New Delhi news दिल्ली पुलिस की पश्चिम जिला पुलिस ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हाईटेक तरीके से नकल कराने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पदार्फाश करते हुए उसके कथित मास्टरमाइंड समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से कस्टमाइज्ड मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, सिम कार्ड, नैनो ईयरबड, विदेशी व्हाट्सएप अकाउंट से जुड़ा टैबलेट, मोबाइल फोन तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, 26 जुलाई 2026 को केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से शिकायत मिली थी कि जनकपुरी स्थित केंद्रीय विद्यालय में आयोजित एलडीसी भर्ती परीक्षा के दौरान कुछ अभ्यर्थी अनुचित साधनों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जांच के दौरान एक महिला अभ्यर्थी के पास से कस्टमाइज्ड मोबाइल फोन तथा दूसरे अभ्यर्थी हेमंत के पास से ब्लूटूथ डिवाइस, सिम कार्ड और नैनो ईयरबड बरामद हुए। इस पर जनकपुरी थाने में मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
*पूछताछ में खुला पूरे नेटवर्क का राज*
जांच के दौरान हेमंत ने बताया कि उसके भाई रिंकू ने वीरेंद्र के माध्यम से 12 लाख रुपये में ब्लूटूथ डिवाइस और सिम कार्ड की व्यवस्था कराई थी ताकि परीक्षा के दौरान बाहर से उत्तर प्राप्त किए जा सकें। इस खुलासे के बाद रिंकू और वीरेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
वहीं महिला अभ्यर्थी ने बताया कि उसके मित्र सन्नी ने 10 लाख रुपये में कस्टमाइज्ड मोबाइल, ब्लूटूथ डिवाइस, सिम कार्ड और नैनो ईयरबड उपलब्ध कराए थे। जांच आगे बढ़ी तो सन्नी की गिरफ्तारी हुई, जिसने दीपक की भूमिका का खुलासा किया। पुलिस के अनुसार दीपक और सन्नी के बीच 8 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था।
*हरियाणा से दबोचा गया मास्टरमाइंड*
तकनीकी निगरानी, सोशल मीडिया विश्लेषण और गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने पहले दीपक को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने बताया कि वह इस पूरे गिरोह के कथित सरगना सोनू कुमार उर्फ सोनू मान के निर्देश पर काम करता था।
इसके बाद पुलिस टीम ने हरियाणा के चरखी दादरी बाईपास से सोनू मान को उस समय गिरफ्तार किया, जब वह कथित रूप से एक अन्य सरकारी भर्ती परीक्षा में भी नकल कराने की तैयारी कर रहा था। उसके कब्जे से विदेशी व्हाट्सएप अकाउंट से जुड़ा टैबलेट, कस्टमाइज्ड मोबाइल फोन, तीन ब्लूटूथ डिवाइस, चार नैनो ईयरबड तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज बरामद किए गए।
*गिरोह ऐसे करता था काम*
पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह के एजेंट पहले सरकारी नौकरी के अभ्यर्थियों से संपर्क करते थे और लाखों रुपये लेकर उन्हें विशेष इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराते थे। परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र बाहर भेजकर उत्तर तैयार किए जाते और ब्लूटूथ व नैनो ईयरबड के जरिए अभ्यर्थियों तक पहुंचाए जाते थे।
*मुख्य आरोपियों की भूमिका*
पुलिस के अनुसार सन्नी दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी इरविन कॉलेज में लैब अटेंडेंट है और अभ्यर्थियों को गिरोह से जोड़ने का काम करता था। दीपक एजेंट के रूप में उम्मीदवारों की व्यवस्था कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण उपलब्ध कराता था। जबकि सोनू कुमार उर्फ सोनू मान, जो चंडीगढ़ अग्निशमन विभाग में फायरमैन है, इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड है और हाईटेक उपकरणों के जरिए विभिन्न राज्यों में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में नकल कराने का संचालन करता था।
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों, वित्तीय लेन-देन और विभिन्न राज्यों में हुई इसी प्रकार की अन्य परीक्षा धोखाधड़ी की घटनाओं की जांच कर रही है।
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