वैश्विक मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि प्रशांत महासागर में एक मजबूत एल नीनो घटना (El Niño) बन रही है, जो 2026 के अंत और 2027 की शुरुआत तक प्रभावी रह सकती है। विश्व मौसम संगठन (WMO) और अमेरिकी NOAA के अनुसार, मई-जुलाई 2026 में एल नीनो बनने की संभावना 80-82% से अधिक है, जो सर्दियों तक 96% से ज्यादा मजबूत रहेगी। कई मॉडल्स इसे “सुपर एल नीनो” या ऐतिहासिक रूप से मजबूत घटना बता रहे हैं। एल नीनो तब होता है जब प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्री सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इससे वैश्विक मौसम पैटर्न बदल जाते हैं – कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ आती है, तो कुछ में सूखा और गर्मी बढ़ जाती है।
जलवायु परिवर्तन का खतरनाक मिश्रण
रॉयटर्स और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बार एल नीनो का प्रभाव पहले से ज्यादा खतरनाक होगा क्योंकि पृथ्वी पहले ही मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से 1.5 डिग्री सेल्सियस गर्म हो चुकी है। NOAA और येल क्लाइमेट कनेक्शन्स के विशेषज्ञों का कहना है कि 2026-27 में रिकॉर्ड गर्मी देखने को मिल सकती है। एल नीनो पहले से गर्म महासागरों और वातावरण को और गर्म करेगा, जिससे हीटवेव, जंगल की आग, सूखा और बाढ़ की घटनाएं बढ़ेंगी। विश्व मौसम संगठन के मुताबिक, यह घटना वैश्विक तापमान को और बढ़ाएगी और चरम मौसम की घटनाओं को तेज करेगी।
भारत पर क्या असर?
भारत के लिए यह खबर चिंताजनक है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने पहले ही 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून को 90% (लॉन्ग पीरियड एवरेज से कम) रहने का अनुमान लगाया है। एल नीनो आमतौर पर भारत में मानसून की हवाओं को कमजोर करता है, खासकर जुलाई-सितंबर में जब यह मजबूत होगा।
कृषि और खाद्य सुरक्षा: देश के 60% से ज्यादा किसान मानसून पर निर्भर हैं। कम बारिश से खरीफ फसलों (जैसे धान, मक्का, दालें) पर असर पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ सकती है।
हीटवेव: गर्मी की लहरें और सूखा बढ़ेगा।
पानी की कमी: जलाशयों और भूजल स्तर पर दबाव बढ़ेगा।
IMD प्रमुख डॉ. मृत्युंजय मोहापात्रा ने हाल ही में कहा कि जून में एल नीनो कमजोर रहेगा, लेकिन जुलाई से सितंबर तक मध्यम से मजबूत हो जाएगा।
वैश्विक प्रभाव
दक्षिणी एशिया और ऑस्ट्रेलिया: सूखा और कम बारिश।
दक्षिण अमेरिका: भारी बारिश और बाढ़।
अफ्रीका: सूखा और भुखमरी का खतरा।
अमेरिका: कुछ क्षेत्रों में बाढ़, जबकि पश्चिमी हिस्सों में आग का खतरा। विशेषज्ञों का कहना है कि 2015-16 का सुपर एल नीनो भी विनाशकारी था, लेकिन अब जलवायु परिवर्तन के कारण प्रभाव और गंभीर होंगे।
तैयारी की जरूरत
UN महासचिव और मौसम वैज्ञानिक तैयारी पर जोर दे रहे हैं। भारत सरकार को जल संरक्षण, फसल बीमा, सूखा-प्रतिरोधी बीजों और बेहतर मौसम पूर्वानुमान पर फोकस करना चाहिए। जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए वैश्विक प्रयासों को तेज करना भी जरूरी है। यह एल नीनो हमें याद दिलाता है कि प्राकृतिक घटनाएं और मानवीय गतिविधियां साथ मिलकर कितना बड़ा संकट पैदा कर सकती हैं। समय रहते तैयारी ही इस चुनौती से निपटने का सबसे अच्छा रास्ता है।

