Major action in Noida under ‘Operation Cyber ​​Vajra’: इंडिगो में नौकरी और बीमा पॉलिसी मैच्योर कराने के नाम पर ठगी करने वाले दो फर्जी कॉल सेंटर बेनकाब, 4 गिरफ्तार

Major action in Noida under ‘Operation Cyber ​​Vajra’: नोएडा। गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे प्रदेशव्यापी अभियान ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ के तहत एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए थाना फेस-1 क्षेत्र में सक्रिय दो फर्जी कॉल सेंटरों का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में चार अभियुक्तों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से 01 लैपटॉप, 02 कंप्यूटर, 12 मोबाइल फोन, 17 एटीएम कार्ड सहित अन्य आपत्तिजनक सामान बरामद किया है।

पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर चल रहा है अभियान

एडीसीपी नोएडा मनीषा सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस महानिदेशक के निर्देशन में पूरे उत्तर प्रदेश में ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ चलाया जा रहा है, जिसके तहत साइबर अपराधियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी है। पुलिस आयुक्त के निर्देशन और डीसीपी नोएडा के पर्यवेक्षण में एसीपी-2, थाना फेस-1 प्रभारी तथा साइबर सेल की संयुक्त टीम के सहयोग से यह कार्रवाई अंजाम दी गई।

सेक्टर-2 में इंडिगो एयरलाइंस के नाम पर ठगी

पहला फर्जी कॉल सेंटर नोएडा के सेक्टर-2 में संचालित हो रहा था। पुलिस के मुताबिक, यहां बैठे ठग इंडिगो एयरलाइंस में ग्राउंड स्टाफ और सपोर्टिंग स्टाफ के पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर युवाओं से प्रोसेसिंग फीस के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे थे। बेरोजगार युवाओं को फर्जी ऑफर लेटर भेजकर उनका भरोसा जीता जाता था और फिर रजिस्ट्रेशन व अन्य शुल्कों के नाम पर ठगी को अंजाम दिया जाता था। गौरतलब है कि बीते कुछ हफ्तों में नोएडा पुलिस इसी तरह के कई एविएशन जॉब फ्रॉड रैकेट पहले भी पकड़ चुकी है, जिनमें एयरलाइंस और एयरपोर्ट में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया जाता रहा है।

सेक्टर-6 में बीमा पॉलिसी के नाम पर ठगी

दूसरा फर्जी कॉल सेंटर सेक्टर-6 इलाके में चल रहा था, जहां आरोपी लोगों को अधिक बीमा दावा (इंश्योरेंस क्लेम) दिलाने तथा क्रेडिट व डेबिट कार्ड उपलब्ध कराने के नाम पर लंबे समय से ठगी कर रहे थे। पीड़ितों को बीमा पॉलिसी मैच्योर कराने और अतिरिक्त क्लेम राशि दिलाने का लालच देकर उनसे पैसे अपने बैंक खातों में ट्रांसफर करवाए जाते थे। नोएडा में बीमा पॉलिसी के नाम पर फर्जी कॉल सेंटरों के जरिए ठगी के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें आरोपी पीड़ितों को बीमा राशि अपने ही खातों में भेजने के लिए बहला-फुसलाकर धोखाधड़ी को अंजाम देते रहे हैं।

सीडीआर एनालिसिस से खुला मामला

पुलिस ने बताया कि मोबाइल नंबरों के विश्लेषण, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) एनालिसिस और संदिग्ध बैंक खातों की जांच के आधार पर दोनों कॉल सेंटरों तक पहुंचा गया। जांच में सामने आया कि आरोपी बार-बार ठिकाना बदलकर वारदातों को अंजाम दे रहे थे, ताकि पुलिस की पकड़ में न आ सकें। दोनों जगहों से डेस्कटॉप कंप्यूटर, लैपटॉप, कीपैड वाले मोबाइल फोन, बैंक चेक बुक और कई दस्तावेज बरामद हुए हैं।

 25 शिकायतें दर्ज, बैंक खाते होंगे फ्रीज

राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर इन दोनों फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ अब तक कुल 25 शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने अलग-अलग शहरों और इलाकों में जगह बदल-बदल कर लाखों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से जुड़े सभी बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, ताकि उन्हें फ्रीज कराया जा सके और पीड़ितों की पूरी धनराशि वापस दिलाई जा सके।

आम जनता से पुलिस की अपील

पुलिस ने आमजन से अपील की है कि नौकरी और बीमा से जुड़ी किसी भी फोन कॉल, मैसेज या ऑफर पर बिना पूरी पड़ताल किए भरोसा न करें। किसी भी कंपनी में नौकरी के नाम पर पहले से पैसे मांगे जाने या बीमा क्लेम के लिए निजी बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहे जाने पर तुरंत सतर्क हो जाएं और नजदीकी थाने या साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि ‘ऑपरेशन साइबर वज्र’ के तहत जांच अभी जारी है और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है।

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