नोएडा। नोएडा के चोटपुर कॉलोनी में करीब एक हफ्ते से बिजली की समस्या गहरा गई है। अवैध बताए जा रहे कनेक्शन काटने की कार्रवाई के बाद हजारों परिवार अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष आश्रय गुप्ता कार्यकर्ताओं के साथ कॉलोनी पहुंचे और लोगों की समस्याएं सुनीं।
आश्रय गुप्ता ने बताया कि कॉलोनी में करीब 13 हजार बिजली कनेक्शन अवैध बताए जा रहे हैं। अब तक करीब चार हजार कनेक्शन काटे जा चुके हैं, जिससे बड़ी संख्या में परिवार बिजली के बिना रह रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर ये कनेक्शन अवैध थे तो इतने सालों तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उन्होंने जोर दिया कि कार्रवाई का असर आम लोगों पर नहीं पड़ना चाहिए। बिजली न होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। महिलाएं और बुजुर्ग भी परेशान हैं। स्थानीय लोगों ने पहले विधायक कार्यालय का घेराव किया था और कैंडल मार्च भी निकाला था, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकला।
आश्रय गुप्ता ने चेतावनी दी कि जन्माष्टमी के बाद भी बिजली आपूर्ति ठीक नहीं हुई तो सपा स्थानीय लोगों के साथ जिलाधिकारी के कैंप कार्यालय का घेराव करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी चोटपुर के लोगों के साथ खड़ी है। प्रशासन को जल्द बिजली व्यवस्था ठीक करनी चाहिए और पात्र लोगों को नियमानुसार कनेक्शन देना चाहिए। चोटपुर कॉलोनी में लगभग तीन हजार बिजली कनेक्शन काटकर करीब 50 हजार लोगों को अंधेरे में छोड़ दिया गया है। यह गंभीर जनसमस्या है। सपा की स्पष्ट मांग है कि अगले 48 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति बहाल की जाए, जिन परिवारों के कनेक्शन काटे गए हैं उन्हें नियमानुसार नए कनेक्शन देने की प्रक्रिया तत्काल शुरू की जाए और इस कार्रवाई के कारणों पर प्रशासन स्पष्ट जवाब दे।
48 घंटे की समयसीमा पूरी होने तक यदि बिजली बहाल नहीं हुई तो समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता और कॉलोनी के लोग जिलाधिकारी के कैंप कार्यालय का शांतिपूर्ण लेकिन जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगे। इस बीच नोएडा सिटीजन फोरम ने भी सेक्टर-63, छिजारसी-चोटपुर समेत कई इलाकों में लगातार बिजली कटौती से जनजीवन प्रभावित होने की शिकायत की है। फोरम के कार्यकारी अध्यक्ष शालिनी सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है और शासन के दिशा-निर्देशों के तहत मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है। उन्होंने अधिकारियों से बिजली तुरंत बहाल करने की मांग की है। बच्चों की पढ़ाई, छोटे कारोबार, स्वास्थ्य और जरूरी गतिविधियों पर असर पड़ रहा है। बुजुर्गों और महिलाओं को भी भारी परेशानी हो रही है। प्रशासन पर लोगों की समस्याओं को नजरअंदाज करने के आरोप लग रहे हैं।

