राहुल गांधी इंडिया गेट पहुंचे, अंकिता भंडारी के माता-पिता के धरने में शामिल

नई दिल्ली। उत्तराखंड की 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 2022 में हुई हत्या का मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को अंकिता के माता-पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए। उनकी मांग है कि हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ के तौर पर नाम आने वाले भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल पद पर हालिया नियुक्ति रद्द की जाए और सीबीआई जांच पूरी होने तक इस पर रोक लगाई जाए।

इस धरने में एक्टिविस्ट योगिता भयाना भी उनके साथ मौजूद रहीं। परिवार ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की है कि जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए गौतम की नियुक्ति पर तुरंत रोक लगाई जाए। अंकिता की मां सोनी देवी ने कहा, “जब हमने सुना कि उन्हें राज्यपाल बना दिया गया है तो बहुत दर्द हुआ। राष्ट्रपति स्वयं महिला हैं, वे हमारी भावनाओं को समझेंगी। सीबीआई जांच पूरी होने तक उनकी नियुक्ति रोकी जाए।” पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने कहा, “दुष्यंत कुमार को जेल में होना चाहिए। जांच पूरी होने तक उन्हें राज्यपाल न बनाया जाए।”

इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अचानक इंडिया गेट पहुंचे और अंकिता के परिवार से मुलाकात की। कुछ रिपोर्ट्स में प्रियंका गांधी के भी वहां पहुंचने की जानकारी दी गई। यह मुलाकात उस समय हुई जब परिवार न्याय की मांग को लेकर राजधानी में धरना दे रहा था। इससे पहले अगस्त 2026 में भी राहुल गांधी ने दिल्ली में अंकिता के माता-पिता से मुलाकात की थी और भाजपा पर ‘बलात्कारियों और अपराधियों को संरक्षण देने’ का आरोप लगाया था।

पृष्ठभूमि: चार साल पुराना मामला, अब भी न्याय का इंतजार

18 सितंबर 2022 को पौड़ी गढ़वाल के वनंत्रा (Vanantara) रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली अंकिता भंडारी लापता हो गईं। कुछ दिनों बाद उनकी लाश ऋषिकेश के पास चीला नहर से मिली। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हिंसा और डूबने के सबूत मिले थे। जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे) और दो कर्मचारियों ने अंकिता की हत्या इसलिए की क्योंकि उन्होंने एक ‘वीआईपी’ मेहमान की शर्मनाक मांगों का विरोध किया था। पुलकित आर्य सहित तीनों को अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई।

हालांकि परिवार और कार्यकर्ता लगातार कहते रहे हैं कि असली ‘वीआईपी’ अभी भी बच निकला है। दिसंबर 2025 में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर और उर्मिला सनावर के कथित ऑडियो-वीडियो वायरल होने के बाद विवाद फिर गरमाया। इनमें कथित वीआईपी के तौर पर दुष्यंत गौतम और अजय कुमार के नाम लिए गए। दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को साजिश बताया, मानहानि का मुकदमा दायर किया और दिल्ली हाईकोर्ट से अंतरिम राहत भी मिली, जिसमें संबंधित पोस्ट्स हटाने के आदेश दिए गए।

जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार ने परिवार की मांग पर सीबीआई जांच की सिफारिश की। सीबीआई ने मामला लिया, लेकिन परिवार का आरोप है कि आठ महीने बीत जाने के बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है। हाल ही में सीबीआई अधिकारियों ने परिवार से पूछताछ की, लेकिन परिवार का कहना है कि पुराने गवाहों के बयान दोहराने के बजाय वीआईपी की पहचान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति और राजनीतिक घमासान

12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम (भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री और उत्तराखंड प्रभारी) को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उत्तराखंड कांग्रेस ने इसका तीखा विरोध किया। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने देहरादून के गांधी पार्क में एक घंटे का मौन उपवास रखा। कांग्रेस का आरोप है कि राज्यपाल पद की संवैधानिक सुरक्षा (अनुच्छेद 361) का इस्तेमाल कर आरोपी को बचाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि जांच पूरी होने तक ऐसी नियुक्ति जांच की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। राहुल गांधी के इंडिया गेट पहुंचने से यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर फिर चर्चा में आ गया है।

अंकिता भंडारी का परिवार पिछले चार साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहा है। वे कहते हैं कि स्थानीय स्तर पर उनकी सुनवाई नहीं हुई, लेकिन जनता के सहयोग से मामला यहां तक पहुंचा। अब वे देश की जनता और राष्ट्रपति से अपील कर रहे हैं कि उनकी बेटी को पूरा न्याय मिले और कथित वीआईपी की पहचान सामने आए। समाचार एजेंसियों और विभिन्न रिपोर्ट्स पर आधारित। यह ब्रेकिंग डेवलपमेंट है, और अपडेट्स जारी हैं।

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