मोदी का कन्वॉय 50% घटा, मंत्री-मुख्यमंत्री मेट्रो-कारपूलिंग पर, ईरान युद्ध के बीच सख्त मितव्ययिता अभियान

ईरान युद्ध और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के कारण बढ़ते तेल आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को कोविड काल जैसी मितव्ययिता अपनाने की अपील की है। अब इस अपील को अमली जामा पहनाते हुए प्रधानमंत्री ने खुद अपने आधिकारिक काफिले को 50 प्रतिशत घटाने का आदेश दिया है। कई केंद्रीय मंत्री और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी कन्वॉय छोटे करने, विदेशी यात्राएं रद्द करने और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने जैसे कदम उठा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने हैदराबाद रैली में की गई अपील को दोहराते हुए कैबिनेट को न्यूनतम खर्च, आयातित वस्तुओं (खासकर सोना) का कम उपयोग, वर्क-फ्रॉम-होम, अनावश्यक यात्राओं में कटौती और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने का निर्देश दिया। केंद्र सरकार ने सोने-चांदी पर आयात शुल्क 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया है, जिससे इनकी कीमतें बढ़ गई हैं। रुपये पर भी दबाव है।

प्रधानमंत्री का कन्वॉय: 14 से घटकर 4-7 वाहन

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) को निर्देश दिया है कि उनके काफिले में वाहनों की संख्या आधी कर दी जाए। सुरक्षा प्रोटोकॉल पर कोई समझौता नहीं होगा, लेकिन नई खरीदारी के बिना इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का उपयोग बढ़ाया जाएगा। यह बदलाव गुजरात और असम के हालिया दौरों में लागू किया जा चुका है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा समेत कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी अपने काफिलों को छोटा कर लिया है।

राज्यों में अमल

उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री, मंत्रियों और अधिकारियों के काफिलों में 50 प्रतिशत कटौती का आदेश दिया। अनावश्यक वाहन रैलियां बंद।

मध्य प्रदेश: मुख्यमंत्री मोहन यादव का काफिला 13 से घटकर 8 वाहनों का हो गया। राजनीतिक वाहन रैलियों पर रोक।

दिल्ली: मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों को न्यूनतम वाहनों का उपयोग, कारपूलिंग और पब्लिक ट्रांसपोर्ट (मेट्रो) को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।

राजस्थान: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का काफिला न्यूनतम वाहनों तक सीमित। अन्य भाजपा शासित राज्यों जैसे छत्तीसगढ़, बिहार आदि में भी समान कदम उठाए जा रहे हैं। कई मंत्रियों ने विदेशी यात्राएं (जैसे कान्स) रद्द कर दी हैं।

आर्थिक पृष्ठभूमि

ईरान संकट के कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। भारत 85-90 प्रतिशत तेल आयात करता है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिससे मुद्रास्फीति और रुपये पर दबाव बढ़ा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अनावश्यक सोना खरीद, विदेश यात्राएं और आयातित सामान पर खर्च कम करके विदेशी मुद्रा बचाई जा सकती है।

प्रतीकात्मक संदेश

विश्लेषकों का मानना है कि शीर्ष से शुरू होकर यह अभियान पूरे प्रशासन और जनता तक पहुंचाने का प्रयास है। विपक्ष ने शुरू में VIP संस्कृति पर सवाल उठाए थे, लेकिन अब भाजपा शासित राज्य सक्रिय रूप से अमल कर रहे हैं। सरकार का जोर है कि सुरक्षा से समझौता किए बिना ईंधन बचत, EV को बढ़ावा और वर्चुअल मीटिंग्स से खर्च कम किया जाए।  यह अभियान ईरान युद्ध के लंबे खिंचाव की स्थिति में भारत की आर्थिक लचीलापन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आम नागरिकों से भी अपील है कि मेट्रो, कारपूलिंग, लोकल उत्पादों का उपयोग बढ़ाएं और अनावश्यक आयात कम करें। आगे की स्थिति पर निर्भर करेगा कि यह स्वैच्छिक मितव्ययिता कितनी प्रभावी साबित होती है।

यह भी पढ़ें: दीवारें बनाईं, दीवारें तोड़ीं, सीलिंग का डर टूट गया व्यापार, खौफ में दिल्ली के व्यापारियों की रात

यहां से शेयर करें