New Delhi news उत्तरी जिला पुलिस और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम ने महज 48 घंटे के भीतर 54.50 लाख रुपये की कथित लूट की गुत्थी सुलझाते हुए चौंकाने वाला खुलासा किया है। जिस कर्मचारी ने खुद को लूट का शिकार बताया था, वही पूरी साजिश का मास्टरमाइंड निकला। पुलिस ने अंतरराज्यीय अभियान चलाकर सभी छह आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है तथा 50 लाख रुपये नकद भी बरामद कर लिए हैं।
मामला 26 मई का है, जब बीकानेर निवासी 23 वर्षीय वासुदेव ने थाना लाहौरी गेट में शिकायत दर्ज कराई थी। उसने बताया कि वह एक मनी ट्रांसफर एजेंट के यहां काम करता है और 54.50 लाख रुपये नकद लेकर चांदनी चौक स्थित कार्यालय जा रहा था। फतेहपुरी के पास दो युवकों ने उससे नकदी से भरा बैग लूट लिया, मारपीट की और मोबाइल फोन भी छीनकर फरार हो गए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए लाहौरी गेट थाना और स्पेशल स्टाफ की संयुक्त टीम गठित की गई। पुलिस ने 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तकनीकी निगरानी की और दिल्ली, राजस्थान तथा उत्तराखंड में करीब 3,500 किलोमीटर तक अभियान चलाया। जांच के दौरान पुलिस को शिकायतकर्ता के बयान और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में कई विरोधाभास मिले। फुटेज में दिखाई दिया कि कथित लूट के दौरान वासुदेव ने कोई विरोध नहीं किया और न ही आरोपियों का पीछा किया। इससे पुलिस का शक गहरा गया।
लगातार पूछताछ में वासुदेव टूट गया और उसने स्वीकार कर लिया कि उसने अपने रिश्तेदार और अन्य साथियों के साथ मिलकर नकदी हड़पने के लिए लूट की झूठी कहानी रची थी। जांच में सामने आया कि वासुदेव ने नकदी की जानकारी अपने चचेरे भाई पुरुषोत्तम को दी थी। इसके बाद पुरुषोत्तम, रामनिवास, कमल भारती, मनफूल मुंड और मनोज मोटासरा को साजिश में शामिल किया गया।
आरोपियों ने सटीक जानकारी मिलने पर फर्जी लूट को दिया था अंजाम
योजना के अनुसार आरोपी राजस्थान से दिल्ली पहुंचे और नकदी ले जाने के रूट की जानकारी मिलने के बाद फर्जी लूट की वारदात को अंजाम दिया। घटना के बाद सभी आरोपी अलग-अलग स्थानों पर फरार हो गए। पुलिस ने तकनीकी निगरानी और लगातार छापेमारी के बाद राजस्थान और उत्तराखंड से सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी मनोज के कब्जे से 16 लाख रुपये और रामनिवास के पास से 34 लाख रुपये बरामद किए। कुल 50 लाख रुपये की नकदी बरामद हो चुकी है, जबकि शेष राशि की बरामदगी के प्रयास जारी हैं। पुलिस पूछताछ में आरोपियों की पहचान वासुदेव, पुरुषोत्तम, रामनिवास, कमल भारती, मनफूल मुंड और मनोज मोटासरा के रूप में हुई है। अधिकांश आरोपी राजस्थान के बीकानेर जिले के निवासी हैं और कुछ पेशे से वेडिंग फोटोग्राफर हैं।
उत्तर जिला पुलिस के अनुसार यह मामला गहन तकनीकी जांच, सीसीटीवी विश्लेषण और लगातार पूछताछ के जरिए सुलझाया गया। मामले में आगे की जांच जारी है।
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