गौतमबुद्धनगर के ग्राम आगाहपुर में शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (लोकशक्ति) की ओर से आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और ग्रामीण जुटे और संगठन ने किसानों के व्यापक हितों के संरक्षण के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प दोहराया। बैठक की अध्यक्षता अमृत सिंह ने की जबकि कार्यक्रम का संचालन संगठन के परिवहन मंत्री चौधरी ओमप्रकाश गुर्जर ने किया।
बैठक को संबोधित करते हुए संगठन के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी बीसी प्रधान ने सरकार और संबंधित प्राधिकरणों द्वारा किसानों व ग्रामीणों के प्रति संवेदनशीलता की कमी पर कड़ा प्रदर्शन किया और कहा कि उनकी समस्याओं की अनदेखी से ग्रामीण समुदायों में असंतोष बढ़ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय पर समस्याओं का समाधान नहीं किया गया और व्यवस्थाओं में सुधार नहीं लाया गया तो भारतीय किसान यूनियन लोकशक्ति लोकतांत्रिक तरीकों से व्यापक और संगठित आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।
चौधरी बीसी प्रधान ने कहा, “हम किसान, मजदूर और गरीब वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। किसी भी कीमत पर गरीब, मजदूर और किसान का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने स्थानीय प्रशासन से तत्काल संवेदनशीलता दिखाने और किसानों की मांगों पर बातचीत कर समाधान निकलने का आह्वान भी किया। बैठक के दौरान कई उपस्थित किसानों और ग्रामीणों ने संगठन की सदस्यता ली और नवनियुक्त पदाधिकारियों का स्वागत किया गया। संगठन ने नए पदाधिकारियों को किसान समुदाय की आवाज़ को मजबूती से उठाने की जिम्मेदारी सौंपी। जिन लोगों ने जिम्मेदारी संभाली उनमें अमृत सिंह, अरविंद, दीपक चौधरी, पुषपेंद्र सिंह, प्रवीन, सुखबीर, नवीन कुमार, आशीष, मोनू, संदीप कुमार, देवराज जाटव, अजय उपाध्याय, योगेश कुमार, राजू नंबरदार और नरेश मीणा प्रमुख रहे।
कार्यक्रम में रविंद्र चौधरी, इंद्रपाल कर्नल, राजकुमार मोनू, हरेंद्र बैसोया, सतीश खारी, अशोक चौहान, जोगेंद्र चपराना, अरुण गौतम, राहुल यादव, प्रमोद प्रजापति, बृजेश बैसोया, सुधीर ठाकुर, सोनू बैसोया, सेलकराम, सुनील बैसोया, महेश बैसोया, महरदीन और दीपक कुमार सहित सैकड़ों किसान एवं ग्रामीण उपस्थित रहे। स्थानीय नेताओं ने बताया कि बैठक केवल संगठन विस्तार का माध्यम नहीं थी बल्कि यह किसान एकजुटता और ग्रामीणों की समस्याओं को केन्द्र में रखकर भविष्य की रणनीति तय करने का मंच भी था। संगठन ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगे अनसुनी रहीं तो आवश्यक होने पर जनआंदोलन और धरना-प्रदर्शन जैसे कदम उठाए जाएंगे।
स्थानीय किसान नेताओं ने मांगों में मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता, फसल बीमा और मुआवजे में समयबद्धता, सिंचाई व पानी की बेहतर व्यवस्था तथा भूमि संबंधित विवादों के त्वरित निपटारे को प्रमुख रखा। उन्होंने कहा कि इन मसलों पर प्रशासन से ठोस जवाब न मिलने पर संगठन आगे बढ़कर प्रदेशस्तरीय संघर्ष का रास्ता अपनाने पर भी विचार करेगा। आगाहपुर में आज की यह बैठक संगठन के विस्तार और किसान एकजुटता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। संगठन के प्रतिनिधियों ने कहा कि आने वाले दिनों में वे गांव-गांव जाकर सदस्यता अभियान चलाएंगे और किसानों की आवाज को बड़े मंचों तक पहुंचाने के लिए समन्वित गतिविधियां तेज करेंगे।

