नोएडा फिर छावनी में तब्दील, 28 से 30 मई तक धारा 163 लागू, बिना अनुमति जमावड़े और प्रदर्शन पर सख्त पाबंदी

श्रमिक आंदोलन की हिंसा के बाद से पुलिस प्रशासन लगातार सतर्क, सोशल मीडिया पर भी रहेगी विशेष नजर

गौतमबुद्धनगर में एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है। पुलिस कमिश्नरेट गौतमबुद्धनगर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस)-2023 की धारा 163 को 28 मई 2026 से 30 मई 2026 तक पूरे जनपद में लागू कर दिया है। यह वही धारा है जिसे पहले धारा 144 के नाम से जाना जाता था। इस आदेश के लागू होते ही जिले में बिना प्रशासनिक अनुमति के धरना-प्रदर्शन, रैली, जुलूस और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ जुटाने पर सख्त रोक लग गई है।

पृष्ठभूमि: अप्रैल की हिंसा से सबक

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब गौतमबुद्धनगर में धारा 163 लागू की गई हो। 13 अप्रैल 2026 को नोएडा में मज़दूरों का एक बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था, जो वेतन, ओवरटाइम और बोनस से जुड़ी मांगों को लेकर था। यह प्रदर्शन बाद में हिंसक हो गया, जिसके चलते गैरकानूनी जमावड़े, रुकावट डालने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस व कंपनी परिसर पर हमले के आरोप लगाए गए। उस घटना की गूंज अब तक प्रशासनिक गलियारों में सुनाई दे रही है।उस हिंसक घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में हाल के दिनों में हुए श्रमिक प्रदर्शन और उसके बाद प्रशासन के दखल के बीच राज्य सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोतरी की घोषणा भी की थी। इसके बावजूद औद्योगिक क्षेत्रों में अशांति की संभावना को देखते हुए प्रशासन किसी भी जोखिम को मोल लेने के मूड में नहीं है।

क्या हैं प्रतिबंध?

धारा 163 के तहत जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस अवधि के दौरान सार्वजनिक स्थानों पर पांच या उससे अधिक लोगों का जमा होना प्रतिबंधित रहेगा।बिना प्रशासनिक अनुमति के धरना, प्रदर्शन, नारेबाजी और जुलूस पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।बिना अनुमति के लाठी-डंडा लेकर चलने पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। भड़काऊ गतिविधियों पर भी सख्त नजर रखी जाएगी। सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रहेगी, ताकि कोई भ्रामक या उकसावे वाला संदेश वायरल न हो सके।

जमीन पर क्या हैं इंतजाम?

डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी से लेकर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को विभिन्न इलाकों में तैनात किया गया है। महिला पुलिसकर्मियों और पीएसी के जवानों को भी संवेदनशील क्षेत्रों में लगाया गया है। संपूर्ण नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र को 11 सुपर जोन और 49 सेक्टरों में विभाजित किया गया है, ताकि कानून-व्यवस्था पर सूक्ष्म निगरानी संभव हो सके। सुरक्षा को और पुख्ता बनाने के लिए 50 से अधिक स्थानों पर ड्रोन कैमरे तैनात किए गए हैं। इसके अलावा कंट्रोल रूम से सीसीटीवी फीड के जरिए पल-पल की निगरानी की जा रही है। 13 अप्रैल को हुए श्रमिक आंदोलन में हुई हिंसा ने प्रशासन को और सतर्क कर दिया है, इसीलिए इस बार अन्य जिलों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है।

नागरिकों से अपील

पुलिस प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और कानून का पालन करें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि नजर आए तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। अधिकारियों ने साफ शब्दों में कहा है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी कोई ढील नहीं दी जाएगी।

विपक्ष की नजर में यह कदम

जहाँ प्रशासन इसे एहतियाती कदम बता रहा है, वहीं विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं कि बार-बार धारा 163 लागू करना श्रमिकों की आवाज को दबाने का प्रयास है। समाजवादी पार्टी सहित अन्य विपक्षी संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश करार दिया है, हालांकि प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह कदम केवल जन-सुरक्षा के हित में उठाया गया है।

संक्षेप में

गौतमबुद्धनगर में यह तीसरी बार है जब अल्प समयावधि में धारा 163 लागू की गई है पहले अप्रैल के श्रमिक आंदोलन के बाद, फिर मजदूर दिवस के अवसर पर, और अब फिर 28 से 30 मई के बीच। यह दर्शाता है कि जिले में औद्योगिक तनाव अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है और प्रशासन किसी भी स्थिति से पहले से ही निपटने की तैयारी में जुटा है।

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