PG fire in Mamura Noida: नोएडा। बुधवार, 15 जुलाई 2026 को नोएडा के फेज-3 थाना क्षेत्र अंतर्गत मामूरा गांव (सेक्टर-66, गली नंबर 2) स्थित एक चार मंजिला (G+4) पीजी बिल्डिंग में ई-बाइक बैटरी चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट से भीषण आग लग गई। इस हादसे में दो युवाओं की दम घुटने और जलने से मौत हो गई, जबकि कई लोग झुलस गए। फायर ब्रिगेड की टीम ने सीढ़ियों के सहारे करीब 50 परिवारों (लगभग 150-200 लोगों) को सुरक्षित बाहर निकाला गया| घटना के बाद पूरी बिल्डिंग को सील कर दिया गया। मृतकों की पहचान स्नेहा श्रीवास्तव (22 वर्ष, बिहार) और ऋषभ कुमार (मध्य प्रदेश के सिवनी) के रूप में हुई है। दोनों नोएडा की निजी कंपनियों में नौकरी करते थे। प्रारंभिक जांच में आग की वजह ग्राउंड फ्लोर पर ई-बाइक चार्जिंग के दौरान स्पार्किंग और पास खड़ी पेट्रोल वाहनों में लगी आग बताई जा रही है।
पीड़ितों की आर्थिक मजबूरी: “न घर, न सामान, न पैसे”
आग के बाद पीजी निवासियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। अधिकांश युवा 18-25 हजार रुपये मासिक वेतन पर काम करते हैं। उन्होंने पहले ही 12,500 रुपये मासिक किराया, 12,500 रुपये एडवांस और 5,000 रुपये सिक्योरिटी जमा कर रखे थे। अब नया कमरा लेने, सामान खरीदने और रोजमर्रा खर्च के लिए उनके पास कुछ नहीं बचा। कई लोगों के जरूरी दस्तावेज, लैपटॉप, कपड़े और बाइक भी आग में जल गए। एक पीड़ित इंद्रल (आजमगढ़) ने बताया, “मैं दो महीने पहले ही यहां आया था। एक रात में न सामान बचा, न रहने की जगह।” अनिवार्य चौहान (बिजनौर) ने कहा, “छह महीने पहले आया था। अब दोस्त के कमरे पर रह रहा हूं, बार-बार हादसा याद आता है।” करिश्मा (अलीगढ़) ने बताया, “दोस्तों के यहां समझ नहीं आ रहा, कमरे के लिए पैसे भी नहीं।” कई महिलाओं ने रातभर नया कमरा ढूंढने की कोशिश की, लेकिन मकान मालिकों ने या तो मना कर दिया या पूरा एडवांस मांगा।दिनभर पुलिस का पहरा, देर रात तक सामान ढोते रहे निवासी घटना के अगले दिन बृहस्पतिवार को पुलिस का कड़ा पहरा रहा। निवासी बारी-बारी से अपना सामान निकालते रहे। सुबह से शुरू हुआ यह सिलसिला रात तक चला। घटनास्थल देखने के लिए भीड़ जुटती रही।
पीजी संचालक और मकान मालिक में विवाद
पीड़ितों का आरोप है कि जून में ही संचालक ने जुलाई में बिल्डिंग खाली करने को कहा था। पीजी संचालक और भवन केयरटेकर के बीच अक्सर विवाद होता था। अगर समय रहते बिल्डिंग खाली कराई जाती तो शायद यह हादसा न होता।
प्रशासनिक लापरवाही के सवाल
यह हादसा नोएडा में अग्नि सुरक्षा मानकों की लापरवाही को फिर उजागर करता है। कई पीजी और हॉस्टल बिना फायर एनओसी, पर्याप्त निकास द्वार और अग्निशमन उपकरणों के चल रहे हैं। पुलिस और फायर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। पीड़ितों ने जमा राशि की वापसी और मुआवजे की मांग की है।
स्थानीय प्रतिक्रिया: इस घटना ने नोएडा के कामगार युवाओं और प्रवासी छात्रों-छात्राओं की असुरक्षा को रेखांकित किया है। सामाजिक संगठनों ने पीड़ित परिवारों को मदद पहुंचाने की अपील की है। प्रशासन से अपेक्षा है कि जमा राशि वापसी, अस्थायी आवास और मुआवजे के लिए त्वरित कदम उठाए जाएं। यह अग्निकांड केवल दो जानों का नहीं, बल्कि कई युवाओं की उजड़ी जिंदगी का दर्दनाक उदाहरण बन गया है। नोएडा जैसे औद्योगिक शहर में पीजी और हॉस्टलों की सुरक्षा पर सख्त निगरानी की जरूरत है, वरना ऐसे हादसे दोहराते रहेंगे।

