देश में बढ़ते व्यापार घाटे और विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए मोदी सरकार ने ‘मितव्ययिता’ (Austerity) का मार्ग अपनाया है। सोमवार को प्रधानमंत्री द्वारा दी गई ‘सात अपीलों’ का असर अब जमीन पर दिखने लगा है।
1. वीआईपी कल्चर पर कैंची: 40 से घटकर 4 गाड़ियों पर आया क़ाफ़िला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मिसाल पेश करते हुए अपने सुरक्षा काफिले की गाड़ियों की संख्या में भारी कटौती की है। आमतौर पर पीएम के काफिले में 14 से 17 गाड़ियाँ (और सुरक्षा खतरों के अनुसार 30-40 गाड़ियाँ) होती थीं, जिसे अब घटाकर मात्र 4 गाड़ियों तक सीमित कर दिया गया है।
- अमित शाह का कदम: गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जेपी नड्डा जैसे दिग्गज नेताओं ने भी अपने काफिले को आधा कर दिया है।
- उद्देश्य: इस कदम का मुख्य उद्देश्य ईंधन की बचत करना और जनता को यह संदेश देना है कि संकट के समय सरकार फिजूलखर्ची रोकने के लिए प्रतिबद्ध है।
2. विदेशी दौरे रद्द और ‘स्वदेशी’ की अपील
प्रधानमंत्री ने मौजूदा वैश्विक स्थितियों को देखते हुए अपने आगामी विदेशी दौरे को भी रद्द या स्थगित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने देशवासियों से अपील की है कि कम से कम एक साल तक विदेश यात्रा और विदेशों में डेस्टिनेशन वेडिंग से बचें, ताकि देश की विदेशी मुद्रा बाहर न जाए।
3. सोने पर ‘इंपोर्ट ड्यूटी’ का हथौड़ा: 6% से बढ़कर हुई 15%
भारत में बढ़ते गोल्ड इम्पोर्ट (जो वित्त वर्ष 2026 में 72 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया) को रोकने के लिए सरकार ने आयात शुल्क (Import Duty) में भारी बढ़ोतरी की है।
- ड्यूटी में बदलाव: सोने पर प्रभावी आयात शुल्क को 6% से बढ़ाकर सीधे 15% कर दिया गया है।
- कीमतों में धमाका: इस फैसले के बाद घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में करीब 10,000 रुपये प्रति 10 ग्राम (तोला) और चांदी में लगभग 15,000 से 20,000 रुपये प्रति किलोग्राम की जबरदस्त बढ़त देखी गई है।
- रिकॉर्ड भाव: वर्तमान में सोना ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया है, जबकि चांदी ₹3 लाख प्रति किलो के करीब पहुँच रही है।
4. प्रधानमंत्री की सात प्रमुख अपीलें
महँगाई और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये (जो ₹95 के पार जा चुका है) को संभालने के लिए पीएम ने नागरिकों से सात सहयोग मांगे हैं:
- सोने की खरीद टालें: कम से कम एक साल तक नया सोना न खरीदें।
- ईंधन बचाएं: पब्लिक ट्रांसपोर्ट या इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करें।
- Work From Home: जहाँ संभव हो, घर से काम करने को प्राथमिकता दें।
- विदेशी वस्तुओं का त्याग: ‘वोकल फॉर लोकल’ को अपनाएं।
- खाद्य तेल का संयम: आयातित खाद्य तेलों का उपयोग कम करें।
सरकार के ये कड़े फैसले संकेत दे रहे हैं कि आने वाला समय आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। जहाँ एक तरफ वीआईपी संस्कृति को कम कर ‘नेशन फर्स्ट’ का संदेश दिया जा रहा है, वहीं आयात शुल्क बढ़ाकर सरकार विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने की जद्दोजहद में जुटी है।

