भतीजे को पड़ी अंडा-लाठी बुआ ने बिछा दी खाटी, हस्ताक्षर जालसाजी विवाद ने तृणमूल को तोड़ने की कगार पर पहुंचाया

पश्चिम बंगाल में हालिया विधानसभा चुनाव में भारी हार के बाद ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। कई नेताओं के पार्टी छोड़ने या छोड़ने की तैयारी के बीच हस्ताक्षर जालसाजी (Signature Forgery) का विवाद पार्टी को टूटने की कगार पर ले आया है। विपक्ष में सिमट चुकी TMC के सुप्रीमो ममता बनर्जी संघर्ष कर रही हैं, लेकिन कम, निष्कासन और आंतरिक बगावत उनके नियंत्रण को चुनौती दे रही है।

हस्ताक्षर जालसाजी विवाद: आग पर घी

विवाद का केंद्र विधानसभा में Leader of Opposition (LoP) पद के लिए सोभनदेब चट्टोपाध्याय के नामांकन से जुड़ा पत्र है। TMC के दो विधायकों ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने आरोप लगाया कि उनके हस्ताक्षर जाली बनाए गए। उन्होंने दावा किया कि 6 मई की पार्टी बैठक में कोई ऐसा प्रस्ताव पास नहीं हुआ था, लेकिन जाली दस्तावेज विधानसभा सचिवालय को सौंपा गया। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन दोनों विधायकों के शिकायत दर्ज कराने की पुष्टि की। इसके बाद CID जांच शुरू हुई, जिसमें अब तक कई विधायकों के बयान दर्ज किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कम से कम 12-13 हस्ताक्षर ब्लॉक लेटर्स में लिखे गए थे और तीन विधायकों (Baharul इस्लाम, अरूप रॉय, सुभाषिश दास) ने इनकार कर दिया कि वे उनके हैं। Abhishek Banerjee को भी CID ने समन भेजा, लेकिन वे बीमारी का हवाला देकर पेश नहीं हुए। TMC ने तुरंत दोनों विधायकों को anti-party activities के आरोप में निष्कासित कर दिया। लेकिन यह कदम उल्टा पड़ गया। निष्कासित विधायकों ने गुप्त बैठकें कीं और अन्य विधायकों से संपर्क साधा। अब बगावत की आंच और तेज हो गई है।

बगावत के संकेत

 ममता बनर्जी के कलकत्ता स्थित कालीघाट आवास पर बुलाई गई नई चुने गए TMC विधायकों की बैठक में 80 में से करीब 60 विधायक अनुपस्थित रहे। केवल 20 विधायकों की मौजूदगी में बैठक स्थगित करनी पड़ी। 2 जून को ममता द्वारा आयोजित धरना (dharna) में केवल 6 विधायक और 3 सांसद ही पहुंचे। ममता ने BJP पर TMC नेताओं पर हमले और धमकियों का आरोप लगाया तथा कहा, “मैं लड़ूंगी या मर जाऊंगी।” 100 से ज्यादा नगरपालिका पार्षदों ने इस्तीफे दे दिए, जिससे स्थानीय स्तर पर TMC की पकड़ कमजोर हुई है।

ममता का मुकाबला

ममता बनर्जी ने चुनाव में BJP द्वारा “177 सीटों पर रिगिंग” का आरोप लगाया और इस्तीफा देने से इनकार कर दिया। उन्होंने CID जांच को राजनीतिक साजिश बताया और पार्टी को मजबूत करने का संकल्प लिया। लेकिन आंतरिक कलह, Abhishek Banerjee पर बढ़ता असंतोष और सुवेंदु अधिकारी जैसे पूर्व सहयोगी के हमलों ने स्थिति जटिल कर दी है। कुछ रिपोर्ट्स में 22 विधायकों के विद्रोह की बात भी कही जा रही है, जो नए LoP और पार्टी प्रतीक पर सवाल उठा रहे हैं।

क्या TMC टूट जाएगी?

TMC 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बनी थी। 15 साल सत्ता में रहने के बाद पहली बार विपक्ष में बैठना पड़ रहा है। कई विश्लेषक Shiv Sena जैसी विभाजन की आशंका जता रहे हैं। यदि बगावत बढ़ी तो TMC में vertical split संभव है। ममता की करिश्माई नेतृत्व और सड़क पर संघर्ष की क्षमता उनकी ताकत है, लेकिन परिवारवाद, भ्रष्टाचार के आरोप और आंतरिक लोकतंत्र की कमी पार्टी की कमजोरियां बन गई हैं। भविष्य अनिश्चित है। क्या ममता बनर्जी बागडोर संभाल पाएंगी या TMC उनके हाथ से फिसल जाएगी? अगले कुछ हफ्ते इस सवाल का जवाब देंगे। पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो चुका है।

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