इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में ‘ओरियन’ के नाम से पेश किया चीन का Unitree Go2 रोबोडॉग — वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल, सरकार ने स्टॉल खाली करवाया
नई दिल्ली/ग्रेटर नोएडा। देश की राजधानी दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में उस समय जबरदस्त विवाद खड़ा हो गयाए जब ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर यह आरोप लगा कि उसने चीन में बने एक रोबोटिक डॉग को अपना स्वदेशी आविष्कार बताकर इस राष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित किया। सूत्रों का कहना है कि चीनी रोबोट को अपना बताए जाने से हुई किरकिरी के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को एआई समिट से बाहर कर दिया गया है और यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर से सारे उपकरण हटा लिए गए हैं। यह घटना न केवल शैक्षणिक जगत में चर्चा का विषय बनी, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी तूफान ले आई।
क्या है पूरा मामला
दिल्ली में चल रहे एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने जिस रोबोटिक डॉग को पेश किया, उसकी पहचान चीनी रोबोट Unitree Go2 के तौर पर हुई है, जो चीनी रोबोटिक्स फर्म Unitree Robotics का बनाया हुआ एक कमर्शियली उपलब्ध मॉडल है। समिट में इस रोबोट को “ओरियन” नाम से पेश किया गया।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एआई समिट 2026 में जिस डॉग को ओरियन नाम से पेश किया, उसे चीनी कंपनी Unitree ने बनाया है। कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर जानकारी के मुताबिक, इस डॉग की कीमत 2,800 डॉलर (लगभग 2,53,953 रुपए) है। इसका प्रो वर्जन, एयर वर्जन और X वर्जन भी कंपनी की साइट पर उपलब्ध है। सबसे सस्ते एयर वेरिएंट की कीमत 1,600 डॉलर (लगभग 1,45,116 रुपए) और X वेरिएंट की कीमत 4,500 डॉलर (लगभग 4,08,138 रुपए) है। यानी बाज़ार में खुलेआम उपलब्ध एक चीनी रोबोटिक प्रोडक्ट को एक भारतीय विश्वविद्यालय ने ‘स्वदेशी एआई इनोवेशन’ के रूप में देश के सबसे बड़े एआई मंच पर प्रदर्शित किया — और यही इस पूरे प्रकरण की जड़ बनी।
वीडियो वायरल होते ही मचा हंगामा
सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि यह रोबोट गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने तैयार किया है और इसे स्वदेशी एआई इनोवेशन के तौर पर मंच पर पेश किया गयाए जबकि असल में यह चीन की कंपनी का प्रोडक्ट है। कई मीडिया संगठनों ने इस पर रिपोर्ट भी की। देखते-देखते यूनिवर्सिटी का लाइसेंस रद्द हो जैसे नारे सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे और विश्वविद्यालय को सफाई देने पर मजबूर होना पड़ा। वहीं एक मीडिया संगठन को अपना वीडियो डिलीट करना पड़ा।
सरकार का कड़ा एक्शनः तुरंत खाली करने का आदेश
वीडियो वायरल होने के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट के एक्सपो एरिया से तुरंत हटाने को कहा गया। सरकारी सूत्रों के मुताबिक यह कदम वायरल वीडियो और उसके बाद उठे विवाद के बाद लिया गया। सरकारी सूत्रों के अनुसारए इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया गया और आयोजकों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए यूनिवर्सिटी को एक्सपो स्पेस खाली करने को कहा। हालांकि फिलहाल आधिकारिक तौर पर कोई बयान जारी नहीं किया गया है।
गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पक्षः इनहाउस डेवलपमेंट नहीं बताया था
जब विवाद बढ़ा तो यूनिवर्सिटी ने तुरंत सफाई देने की कोशिश की। विवाद बढ़ने पर यूनिवर्सिटी ने सफाई दी कि रोबोट को इन.हाउस डेवलपमेंट के तौर पर पेश नहीं किया गया था। उनका कहना था कि यह डिवाइस छात्रों की ट्रेनिंग और रिसर्च के लिए लिया गया है और इसे शैक्षणिक उद्देश्य से प्रदर्शित किया गया था।
यूनिवर्सिटी ने आधिकारिक रूप से बयान जारी कर कहा कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग छात्रों को एआई प्रोग्रामिंग सिखाने और वैश्विक स्तर पर उपलब्ध उपकरणों और संसाधनों का उपयोग करके वास्तविक दुनिया के कौशल विकसित करने के हमारे प्रयास का एक हिस्सा है।
यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया कि छात्र इस रोबोट का इस्तेमाल इसकी क्षमताओं को समझनेए टेस्ट करने और वास्तविक जीवन में इसके उपयोग तलाशने के लिए कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी का कहना है कि इनोवेशन की कोई सीमा नहीं होती और सीखने का नजरिया वैश्विक होना चाहिए।
बढ़ते विवाद के बीच संस्थान ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी कियाए जिसमें यूनिवर्सिटी के खिलाफ चल रहे ष्प्रोपेगेंडाष् पर अपनी चिंता जताई गई।
राजनीतिक रंगः राहुल गांधी और इंडियन यूथ कांग्रेस का हमला
इस मामले में राजनीति भी तेजी से सक्रिय हो गई। इस मामले पर राहुल गांधी का भी एक एक्स पोस्ट आयाए जिसमें उन्होंने लिखा कि एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी प्रोडक्ट्स शोकेस किए जा रहे हैं।
इंडियन यूथ कांग्रेस ने आरोप लगाया कि चीनी रोबोट को भारतीय आविष्कार बताकर पेश किया गया और इसे सरकार के विजन से जोड़ा गया। कुछ यूजर्स ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर भी सवाल खड़े किए।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की साख को नुकसान
जिस देश को विकसित बनाने के लिए सरकारी मशीनरी से लेकर आम आदमी तक अपना खून-पसीना बहा रहा है। वहां गलगोटिया यूनिवर्सिटी जैसे संस्थानों द्वारा ऐसी करतूत की गई जो राष्ट्र को शर्मसार करती है। गलगोटिया यूनिवर्सिटी के इस कृत्य की जमकर आलोचना हो रही है।
एआई इम्पैक्ट समिट जैसे इंटरनेशनल मंच पर हर डेमो और हर दावा बहुत बारीकी से देखा जाता है। यहां दिखाई जाने वाली टेक्नोलॉजी सिर्फ दर्शकों के लिए नहींए बल्कि ग्लोबल ऑडियंस के लिए भी होती है। ऐसे में यह घटना न केवल एक विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करती हैए बल्कि भारत की वैश्विक छवि पर भी असर डालती है।
सवाल जो अब उठ रहे हैं
इस पूरे प्रकरण ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं।
पहलाः जब चीन के साथ भारत के रिश्ते पहले से तनावपूर्ण हैं और आत्मनिर्भर भारत का नारा दिया जा रहा हैए तब क्या किसी चीनी उत्पाद को राष्ट्रीय एआई मंच पर भारतीय इनोवेशन बताकर पेश करना स्वीकार्य है।
दूसराः क्या समिट में प्रतिभागियों की पूर्व जांच होनी चाहिए थी कि वे जो दिखा रहे हैंए वह वास्तव में उनका अपना आविष्कार है।
तीसराः यूनिवर्सिटी के खिलाफ केवल स्टॉल हटाने की कार्रवाई पर्याप्त हैए या नियामक स्तर पर भी जांच होनी चाहिए।
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