उत्तर प्रदेश सरकार ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के ‘उम्मीद पोर्टल’ पर दर्ज करीब 31 हजार वक्फ संपत्तियों का सूचीकरण (रजिस्ट्रेशन) निरस्त कर दिया गया है। जांच में सामने आया है कि इन संपत्तियों का विवरण वक्फ बोर्ड के आधिकारिक अभिलेखों (रिकॉर्ड) से मेल नहीं खा रहा था। शासन की इस बड़ी कार्रवाई से गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) जिला भी अछूता नहीं रहा है। जिले में शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड की कुल 81 संपत्तियों का सूचीकरण निरस्त किया गया है, जिनमें 44 सुन्नी वक्फ और 37 शिया वक्फ की संपत्तियां शामिल हैं।
आंकड़ों में भारी अंतर के बाद कराया गया था सर्वे
दरअसल, पिछले वर्ष तक गौतमबुद्ध नगर में वक्फ बोर्ड के पास आधिकारिक तौर पर केवल 7.37 एकड़ भूमि दर्ज थी, जिस पर 41 वक्फ संपत्तियां थीं। इनमें 26 सुन्नी वक्फ और 15 शिया वक्फ के नाम दर्ज थे। इसके विपरीत, केंद्र सरकार के ‘वक्फ एसेट्स मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ इंडिया’ (WAMSI – वक्फ बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट) के आंकड़ों के मुताबिक जिले में वक्फ की कुल 208 संपत्तियां दर्ज थीं। सरकारी रिकॉर्ड और पोर्टल के आंकड़ों में इस भारी अंतर (मिसमैच) को देखते हुए जिला प्रशासन ने पिछले साल दोबारा गहन सर्वे कराया था।
उम्मीद पोर्टल पर मिली थीं 374 संपत्तियां
दोबारा कराए गए सर्वे के बाद ‘उम्मीद पोर्टल’ के जो आंकड़े सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। पोर्टल पर दर्ज संपत्तियों की कुल संख्या बढ़कर 374 पहुंच गई, जिसमें सुन्नी वक्फ की 290 और शिया वक्फ की 84 संपत्तियां सूचीबद्ध थीं। इसी सूची की जब वक्फ बोर्ड के मूल अभिलेखों से कड़ाई से जांच की गई, तो गड़बड़ी पाई गई। परिणामस्वरुप प्रशासन ने शिया वक्फ की 84 संपत्तियों में से 37 और सुन्नी वक्फ की 290 संपत्तियों में से 44 (कुल 81 संपत्तियां) निरस्त कर दी हैं।
5 जून तक का समय, अन्यथा प्रशासन लेगा कब्जे में
शासन ने इन विवादित या मिसमैच संपत्तियों का सही विवरण दर्ज करने के लिए 5 जून की अंतिम तिथि निर्धारित की है। तय समय सीमा के भीतर यदि इन संपत्तियों के दस्तावेजों का मिलान वक्फ बोर्ड के मूल अभिलेखों से नहीं हो पाया, तो ये सभी संपत्तियां पूरी तरह से वक्फ की श्रेणी से बाहर कर दी जाएंगी। इसके बाद जिला प्रशासन इन संपत्तियों को अपने कब्जे (सरकारी नियंत्रण) में ले सकता है।
जिले में वक्फ पंजीकरण का इतिहास
शिया वक्फ बोर्ड: जिले में शिया वक्फ बोर्ड के नाम पर संपत्तियों के पंजीकरण का इतिहास काफी पुराना है। साल 1955 में शिया वक्फ बोर्ड ने अपनी पहली संपत्ति का पंजीकरण कराया था, और उस वर्ष सबसे अधिक 8 संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। इसके बाद इस बोर्ड के तहत अंतिम संपत्ति साल 2015 में दर्ज की गई थी।
सुन्नी वक्फ बोर्ड: सुन्नी वक्फ बोर्ड के तहत साल 2006 से लेकर साल 2023 के बीच जिले भर में कुल 25 संपत्तियां दर्ज की गई थीं।
चारों तहसीलों में फैली हैं संपत्तियां; कहीं मकान तो कहीं दुकानें
निरस्त की गईं ये संपत्तियां जिले की चारों प्रमुख तहसीलों—दादरी, सदर, जेवर और नोएडा में स्थित हैं। वर्तमान में इन वक्फ संपत्तियों पर विभिन्न प्रकार की गतिविधियां चल रही हैं: कई जमीनों पर कृषि कार्य हो रहा है, तो कहीं व्यावसायिक दुकानों का संचालन किया जा रहा है।कुछ संपत्तियों पर धार्मिक स्थल जैसे कब्रिस्तान, मस्जिद, दरगाह, ईदगाह, मजार और मकबरा आदि बने हुए हैं, तो कहीं आवासीय मकान खड़े हैं।
कब्जे और मुकदमे की स्थिति: प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, इन संपत्तियों में से 32 संपत्तियां ऐसी हैं जिन पर वर्तमान में किसी का कब्जा नहीं होने की जानकारी मिली है। वहीं, दो बेहद महत्वपूर्ण संपत्तियों को लेकर कोर्ट में कानूनी मुकदमा (लिटिगेशन) भी चल रहा है। 5 जून की डेडलाइन नजदीक आने के साथ ही अब वक्फ बोर्ड और संबंधित पक्षों के बीच दस्तावेजों को दुरुस्त करने की कवायद तेज हो गई है।

