सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG 2026 को ऑनलाइन मोड में कराने की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने 2026 की NEET-UG परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT/ऑनलाइन) मोड में आयोजित करने की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने मामले को छुट्टियों के बाद सूचीबद्ध करने का फैसला किया है। यह याचिका जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की आंशिक कार्यदिवस वाली बेंच के समक्ष सोमवार को पेश की गई थी। मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बेंच ने याचिका पर तुरंत सुनवाई न करते हुए टिप्पणी की कि NTA परीक्षा को दोबारा आयोजित कर रही है और उन पर काफी दबाव है। जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “हम छुट्टियों के बाद इस पर चर्चा करेंगे।”

पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि

NEET-UG 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित की गई थी, लेकिन पेपर लीक के गंभीर आरोपों के बाद इसे रद्द कर दिया गया। NTA ने छात्रों के हित और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया। CBI जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं। री-एग्जाम की तारीख 21 जून 2026 तय की गई है। इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले ही NTA की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणियां कर चुका है। मई के अंत में हुई सुनवाई में कोर्ट ने कहा था कि NTA 2024 के पेपर लीक से सबक नहीं सीखा। जस्टिस नरसिम्हा ने टिप्पणी की कि UPSC जैसी संस्थाओं से NTA को सीख लेनी चाहिए, जहां कभी पेपर लीक नहीं होता। कोर्ट ने NTA, केंद्र सरकार और CBI से जवाब मांगे थे तथा सुधारों पर हलफनामा दाखिल करने को कहा था। याचिका में क्या मांग? याचिका में NEET को स्थायी रूप से कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) मोड में शिफ्ट करने की मांग की गई थी, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं रोकी जा सकें। याचिकाकर्ताओं ने NTA की जगह अधिक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाने तथा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर दिया। हालांकि, कोर्ट ने इस पर तत्काल सुनवाई नहीं की।

छात्रों पर असर

देशभर के लाखों मेडिकल aspirants इस अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। री-एग्जाम की तैयारी में व्यस्त छात्रों के लिए बार-बार बदलाव और कानूनी प्रक्रिया तनाव बढ़ा रही है। अभिभावक और छात्र संगठन NTA की जवाबदेही तय करने और परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।

NTA का पक्ष: एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर कहा है कि रद्द करने का फैसला छात्र हित में लिया गया। 99.5% परीक्षा केंद्र सरकारी थे और सुरक्षा उपाय किए गए थे, फिर भी लीक हुआ। सुप्रीम कोर्ट इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जुलाई में आगे सुनवाई करने वाला है, जहां NTA सुधारों, Radhakrishnan समिति की सिफारिशों और भविष्य की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तृत चर्चा होने की उम्मीद है। यह घटनाक्रम NEET जैसी राष्ट्रीय परीक्षाओं में पारदर्शिता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने की चुनौती को फिर से उजागर करता है। छात्रों और शिक्षा विशेषज्ञों की नजर अब 21 जून की री-एग्जाम और सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हुई है।

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