“हेलमेट मैन ऑफ इंडिया”: “संजीवनी बूटी” मिशन, सड़क हादसों में गंभीर रूप से घायल को मात्र 1 रुपए में एयर-एम्बुलेंस सुविधा

“हेलमेट मैन ऑफ इंडिया”: सड़क सुरक्षा के लिए लंबे समय से काम करने वाले “हेलमेट मैन ऑफ इंडिया” राघवेंद्र कुमार ने बुधवार को नोएडा से एक क्रांतिकारी योजना “संजीवनी बूटी मिशन” की घोषणा की। इस मिशन के तहत गंभीर रूप से घायल सड़क हादसे के शिकार व्यक्ति को केवल एक रुपए के सर्विस चार्ज पर त्वरित एयर-एम्बुलेंस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। पायलट परियोजना के रूप में अगले वर्ष 2027 में तीन हेलीकॉप्टर यमुना एक्सप्रेस-वे पर तैनात किए जाएंगे, जिनका उद्देश्य दुर्घटना के शुरुआती घंटों में जीवन रक्षक चिकित्सा पहुँचाना बताया गया है।

योजना का उद्देश्य और पृष्ठभूमि

राघवेंद्र कुमार ने बताया कि यह पहल उनके निजी अनुभव और वर्षों की सड़क सुरक्षा मुहिम का परिणाम है। वर्ष 2014 में उनके मित्र कृष्ण की नोएडा में एक सड़क हादसे में मौत हो जाने के बाद राघवेंद्र ने हेलमेट वितरण और सड़क सुरक्षा जागरण अभियान शुरू किया। अब तक वे 22 राज्यों में 75,000 से अधिक मुफ्त हेलमेट वितरित कर चुके हैं। राघवेंद्र का कहना है कि भारत सड़क दुर्घटनाओं से जूझ रहा है और त्वरित आपातकालीन सेवा ही अनेक जिंदगियाँ बचा सकती है।

H-3 फॉर्मूला: हेलीकॉप्टर, हाईवे, हॉस्पिटल

हेलमेट मैन ऑफ इंडिया ने इस मिशन का स्वरूप “H-3 फॉर्मूला” (Helicopter, Highway, Hospital) बताया। इसका लक्ष्य हेलीकॉप्टर आधारित त्वरित चिकित्सा निकासी, उच्च गति वाले हाईवे (विशेषकर यमुना एक्सप्रेस-वे) पर तैनाती और आस-पास के हॉस्पिटल नेटवर्क को जोड़कर गंभीर घायलों तक समय पर इमरजेंसी केयर पहुँचाना है। राघवेंद्र के अनुसार, हेली-एम्बुलेंस से “सोने का समय” यानी शुरुआती सघन घड़ी में मरीज को जीवनरक्षक हस्तक्षेप मिल सकेगा, जिससे मृत्यु और स्थायी आकस्मिकक्षति कम हो सकती है।

पायलट प्रोजेक्ट: तैनाती और वित्तपोषण का ढांचा

राघवेंद्र ने विस्तार से बताया कि पायलट चरण में तीन हेलीकॉप्टर तैनात किए जाएंगे। प्रत्येक हेलीकॉप्टर का वार्षिक लीज खर्च लगभग 7 करोड़ रुपये अनुमानित है जो 500 उड़ने के घंटों के साथ ईंधन एवं स्टाफ खर्च सम्मिलित है। तीन हेलीकॉप्टरों का कुल वार्षिक लीज खर्च 21 करोड़ रुपये होगा। मिशन के संचालन एवं विस्तार हेतु वित्तीय मॉडल के रूप में टोल-आधारित माइक्रो-फीस का प्रस्ताव रखा गया है: यमुना एक्सप्रेस-वे सहित जुड़े टोल-प्लाज़ाओं पर प्रत्येक वाहन से प्रति गुजरने पर मात्र 1 रुपए “सर्विस चार्ज” वसूल करने पर अनुमानित रूप से मासिक 3 करोड़ और वार्षिक 36 करोड़ रुपये जुटेगा। इन राशियों का उपयोग हेलीकॉप्टर लीज, एयर ऑपरेशन, ग्राउंड एम्बुलेंस और अस्पतालों में आपात-सेवाओं के विस्तार के लिए किया जाएगा।

एयर इंडिया-टाटा के साथ अधिकारियों से चर्चा

हाल ही में राघवेंद्र ने गुड़गाँव के एयर इंडिया-टाटा हेडक्वार्टर में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सड़क सुरक्षा पर विचार-विमर्श किया। कहा जा रहा है कि एयर इंडिया के CEO कैंपबेल विल्सन ने राघवेंद्र को सम्मानित भी किया और एयरलाइंस की ओर से इस पहल के संभावित तकनीकी तथा लॉजिस्टिक समर्थन पर सकारात्मक चर्चा हुई। राघवेंद्र ने अधिकारियों के सामने अपने विजन और H-3 फॉर्मूला को प्रस्तुत किया है; आगामी महीनों में विस्तृत समझौते व फाइनैंसिंग मॉडल पर अंतिम बातचीत होने की संभावना है।

ऑपरेशनल चुनौतियाँ और जोखिम प्रबंधन

विशेषज्ञों का कहना है कि पायलट प्रोजेक्ट प्रभावी हो सकता है पर इसके लिए कई चुनौतियों को ध्यान में रखना होगा:

तात्कालिक सूचना तंत्र: दुर्घटना स्थल की सटीक लोकेशन और प्राथमिक चिकित्सा की सूचना त्वरित रूप से हेलीकॉप्टर ऑप्स को भेजने हेतु एक मजबूत कॉल-टू-एक्शन नेटवर्क आवश्यक है।

मौसम व टेक्निकल सीमाएँ: शहरी और हाईवे-क्षेत्र में हेलीपैड सुविधाएँ, खराब मौसम में ऑपरेशन सीमितता और हवाई नेविगेशन से जुड़े सुरक्षा मानक तय करने होंगे।

समन्वय: राज्य परिवहन, नेशनल हाइवे अथॉरिटी, स्वास्थ्य विभाग तथा टोल ऑपरेटरों के साथ समन्वय का स्पष्ट ढांचा बनाना होगा।

कानून और नियमन: हेलीकॉप्टर-एंबुलेंस सेवा के नियम, इन्श्योरेंस कवर और जिम्मेदारियों की कानूनी रूपरेखा तैयार करनी होगी।

स्थानीय प्रभाव और उम्मीदें

यमुना एक्सप्रेस-वे पर हैवी ट्रैफिक और हाई-स्पीड वाहन होने के कारण दुर्घटना गंभीर रूप ले सकती हैं; राघवेंद्र का मानना है कि त्वरित एयर-एंबुलेंस सुविधा अनेक जीवन बचा सकती है। टोल-आधारित मामूली शुल्क का प्रस्ताव आम जनता के लिए प्रासंगिक और सुलभ बताया गया है, क्योंकि एक रुपए की मामूली राशि पर हर वाहन नियमित रूप से योगदान देगा और संकटमोचन सेवाओं के लिए निरंतर धन प्रवाह सुनिश्चित करेगा।

आगे का रोडमैप

राघवेंद्र ने कहा कि 2027 में शुरू होने वाले पायलट के बाद प्रशिक्षण, अस्पताल नेटवर्क का विस्तार और अतिरिक्त हेलीकॉप्टर जोड़ने का निर्णय वास्तविक दुनिया के डेटा और पायलट के परिणामों के आधार पर लिया जाएगा। योजना साझा हितधारकों (एयरलाइंस, टोल ऑपरेटर, स्थानीय प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग) के साथ समन्वय कर चरणबद्ध रूप से लागू की जाएगी। सड़क सुरक्षा के विशेषज्ञों ने इस पहल का स्वागत किया है पर वे वित्तीय निरंतरता, जवाबदेही और नियामकीय मानकों पर बल दे रहे हैं। उनका सुझाव है कि सफलता के लिए पारदर्शी फंड-एडमिनिस्ट्रेशन, आकस्मिक चिकित्सा प्रशिक्षण, और हाईवे-आधारित त्वरित कॉल रिस्पॉन्स सिस्टम अनिवार्य होंगे।

यह भी पढ़ें: नोएडा की मॉडल: त्विषा शर्मा की मौत के 10 दिन बाद पति समर्थ सिंह सरेंडर करने को तैयार, मीडिया से बदतमीजी और बेल रोकने वाले बयान पर सवाल

यहां से शेयर करें