कोलकाता के ऐतिहासिक सुरेंद्रनाथ कॉलेज में ₹1 करोड़ नकद, रिवॉल्वर और कंडोम बरामद, यह तो बस हिमशैल की चोटी 

स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े 140 साल पुराने प्रतिष्ठित संस्थान की छात्र यूनियन का कमरा बना “भ्रष्टाचार का अड्डा” TMCP पर उठ रहे गंभीर सवाल, मुचिपाड़ा थाने की पुलिस जांच में जुटी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया भूचाल आ गया है। कोलकाता के शियालदह स्थित ऐतिहासिक सुरेंद्रनाथ कॉलेज जो 1884 में राष्ट्रवादी नेता सुरेंद्रनाथ बनर्जी द्वारा स्थापित किया गया था और स्वतंत्रता आंदोलन से गहरे तौर पर जुड़ा रहा है  के परिसर से मंगलवार को हुई बरामदगी ने पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया है। कॉलेज के यूनियन रूम से दो सूटकेस भर-भरकर 100 और 500 रुपये के नोट मिले, जिन्हें दीमक ने चाट लिया था। दावा है कि यह रकम 1 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। लेकिन यह तो सिर्फ शुरुआत थी  इसके बाद एक के बाद एक ऐसे खुलासे हुए जिन्होंने संस्थान की साख को तार-तार कर दिया।

कैसे हुई पूरे मामले की शुरुआत?

कोलकाता पुलिस के अनुसार, सफाई अभियान के दौरान शाम करीब 5:50 बजे यह जानकारी प्राप्त हुई। सुरेंद्रनाथ डे कॉलेज और सुरेंद्रनाथ ईवनिंग कॉलेज के प्राचार्यों की उपस्थिति में कॉलेज कर्मचारियों ने परिसर के पिछवाड़े स्थित एक स्टोररूम में ये सूटकेस खोजे। सूचना मिलने पर मुचिपाड़ा थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। कॉलेज के एक अधिकारी ने बताया कि नगर निकाय के निर्देश पर सफाई अभियान चलाया जा रहा था। उन्होंने कहा  “बरसात के मौसम में उस इलाके में पानी जमा होने और मच्छरों के पनपने की समस्या होती है। वह कमरा पुरानी और बेकार सामग्री  जैसे टूटे फर्नीचर, कंप्यूटर, बैनर और फेस्टून  रखने के काम आता है। सफाई के दौरान दो सूटकेस मिले जिनमें क्षतिग्रस्त करेंसी नोट थे। तुरंत पुलिस को सूचित किया गया।”

सिर्फ पैसे नहीं  रिवॉल्वर, शराब की बोतलें और कंडोम भी!

नकद बरामदगी से उपजे विवाद के बीच जब कॉलेज के मुख्य भवन की चौथी मंजिल पर स्थित दो कमरों को खोला गया, तो जो मिला उसने सबको स्तब्ध कर दिया। भाजपा नेताओं का आरोप था कि इन कमरों का इस्तेमाल कॉलेज प्रबंधन समिति के एक सदस्य और उनके बेटे द्वारा किया जा रहा था। जब कॉलेज अधिकारियों ने मंगलवार को इन्हें खुलवाया, तो अंदर एक बिस्तर, एक आलमारी, एक एयर कंडीशनर और एक आधुनिक बाथरूम मिला। इसके बाद छत की ओर जाने वाले टेरेस पर शराब की कई खाली बोतलें बिखरी मिलीं और यूनियन रूम से एक रिवॉल्वर व कंडोम के पैकेट भी बरामद हुए। उल्लेखनीय है कि सुरेंद्रनाथ कॉलेज की छात्र संसद लंबे समय से तृणमूल छात्र परिषद (TMCP) के नियंत्रण में है। जब मंगलवार को दीमक से नष्ट हुए नोट बरामद हुए, उस समय भी यूनियन रूम में ममता बंदोपाध्याय की तस्वीर टंगी हुई थी। इसी वजह से आरोपों की दिशा सीधे TMCP की ओर है।

कितनी बड़ी है रकम? बैंक खातों में भी डेढ़ करोड़!

भाजपा के बारानगर विधायक साजल घोष ने इससे पहले मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर कॉलेज में छात्र यूनियन फंड की कथित हेराफेरी की जांच की मांग की थी। बैंक रिकॉर्ड का हवाला देते हुए उन्होंने दावा किया था कि यूनियन की सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े खातों में 1.5 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा है और सवाल उठाया था कि इतनी बड़ी रकम छात्रों के योगदान मात्र से कैसे जमा हो सकती है। विधायक घोष ने दावा किया कि बरामद नोट भ्रष्टाचार का पैसा है और मांग की कि इसकी उत्पत्ति की विस्तृत जांच हो। उन्होंने सवाल किया कि कॉलेज यूनियन रूम में इतनी बड़ी रकम रह कैसे सकती है।

क्या पूछताछ में आए हैं प्रबंधन समिति के सदस्य?

आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में धांधली के बदले मिला यह पैसा लंबे समय से आलमारी में बंद रहा, जिसे दीमक ने खा लिया। पुलिस अभी सभी लॉकर और कमरों की जांच कर रही है। कॉलेज के टीचर-इन-चार्ज पूर्णेंदु प्रकाश पाल ने कहा कि कमरों का इस इस तरह उपयोग कैसे होने लगा, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।

राजनीतिक घमासान भाजपा बनाम तृणमूल

इस मामले ने राज्य की राजनीति में जबरदस्त उबाल ला दिया है। भाजपा ने इसे बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार के अधीन शैक्षणिक संस्थानों में सत्ता के कथित दुरुपयोग की व्यापक तस्वीर के रूप में पेश किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यह घटना अकेली नहीं है पिछले एक साल में कोलकाता के साउथ कैलकटा लॉ कॉलेज में सामूहिक बलात्कार और आरजी कर मेडिकल कॉलेज कांड के बाद यह तीसरी बड़ी घटना है जिसमें किसी शैक्षणिक संस्थान का नाम आया है। तृणमूल कांग्रेस की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार वे इस मामले को “विपक्षी षड्यंत्र” करार देने की तैयारी में हैं।

140 साल की विरासत पर दाग

1882 में स्थापित और 1884 में राष्ट्रवादी नेता सुरेंद्रनाथ बनर्जी द्वारा विधिवत संगठित किया गया यह कॉलेज, कलकत्ता विश्वविद्यालय से संबद्ध है। NAAC से मान्यता प्राप्त और NIRF में स्थान पाने वाला यह संस्थान पश्चिम बंगाल की शैक्षणिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है। ऐसे संस्थान में इस तरह की बरामदगी ने शिक्षाविदों और आम नागरिकों को समान रूप से स्तब्ध कर दिया है।

आगे क्या?

मुचिपाड़ा थाने की पुलिस मामले की जांच में जुटी है। सुरेंद्रनाथ कॉलेज, सुरेंद्रनाथ लॉ कॉलेज और सुरेंद्रनाथ ईवनिंग कॉलेज के अधिकारी संयुक्त रूप से शिकायत दर्ज कराने की तैयारी में हैं। रिवॉल्वर की बरामदगी के बाद मामले में आर्म्स एक्ट के तहत भी कार्रवाई की संभावना है। सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय एजेंसियां भी इस मामले पर नजर रख रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह महज एक कॉलेज का मामला नहीं है,  यह बंगाल के शैक्षणिक संस्थानों में सत्ताधारी दल की छात्र शाखाओं के कथित वर्चस्व और उसके दुरुपयोग की एक व्यापक समस्या का प्रतीक है। जब तक इस “हिमशैल” के नीचे जो कुछ छिपा है वह पूरी तरह सामने नहीं आता, बंगाल की राजनीति में यह विवाद शांत होता नहीं दिखता।

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