किसानों के सम्मान, न्याय और पुलिस कार्यप्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के दर्जनों कार्यकर्ताओं ने सोमवार को थाना इकोटेक-3 का घेराव कर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। देर दोपहर से शुरू हुए प्रदर्शन में संगठन ने पुलिस अधिकारियों पर अभद्रता और कथित वसूली के गंभीर आरोप लगाए और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की। कुछ घंटों की घटनाचक्र के बाद थानाप्रभारी ने माफी देते हुए कथित वसूली वापस कराई और एसीपी के साथ हुई वार्ता के बाद भाकियू ने धरना स्थगित कर दिया।
प्रदर्शन के पीछे का कारण
प्राप्त जानकारी के अनुसार हबीबपुर गांव निवासी हिमांशु कुमार के साथ 18 जून को मारपीट की घटना हुई थी। पीड़ित की शिकायत पर थाना इकोटेक-3 ने मेडिकल कराकर मुकदमा दर्ज किया था। हालाँकि, आरोप है कि बाद में दूसरे पक्ष के प्रभाव में आकर थाना पुलिस ने लगातार हिमांशु व उनके परिवार पर समझौते का दबाव बनाना शुरू कर दिया, जिससे स्थानीय लोगों और परिजन में रोष पनपा। भाकियू का आरोप है कि 22 जून की शाम थाना बुलाकर हिमांशु को थाने में बैठा लिया गया और जब कुछ लोग उन्हें छुड़ाने पहुंचे तो उन्हें भी थाने में रोका गया। इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मियों द्वारा भाकियू कार्यकर्ताओं के साथ अभद्र व्यवहार और लोगों को छोड़ने के नाम पर धनराशि वसूलने का भी आरोप लगाया गया।
भाकियू का आक्रोश और प्रदर्शन
घटना की सूचना मिलते ही भाकियू के नोएडा जिलाध्यक्ष अशोक भाटी और दादरी जिलाध्यक्ष मनोज मावी बड़े संख्या में किसानों व कार्यकर्ताओं के साथ थाना इकोटेक-3 पहुंचे। देखते ही देखते थाने के बाहर किसानों की भारी भीड़ जमा हो गई और उन्होंने थाने के खिलाफ नारेबाजी करते हुए पुलिस के व्यवहार व भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई। धरने को संबोधित करते हुए अशोक भाटी ने कहा कि भाकियू हमेशा किसानों, मजदूरों और आम नागरिकों के सम्मान की लड़ाई लड़ती रही है और किसी भी किसान के साथ अन्याय होने पर संगठन उनके साथ खड़ा रहेगा। मनोज मावी ने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि किसानों के साथ इसी प्रकार का व्यवहार दोहराया गया तो संगठन व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
पुलिस की प्रतिक्रिया और वार्ता
कई घंटों तक चले प्रदर्शन के बाद थाना प्रभारी अजय कुमार मौके पर पहुंचे और संगठन के पदाधिकारियों से संवाद किया। थाना स्टाफ की ओर से खेद व्यक्त करते हुए आरोपित रूप में ली गई धनराशि वापस कराई गई तथा थाने में बैठाए गए सभी लोगों को सम्मानपूर्वक छोड़ा गया। इसके बाद एसीपी राजीव गुप्ता और भाकियू नेताओं के बीच विस्तृत वार्ता हुई, जिसमें प्रशासन की ओर से जांच कराने और भविष्य में पारदर्शिता बनाए रखने का आश्वासन दिया गया। वार्ता के परिणामस्वरूप भाकियू ने फिलहाल अपना धरना स्थगित कर दिया, पर नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि आश्वासन के पालन में किसी भी चूक की स्थिति में वे फिर आंदोलन करेंगे।
स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की मौजूदगी
धरना-प्रदर्शन में अनिल खारी, संजय फौजी, राजा चौधरी, यादराम नेता, रामपाल नेता, विपिन तंवर, सुन्दर तंवर, मनीत नागर, अमित नागर, मनवीर भाटी, कर्मवीर मावी, नवीन कसाना, अनूप नागर, नीतीश नागर, आजाद चौधरी, बिनोद कुमार, मोहित मावी सहित बड़ी संख्या में किसान और भाकियू कार्यकर्ता मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि वे केवल व्यक्तिगत मामले में न्याय नहीं बल्कि थाने के कामकाज में पारदर्शिता और समान व्यवहार की मांग कर रहे हैं।
आगे की सम्भावनाएँ
भाकियू नेताओं ने प्रशासन को साफ संदेश दे दिया है कि यदि दिए गए आश्वासनों पर अमल न हुआ और किसी भी किसान के साथ अन्याय या अपमान हुआ तो संगठन बड़े स्तर पर आंदोलन करेगा। पुलिस प्रशासन ने कहा है कि मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित की जाएगी और भविष्य में इस तरह की शिकायतों को त्वरित और पारदर्शी तरीके से सुलझाया जाएगा।

