Iran-US tensions: कैपिटल वन ने ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन के खाते मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के बाद बंद किए होने का किया दावा; उधर ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी होने से किया साफ इनकार

Iran-US tensions: कैपिटल वन ने ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन के बैंक खाते मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के बाद बंद करने की बात स्वीकारी, ईरान ने अमेरिका से बातचीत होने से किया इनकार। अमेरिका से इस समय दो बड़ी और अलग-अलग खबरें सुर्खियों में हैं एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारिवारिक कारोबार ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन और बैंकिंग कंपनी कैपिटल वन के बीच अदालती विवाद ने नया मोड़ ले लिया है, तो दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच संभावित बातचीत को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। दोनों घटनाक्रम राष्ट्रपति ट्रंप से सीधे जुड़े हैं और वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बने हुए हैं।

कैपिटल वन का बड़ा खुलासा: मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के बाद बंद किए गए खाते

बैंकिंग कंपनी कैपिटल वन फाइनेंशियल ने शुक्रवार को अदालत में दाखिल एक याचिका में ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन की ओर से दायर मुकदमे को खारिज करने की मांग करते हुए तर्क दिया कि हजारों खातों को बंद करने का फैसला जनवरी 6 के दंगे की प्रतिक्रिया में नहीं बल्कि महीनों चली आंतरिक जांच के आधार पर लिया गया था।यह पहली बार है जब किसी बैंक ने औपचारिक रूप से राष्ट्रपति ट्रंप के पारिवारिक कारोबार से मनी-लॉन्ड्रिंग जैसी चिंताओं को सीधे तौर पर जोड़ा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैपिटल वन ने 2021 में ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन से जुड़े 300 से अधिक बैंक खातों को एक मनी-लॉन्ड्रिंग जांच के बाद बंद कर दिया था, न कि राजनीतिक कारणों से जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया था। कंपनी ने अदालती दस्तावेज़ों में स्पष्ट किया कि यह कदम बैंक की एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग (AML) टीम की महीनों लंबी समीक्षा और नियामक दिशा-निर्देशों के अनुरूप उठाया गया था। हालांकि, कैपिटल वन ने यह स्पष्ट किया है कि उसने ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन पर अवैध मनी-लॉन्ड्रिंग का सीधा आरोप नहीं लगाया है। बैंक का कहना है कि जिन लेन-देन के पैटर्न की पहचान की गई, वे संघीय बैंकिंग दिशा-निर्देशों के तहत सामान्यतः चिह्नित की जाने वाली गतिविधियों में शामिल थे।

यह मामला मार्च 2025 में तब सामने आया जब ट्रंप ऑर्गनाइज़ेशन और राष्ट्रपति के बेटे एरिक ट्रंप ने फ्लोरिडा की एक संघीय अदालत में मुकदमा दायर कर आरोप लगाया था कि उनके खाते जनवरी 6, 2021 के कैपिटल हिल दंगे के बाद बैंक की “वोक” सोच और राजनीतिक माहौल का फायदा उठाने की मंशा से बंद किए गए थे। कैपिटल वन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें भ्रामक और अधूरे तथ्यों पर आधारित बताया है। गौरतलब है कि 2019 में अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप ने कैपिटल वन और ड्यूश बैंक के खिलाफ मुकदमा दायर किया था, ताकि डेमोक्रेटिक सांसदों की जांच के तहत उनके वित्तीय रिकॉर्ड कांग्रेस के साथ साझा होने से रोके जा सकें। उस समय ड्यूश बैंक के एंटी-मनी-लॉन्ड्रिंग विशेषज्ञों ने भी कुछ लेन-देन को संदिग्ध बताया था, हालांकि बैंक ने बाद में इससे इनकार किया था।

ईरान का दावा: अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही

दूसरी बड़ी खबर मध्य-पूर्व से है, जहां ईरान ने सोमवार को स्पष्ट रूप से कहा कि अमेरिका के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं चल रही है और न ही किसी बैठक की कोई योजना है। यह बयान राष्ट्रपति ट्रंप के उस दावे के ठीक उलट है, जिसमें उन्होंने कहा था कि सोमवार दोपहर बातचीत होने वाली है और इसी आधार पर उन्होंने ईरान पर संभावित बड़े हमले टाल दिए। पिछले पांच महीनों में यह पैटर्न कई बार दोहराया गया है ट्रंप बड़े हमलों की घोषणा करते हैं और फिर आखिरी वक्त पर उन्हें रद्द कर देते हैं। रविवार को एयरफोर्स वन पर पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि वे लोगों को मारना नहीं चाहते और अब बातचीत के ज़रिए मामला सुलझाने की कोशिश की जा रही है, हालांकि उन्होंने न तो बातचीत की जगह बताई और न ही इसमें शामिल पक्षों के नाम स्पष्ट किए।

इसके जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने पत्रकारों से कहा कि अमेरिका के साथ इस समय कोई वार्ता नहीं हो रही और न ही आने वाले दिनों में किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल की मेज़बानी या वार्ताकार भेजने की कोई योजना है। एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि ईरान के मुख्य वार्ताकार अराघची कम से कम इस सप्ताह के अंत तक उपलब्ध नहीं रहेंगे। ईरान ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य युद्ध-पूर्व यानी 28 फरवरी से पहले की स्थिति में वापस नहीं लौटेगा। ईरान का कहना है कि वह ओमान के साथ जलडमरूमध्य से सुरक्षित शिपिंग मार्ग को लेकर बातचीत कर रहा है, लेकिन इसे पूरी तरह खोलने को लेकर फिलहाल कोई चर्चा नहीं हो रही।

व्हाइट हाउस के सूत्रों के मुताबिक ट्रंप ने यह हमला सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के अनुरोध पर टाला था, और उनका दावा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर एक समझौता जल्द संभव है। इस बीच, ईरान द्वारा वार्ता से इनकार के बावजूद बाजारों में राहत देखी गई — तनाव कम होने के संकेतों के बीच सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप के दावों और ईरान के खंडन के बीच यह विरोधाभास आने वाले दिनों में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी अनिश्चितता बना हुआ है, और दोनों पक्षों के बीच वास्तविक बातचीत शुरू होने में अभी समय लग सकता है।

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