक्षा बलों को संवेदनशील स्थानों पर तैनात करना पड़ा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मतदान के बाद उन्हें चुनावी प्रतिशोध का डर सता रहा है। भाजपा ने इस घटना को लेकर चुनाव आयोग से शिकायत की। फाल्टा की एक महिला निवासी ने बताया, “हम डर में जी रहे हैं। वोट दिया तो जान का खतरा है, नहीं दिया तो भी।” यह बयान बंगाल की उस राजनीतिक संस्कृति की तस्वीर पेश करता है जहाँ आम जनता अक्सर दो दलों की लड़ाई में पिसती है।
सुप्रीम कोर्ट में ममता को बड़ा झटका: मतगणना पर्यवेक्षक विवाद
मतगणना से ठीक पहले सुप्रीम कोर्ट ने TMC की एक अहम मांग को अस्वीकार कर दिया। TMC ने अपील की थी कि मतगणना पर्यवेक्षकों के रूप में राज्य सरकार के नामितों को नियुक्त किया जाए। पार्टी का तर्क था कि केंद्र सरकार के कर्मचारी केंद्र में सत्तारूढ़ BJP से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे निष्पक्षता पर असर पड़ेगा। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने चुनाव आयोग के परिपत्र को गलत मानने से इनकार कर दिया और TMC की याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने भी मतगणना प्रक्रिया में दखल देने से इनकार करते हुए TMC की याचिकाएं खारिज कर दीं। यह ममता सरकार के लिए मतगणना से पहले कानूनी मोर्चे पर दोहरा झटका है।
ईवीएम विवाद: “पैनिक बटन” या रणनीतिक दांव?
TMC ने इस बार आश्चर्यजनक रूप से ईवीएम में छेड़छाड़ और अदला-बदली के आरोप लगाए हैं जबकि यह दल इससे पहले इस मुद्दे पर चुप रहता था। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह एग्जिट पोल के प्रतिकूल अनुमानों के चलते उत्पन्न ‘नर्वसनेस’ का संकेत है।
स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा को लेकर TMC और BJP नेताओं में जमकर टकराव हुआ। स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक स्ट्रॉन्ग रूम में पहुंच गईं और घंटों वहाँ रहीं। इस पर भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि जो हार रहा होता है, वही ऐसी शिकायतें करता है। दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर इलाके में ईवीएम पर बटन टेप से ढके होने की शिकायत मिली। इस पर चुनाव आयोग ने तत्काल संज्ञान लिया और 15 बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया। मतगणना शुरू होने से पहले आयोग पर्यवेक्षकों से मिली रिपोर्ट के आधार पर पुनर्मतदान संबंधी अंतिम निर्णय ले रहा है।
रिकॉर्ड मतदान और राजनीतिक भविष्य की दिशा
92 प्रतिशत से अधिक मतदान ने इस चुनाव को और भी दिलचस्प बना दिया है। शुरुआती अनुमानों में TMC आगे थी, लेकिन दूसरे चरण के बाद भाजपा ने अंतर काफी पाट लिया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सामने यह अब तक की सबसे कठिन चुनावी चुनौती है।
2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटें घटकर 12 रह गई थीं, जिससे TMC को राहत मिली थी। लेकिन इस विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर जोरदार वापसी की कोशिश की है। बंगाल की जनता की बात करें, तो मालदा के एक किसान रमेश मंडल का कहना है “हमें सिर्फ खेत के लिए पानी, बच्चों के लिए नौकरी और घर में सुरक्षा चाहिए। BJP आए या TMC, काम होना चाहिए।” यही आम आदमी की आवाज़ है जो इन चुनावों में सबसे बड़ा मतदाता है।
एक अलग कोने से उठती उम्मीद: 71 साल के ‘गान दादू’ की कहानी
राजनीतिक उठापटक के बीच बंगाल से एक दिल को छूने वाली खबर भी आई। फाल्टा इलाके से नहीं, बल्कि बंगाल के एक छोटे से गांव से — रिटायर्ड शिक्षक रवींद्र नाथ बिस्वास ने 71 साल की उम्र में अपने बेटों की मदद से इंस्टाग्राम पर ‘गान दादू’ के नाम से देशभर में पहचान बनाई। जिंदगी भर का सपना देर से ही सही, पूरा हुआ। यह कहानी बंगाल के उस आम इंसान की है जो चुनावी शोर से दूर, अपने सपनों को जिंदा रखता है।
4 मई: फैसले का दिन
सोमवार सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू होगी। तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के बीच 23 जिला मतगणना केंद्रों पर ईवीएम खुलेंगी। सवाल यही है क्या ममता बनर्जी 15 साल की सत्ता का चौथा अध्याय लिखेंगी, या भाजपा बंगाल में पहली बार कमल खिलाने में कामयाब होगी? बंगाल का जवाब — घड़ी की सुइयों के साथ — कल आएगा।

