गौतमबुद्धनगर AHT यूनिट, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और पश्चिम बंगाल पुलिस की संयुक्त कार्रवाई, पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन में चला ऑपरेशन
एक तरफ देश की राजधानी से सटे ग्रेटर नोएडा की चकाचौंध, दूसरी तरफ झुग्गी-झोपड़ियों के अंधेरे में दफन एक मासूम की दर्द भरी दास्तान। पश्चिम बंगाल से अपहृत 15 वर्षीय नाबालिग लड़की को गौतमबुद्धनगर पुलिस की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (AHT) यूनिट ने सकुशल बरामद कर एक बड़े मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश किया है। इटैडा गांव, थाना बिसरख क्षेत्र की एक झुग्गी से रेस्क्यू की गई यह नाबालिग एक आवासीय सोसाइटी में सफाईकर्मी की तरह काम कराई जा रही थी। आरोपी को मौके से धर-दबोचा गया और उसे पश्चिम बंगाल पुलिस के हवाले कर दिया गया।पूरी कार्रवाई पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देशन और डीसीपी महिला सुरक्षा के पर्यवेक्षण में की गई।
कैसे मिली सूचना, कैसे चला ऑपरेशन
दिनांक 1 जून 2026 को थाना AHT को मिशन मुक्ति फाउंडेशन, दिल्ली के माध्यम से गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि पश्चिम बंगाल से एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की का अपहरण करके उसे नोएडा क्षेत्र में रखा गया है और बंधुआ मजदूरी कराई जा रही है। पश्चिम बंगाल में इस संबंध में पहले से मुकदमा दर्ज था। सूचना मिलते ही AHT थाना, मिशन मुक्ति फाउंडेशन और पश्चिम बंगाल पुलिस की एक त्रिपक्षीय संयुक्त टीम ने बिना एक पल गंवाए मोर्चा संभाल लिया। टीम ने इटैडा गांव की झुग्गियों में दबिश दी। गुमशुदा लड़की की फोटो दिखाकर स्थानीय निवासियों से जानकारी जुटाई गई। आसपास के लोगों ने बताया कि एक युवती एक संदिग्ध व्यक्ति के साथ झुग्गी में रहती है और पास की एक सोसाइटी में सफाई का काम करती है। इस सुराग पर पुलिस दल तत्काल उस सोसाइटी में पहुंचा, जहां वह नाबालिग और आरोपी दोनों सफाई करते हुए मिले। AHT टीम ने महिला आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए संवेदनशीलता के साथ लड़की को सुरक्षित रेस्क्यू किया और आरोपी को विधिसम्मत रूप से गिरफ्तार कर लिया।
चिकित्सा जाँच, CWC और घर वापसी
रेस्क्यू के तुरंत बाद नाबालिग का चिकित्सीय परीक्षण कराया गया। इसके बाद उसे बाल कल्याण समिति (CWC), गौतमबुद्धनगर के समक्ष प्रस्तुत किया गया। CWC के आदेश पर लड़की को पश्चिम बंगाल पुलिस की सुरक्षा में सौंपा गया ताकि उसे सुरक्षित उसके गृह राज्य पहुंचाया जा सके। वहीं, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ पश्चिम बंगाल पुलिस ट्रांजिट रिमांड प्राप्त कर उसे संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश करेगी।
जीरो टॉलरेंस नीति — सिर्फ नारा नहीं, अमल में भी
डीसीपी महिला सुरक्षा ने स्पष्ट किया कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के नेतृत्व में गौतमबुद्धनगर पुलिस महिलाओं और बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर अमल कर रही है। उन्होंने कहा, “AHT थाना ऐसे मामलों में त्वरित प्रतिक्रिया देने के लिए सदैव तत्पर है। मिशन मुक्ति फाउंडेशन जैसे NGOs के साथ सक्रिय समन्वय हमारे रेस्क्यू ऑपरेशन को और अधिक प्रभावी बना रहा है।”
राष्ट्रीय परिदृश्य : बंगाल सबसे संवेदनशील राज्य
यह मामला अकेला नहीं है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, 2022 में पश्चिम बंगाल से सर्वाधिक 12,455 बच्चे लापता हुए जिनमें 84.9% लड़कियां थीं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 6,994 बच्चे अभी भी अता-पता नहीं हैं, जो पूरे देश में सबसे अधिक संख्या है। NCRB के आंकड़े यह भी बताते हैं कि मानव तस्करी के शिकार लगभग 55 से 60 प्रतिशत पीड़ित नाबालिग होते हैं, और यौन शोषण तथा जबरन मजदूरी इनके मुख्य उद्देश्य होते हैं। 2025 के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार देशभर में लगभग 2,227 मानव तस्करी के मामले दर्ज होने की संभावना है, जो 2023 के 2,183 मामलों से 2 प्रतिशत अधिक है। उत्तर प्रदेश में 158 मामले होने का अनुमान है। अप्रैल 2024 से मार्च 2025 के बीच देशभर में 53,000 से अधिक बच्चों को बाल श्रम, तस्करी और अपहरण से मुक्त कराया गया। फिर भी तस्करों का नेटवर्क अटूट बना हुआ है।
पड़ोसी जिलों में भी हिली धरती
गौतमबुद्धनगर के बिसरख क्षेत्र में मार्च 2026 में एक निजी अस्पताल के कर्मचारी पर नवजात बच्ची को ढाई लाख रुपये में गोद दिलाने की अवैध कोशिश का मामला सामने आया था, जिसमें अस्पताल संचालक समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया था। यानी यह क्षेत्र मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क की चपेट में है। हाल के अध्ययन बताते हैं कि देश में हर दिन 269 बच्चे लापता हो रहे हैं, जिसमें मानव तस्करी और सोशल मीडिया के जरिए बिछाया जाने वाला जाल बड़ी भूमिका निभा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि तस्कर आमतौर पर गरीब परिवारों की बेटियों को रोजगार, पढ़ाई या बेहतर जीवन का सपना दिखाकर फुसलाते हैं। पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और ओडिशा के सीमावर्ती जिले इस काले कारोबार के लिए सबसे उपजाऊ जमीन साबित होते आए हैं। दिल्ली-एनसीआर का महानगरीय क्षेत्र इन तस्करों का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है, जहाँ नाबालिगों को घरेलू नौकर, सफाईकर्मी या बदतर हालत में शोषण का शिकार बनाया जाता है।
क्या कहती है कानूनी व्यवस्था
भारत में मानव तस्करी के विरुद्ध POCSO अधिनियम, IPC की धारा 370 (तस्करी), किशोर न्याय अधिनियम और बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम जैसे कड़े कानून मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर 2025 में एक राष्ट्रीय पोर्टल बनाने का निर्देश दिया था जिससे सभी राज्यों की पुलिस लापता बच्चों का डेटा साझा कर सकें हालांकि 2026 की शुरुआत तक इसका क्रियान्वयन अभी प्रक्रिया में है।
जनता से अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें आसपास किसी संदिग्ध नाबालिग या बंधुआ मजदूर दिखे, तो तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, पुलिस हेल्पलाइन 112 या स्थानीय AHT थाने को सूचित करें। इस सफल ऑपरेशन में थाना AHT प्रभारी, मिशन मुक्ति फाउंडेशन की टीम और पश्चिम बंगाल पुलिस के अधिकारियों की सराहना की गई है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने कहा कि ऐसी कार्रवाइयां भविष्य में भी बिना रुके जारी रहेंगी।

