चुनाव आयोग में आंतरिक मतभेद उजागर, फिर भी सार्वजनिक मंच पर दिखी एकजुटता

नई दिल्ली। भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर बीते करीब 10 महीनों के दौरान गंभीर मतभेदों की जानकारी सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस की एक पड़ताल के अनुसार, दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के कई फैसलों पर औपचारिक रूप से 14 बार आपत्तियां दर्ज कीं, जबकि इसी अवधि में तीनों सदस्यीय आयोग ने पांच संयुक्त प्रेस ब्रीफिंग कीं और लोकतंत्र व चुनाव प्रबंधन पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन (IICDEM) की मेज़बानी भी की।

रिपोर्ट के मुताबिक, 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच यह आपत्तियां दर्ज की गईं, जिनमें विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया से जुड़े फैसले भी शामिल हैं। हालांकि, किसी भी संयुक्त ब्रीफिंग के दौरान दोनों चुनाव आयुक्तों ने सार्वजनिक रूप से अपनी असहमति या शिकायत जाहिर नहीं की।

किन मुद्दों पर थी आपत्ति

पड़ताल में सामने आया कि संधू और जोशी ने जिन विषयों पर आपत्ति दर्ज कराई, उनमें शामिल हैं—

  • नए मतदाताओं के पंजीकरण से जुड़े फैसले
  • मतदाता सूची से नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया
  • मतदाता संबंधी आदेशों के खिलाफ अपीलों की सुनवाई
  • मतदाता डेटा से जुड़े ECI सॉफ्टवेयर तक पहुंच का मामला

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकांश मामलों में ये आपत्तियां मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को भी भेजी गई थीं। ज्ञानेश कुमार को हाल के महीनों में विपक्ष की आलोचना और इस्तीफे की मांगों का सामना करना पड़ा है।

10 महीनों में 6 बार साथ आए तीनों आयुक्त

आंतरिक मतभेदों के बावजूद, तीनों आयुक्त—ज्ञानेश कुमार, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—चार प्रमुख चुनाव-संबंधी ब्रीफिंग में एक साथ नजर आए। ये ब्रीफिंग 27 अक्टूबर, 18 फरवरी, 10 मार्च और 15 मार्च को हुईं। इसके अलावा वे IICDEM सम्मेलन सहित कुल छह सार्वजनिक अवसरों पर एकजुट दिखे। यह पहला मौका नहीं है जब चुनाव आयोग के भीतर मतभेदों की खबरें सामने आई हैं, लेकिन इतने बड़े पैमाने पर दर्ज आपत्तियों और फिर भी सार्वजनिक तौर पर एकजुटता बनाए रखने का यह मामला आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

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