शादी में जाते परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़, बिहार से राजस्थान का सफ़र बन गया आख़िरी सफ़र
उत्तर प्रदेश का आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे एक बार फिर मौत का गवाह बना। सोमवार की तड़के सुबह आगरा ज़िले के थाना फतेहाबाद क्षेत्र में एक तेज़ रफ़्तार कार आगे चल रहे भारी कंटेनर ट्रक में पीछे से जा घुसी। इस भीषण और दर्दनाक सड़क हादसे में दो सगे भाइयों समेत तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पाँच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हादसे का पूरा ब्यौरा
यह दर्दनाक घटना आगरा के थाना फतेहाबाद क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक्सप्रेसवे पर तड़के सुबह हुई। जानकारी के अनुसार, कार तेज़ रफ़्तार में एक्सप्रेसवे पर दौड़ रही थी। अचानक चालक का वाहन पर नियंत्रण नहीं रहा और गाड़ी आगे चल रहे भारी कंटेनर ट्रक के पिछले हिस्से में बेहद ज़ोर से जा भिड़ी। टक्कर इतनी भयानक थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह कंटेनर में धँस गया और गाड़ी बुरी तरह चकनाचूर हो गई।
शादी की ख़ुशियाँ मातम में बदलीं
कार में सवार सभी लोग बिहार के निवासी थे और राजस्थान में आयोजित एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। जिस परिवार में शहनाई बजने वाली थी, उसी घर में अब मातम छा गया है। इस हादसे के बाद से शादी वाले घर में खुशियों का माहौल पूरी तरह मातम में बदल गया है।
बचाव कार्य: कटर से काटी गई कार
हादसे की सूचना मिलते ही एक्सप्रेसवे की सुरक्षा टीम और स्थानीय फतेहाबाद थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची। कार की दशा इतनी दयनीय थी कि उसमें फँसे लोगों और शवों को कटर की सहायता से गाड़ी को काटकर बाहर निकाला जा सका। घायलों को तत्काल एम्बुलेंस से उच्च स्तरीय अस्पताल रेफर किया गया।
शव पोस्टमार्टम को भेजे, परिजनों को सूचना
पुलिस ने सभी शवों को कब्ज़े में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मृतकों के परिजनों को इस दुखद घटना की सूचना दे दी गई है। पाँच घायलों की नाज़ुक हालत को देखते हुए उन्हें उच्च स्तरीय मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया है जहाँ उनका उपचार जारी है।
एक्सप्रेसवे बनता जा रहा है ‘मौत का राजमार्ग’
गौरतलब है कि यह अकेला हादसा नहीं है। पिछले कुछ हफ्तों में इसी एक्सप्रेसवे पर कई बड़े हादसे हो चुके हैं। 22 मई को फिरोजाबाद के मतसेना थाना क्षेत्र में कानपुर से गुड़गाँव जा रही एक प्राइवेट स्लीपर बस टैंकर से टकरा गई और बस में आग लग गई, जिसमें ड्राइवर और कंडक्टर की मौत हो गई तथा 15 से 20 यात्री घायल हुए। इससे कुछ ही दिन बाद उन्नाव में लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे पर एक डबल डेकर बस पलटने से छह यात्रियों की मौत हो गई और 19 लोग घायल हुए।
विशेषज्ञों की राय: लापरवाही और अति-गति है मुख्य कारण
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे पर वाहन चालक अत्यधिक गति में सफ़र करते हैं और भारी वाहनों के पीछे सुरक्षित दूरी नहीं बनाए रखते। रात और तड़के सुबह के सफ़र में नींद और थकान भी बड़े हादसों की वजह बनती है। ऐसे मामलों में पुलिस जाँच शुरू कर देती है, लेकिन हादसों का सिलसिला थम नहीं रहा।
प्रशासन से उठ रहे हैं सवाल
लगातार हो रहे हादसों के बाद जनता और सामाजिक संगठनों में आक्रोश है। लोगों की माँग है कि एक्सप्रेसवे पर स्पीड कैमरे और रेडार को और सक्रिय किया जाए, भारी वाहनों के पिछले हिस्से पर रिफ्लेक्टर अनिवार्य किए जाएँ तथा रात में गश्त बढ़ाई जाए।

