‘सभी चुनाव धांधलीपूर्ण, ज्ञानेश कुमार तुरंत इस्तीफा दें’

नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत में लोकसभा और विधानसभा चुनावों में धांधली हो रही है और यह “100 प्रतिशत निश्चित” है। राहुल गांधी का यह हमला इंडियन एक्सप्रेस की उस जांच रिपोर्ट के एक दिन बाद आया, जिसमें चुनाव आयोग के दो आयुक्तों ने मतदाता सूची और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े फैसलों पर बार-बार आपत्ति जताई थी।

राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के उन बयानों के वीडियो क्लिप्स दिखाकर की, जिनमें वे लंबे समय तक सत्ता में बने रहने की बात कहते हैं। उन्होंने कहा, “मैं राजनीतिक परिवार से आता हूं। कोई भी राजनीतिक नेता ऐसे बयान नहीं दे सकता। भारत में एंटी-इंकम्बेंसी नाम की ताकत होती है… यह किसी को नहीं छोड़ती। इंदिरा गांधी जी ने बांग्लादेश युद्ध जीता। एक-दो साल में भारी एंटी-इंकम्बेंसी… लेकिन नरेंद्र मोदी, अमित शाह और बीजेपी पर यह असर क्यों नहीं होता? हम जवाब ढूंढ रहे थे और मिल गया।”

उन्होंने आरोप लगाया, “वोट चोरी से कानून चोरी होती है। आज वोट चला गया, कानून बनाने की व्यवस्था चली गई। अगर वोट चुराया गया है तो संसद में वोट चोरी के जरिए चुने गए विधायकों द्वारा बनाए गए कोई भी कानून, कोई भी संस्थागत बदलाव भी अवैध है।” राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 लोकसभा चुनाव और विभिन्न विधानसभा चुनाव “रिग्ड” हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कोई केस नहीं हो सकता क्योंकि कानून बनाकर उन्हें सुरक्षा दी गई है, लेकिन “आज नहीं तो कल” उन्हें सजा मिलेगी।

इंडियन एक्सप्रेस रिपोर्ट और आंतरिक मतभेद

बुधवार को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार लिखित रूप से आपत्ति दर्ज कराई। ये आपत्तियां मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, फॉर्म-6 में बदलाव, सॉफ्टवेयर और मतदाता डेटाबेस की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर थीं। आयुक्तों का कहना था कि कुछ आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, पहले तीन चरणों की SIR प्रक्रिया में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूची से 13.8 करोड़ नाम हटाए गए।

इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष एकजुट हो गया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि ज्ञानेश कुमार के पास पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। ममता बनर्जी ने उनकी गिरफ्तारी और पश्चिम बंगाल में प्री-SIR सूची के साथ नए चुनाव की मांग की। राज ठाकरे, एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं ने इस्तीफे और सुप्रीम कोर्ट निगरानी वाली जांच की मांग की। टीएमसी ने राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर पहले से लंबित महाभियोग प्रस्ताव को आगे बढ़ाने की बात कही।

चुनाव आयोग का जवाब

चुनाव आयोग ने रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां किसी भी संस्था में विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं। ये “निर्णय लेने की प्रक्रिया” का हिस्सा हैं। आयोग ने दावा किया कि पिछले एक साल में SIR समेत सभी फैसले पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए। लिखित नोट्स, अवलोकन और तकनीकी सुझाव “आंतरिक चेक-एंड-बैलेंस” का हिस्सा हैं और इन्हें सुधार के लिए दिया गया। आयोग ने कहा कि चुनिंदा नोट्स पर फोकस करने से पूरी तस्वीर नहीं बनती।

ज्ञानेश कुमार फरवरी 2025 में भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त बने थे। वे 1988 बैच के केरल कैडर आईएएस अधिकारी हैं। उनकी नियुक्ति 2023 के कानून के तहत हुई थी, जिसमें चयन समिति में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष शामिल हैं। राहुल गांधी ने तब भी असहमति जताई थी। विपक्ष ने अप्रैल में उनके खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था, जो राज्यसभा अध्यक्ष के पास लंबित है।

राजनीतिक घमासान जारी

विपक्ष ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ हो रही है। कुछ नेताओं ने कहा कि दो आयुक्तों की आपत्तियां “मैच-फिक्सिंग” का संकेत हैं। वहीं, सत्ताधारी दल ने आरोपों को राजनीतिक बताया है। इस विवाद ने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता और स्वतंत्रता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राहुल गांधी ने चेतावनी दी कि लोकतंत्र को नष्ट होने नहीं देंगे। विपक्ष संसद के विशेष सत्र में महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कर रहा है। इस बीच, SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े फैसलों पर बहस जारी है।
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