दीवारें बनाईं, दीवारें तोड़ीं, सीलिंग का डर टूट गया व्यापार, खौफ में दिल्ली के व्यापारियों की रात

न्यू अशोक नगर में DDA-MCD की संयुक्त कार्रवाई से पहले शटर हटाकर चुनी दीवारें, BJP विधायक के आश्वासन के बाद खुद तोड़ीं; सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर चल रहे सर्वे ने पूरी दिल्ली में मचाई खलबली,  पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में मंगलवार की सुबह एक अजीब नज़ारा था जो दीवारें सोमवार की रात भर चुनकर खड़ी की गई थीं, वही दीवारें बुधवार को व्यापारी खुद हथौड़े से तोड़ रहे थे। यह विचित्र दृश्य दिल्ली के उस पुराने और अनसुलझे संकट का ताज़ा अध्याय है रोज़गार, नियम, भ्रष्टाचार और न्यायालय के आदेशों के बीच पिसते आम व्यापारी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली नगर निगम (MCD) द्वारा रिहायशी इलाकों में संपत्तियों के व्यावसायिक दुरुपयोग की जांच के लिए शुरू किए गए सर्वे ने पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर में हड़कंप मचा दिया। सर्वे में नाम दर्ज होने और सीलिंग की कार्रवाई के भय से यहाँ के दुकानदारों और रेस्तरां मालिकों ने खुद ही अपनी दुकानें बंद करनी शुरू कर दीं। कुछ ने तो दुकान के दरवाजे और शटर तक उखाड़कर वहाँ दीवारें खड़ी कर दीं।

कैसे पहुँचे इस मुकाम तक?

कोर्ट द्वारा नियुक्त मॉनिटरिंग कमेटी ने DDA और MCD को निर्देश दिए थे कि न्यू अशोक नगर की मेट्रो रोड पर रिहायशी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों को तत्काल बंद कराया जाए। आदेश में ऐसे प्रतिष्ठानों को सील करने की बात कही गई, जिसके बाद इलाके में हड़कंप मच गया। दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) और दिल्ली नगर निगम (MCD) की संयुक्त टीम ने 12 मई 2026 को इलाके में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर कार्रवाई करने की योजना बनाई थी। न्यू अशोक नगर मेट्रो रोड और चिल्ला सरोदा बांगर गांव में कई ऐसी संपत्तियों की पहचान की गई थी जहाँ नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिली थीं। पूर्वी दिल्ली पुलिस ने भी आशंका जताई थी कि कार्रवाई के दौरान विरोध की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, इसीलिए भारी पुलिस बल की तैनाती की तैयारी की गई थी।

रात भर चुनी दीवारें, सुबह खुद तोड़ीं

सीलिंग ड्राइव की सूचना के साथ ही कई दुकानदार अपनी दुकानों को बचाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाने लगे। इलाके की कई दुकानों के सामने तेजी से ईंट की दीवारें बनाई जाने लगीं, जिससे वे व्यावसायिक इकाई के बजाय सामान्य निर्माण जैसी दिखें।सीलिंग के हड़कंप के बीच दुकानदारों ने अपनी आजीविका बचाने के लिए यह अनोखा रास्ता निकाला था। लेकिन जब पूर्वी दिल्ली के न्यू अशोक नगर इलाके में सीलिंग की कार्रवाई का डर फिलहाल टल गया, तो व्यापारियों ने अपनी दुकानों को बचाने के लिए बनाई गई ईंट की दीवारों को खुद ही तोड़ना शुरू कर दिया। राहत की बात यह रही कि स्थानीय बीजेपी पार्षद संजीव सिंह ने व्यापारियों का भय दूर करने के लिए खुद हथौड़ा चलाकर दीवार तोड़ने की शुरुआत की।

विधायक का आश्वासन, पर भरोसा अधूरा

मौके पर पहुँचे बीजेपी विधायक रविकांत उज्जैनवाल ने लोगों से बात की और उन्हें आश्वासन दिया कि फिलहाल सीलिंग नहीं होगी। उन्होंने कहा, “हम लोग यहाँ खड़े हैं और सीलिंग नहीं होने देंगे। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा से लगातार बातचीत हो रही है। इन पुरानी दुकानों को नोटिफाई करवाने के लिए जो भी कानूनी चार्ज देना होगा, वह प्रक्रिया पूरी की जाएगी ताकि लोग अपना रोजगार चला सकें।” हालाँकि यह राहत अस्थायी है। व्यापारी जानते हैं कि न्यायालय का आदेश लटका हुआ है और कभी भी कार्रवाई हो सकती है।

DDA ने रोकी कार्रवाई पर कब तक?

डीडीए ने फिलहाल करीब 100 से ज्यादा दुकानों पर प्रस्तावित सीलिंग कार्रवाई को टाल दिया। एमसीडी मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि निगम लगातार डीडीए के संपर्क में था और आखिरकार व्यापारियों और निगम की कोशिशें सफल हुई हैं। मेयर प्रवेश वाही ने कहा कि जहाँ सीलिंग की प्रक्रिया होने की बात थी, जल्द ही उस कॉलोनी को रेगुलराइज किया जाएगा और वहाँ की सड़कों को मिक्स लैंड यूज की श्रेणी में शामिल किया जाएगा। यह वही मांग है जो व्यापारी वर्षों से कर रहे हैं।

सिर्फ न्यू अशोक नगर नहीं पूरी दिल्ली में खलबली

यह मामला केवल एक इलाके तक सीमित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद MCD ने शहर के विभिन्न बाजारों और रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। MCD को 20 मई तक अपनी सर्वे रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश करनी है। इस आदेश के बाद दिल्ली के लाखों व्यापारियों में चिंता और असमंजस का माहौल है। व्यापारियों का कहना है कि दशकों से चल रहे कारोबार को अचानक अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा, जबकि रेजिडेंट्स का मानना है कि अनियंत्रित व्यावसायिक गतिविधियों ने कॉलोनियों की मूल पहचान और जीवन गुणवत्ता को प्रभावित किया है।

व्यापारियों का दर्द “टैक्स भी देते हैं, फिर भी अवैध?”

स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरा इलाका वर्षों से इसी तरह विकसित हुआ है और बड़ी संख्या में परिवार छोटी-छोटी दुकानों के जरिए अपना गुजारा चला रहे हैं। दुकानदारों का आरोप है कि वे व्यावसायिक बिजली कनेक्शन का उपयोग कर रहे हैं, नियमित रूप से टैक्स भी दे रहे हैं, इसके बावजूद उन पर सीलिंग की तलवार लटक रही है। एक महिला दुकानदार का कहना था  “गरीब के पेट पर लात मार रहे हैं काम बंद हो गया है, अब चोरी करके खाएंगे क्या?”

असली सवाल: ज़िम्मेदार कौन?

न्यू अशोक नगर और अशोक विहार, दोनों मामले एक ही पुरानी कहानी के दो हिस्से हैं। सवाल यह है कि जब ये दुकानें सालों से बन रही थीं, कमर्शियल बिजली कनेक्शन लिए जा रहे थे, टैक्स जमा हो रहा था  तब MCD, DDA और नगर प्रशासन के अधिकारी कहाँ थे? जब तक सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं आया, तब तक यह ‘अवैध’ व्यापार ‘नजरअंदाज’ होता रहा। स्थानीय पार्षद और MCD की लाइसेंसिंग कमेटी के चेयरमैन संजीव सिंह ने अपील की है कि व्यापारी शांति बनाए रखें। उन्होंने कहा कि सर्वे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए किया जा रहा है और निगम इस बात पर विचार कर रहा है कि व्यापारियों का कारोबार किसी न किसी रूप में जारी रह सके।

आगे की राह

व्यापारियों की एकमात्र और जायज़ माँग यह है कि सरकार इन सड़कों को ‘मिक्स लैंड यूज’ या ‘कमर्शियल ज़ोन’ में अधिसूचित करे, ताकि वे कानूनी रूप से कन्वर्जन चार्ज और टैक्स देकर अपना व्यापार चला सकें। आने वाले दिनों में दिल्ली सरकार, MCD और सुप्रीम कोर्ट के रुख पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी। 20 मई को सुप्रीम कोर्ट में MCD की रिपोर्ट पेश होनी है। उस रिपोर्ट में क्या होगा, इस पर लाखों छोटे व्यापारियों की रोज़ी-रोटी टिकी है।

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