ग्रेटर नोएडा। गामा स्थित फेलिक्स हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल प्रेग्नेंसी केस में सूझबूझ और कुशलता का परिचय देते हुए मां और नवजात शिशु दोनों की जान बचाने में सफलता हासिल की है। यह केस इसलिए असाधारण था क्योंकि गर्भवती महिला एक साथ कई गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं से ग्रस्त थी। इस उपलब्धि के बाद अस्पताल की पूरी टीम की व्यापक सराहना हो रही है।
पति ने सुनाई पत्नी के संघर्ष की दास्तान
मरीज के पति जीन थियरी अजाफ ने बताया कि उनकी पत्नी एनी की गर्भावस्था शुरुआत से ही गंभीर जटिलताओं से घिरी हुई थी। महिला हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से पीड़ित थी, लिवर ठीक से काम नहीं कर रहा था और उसके साथ एनीमिया सहित कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी मौजूद थीं। जब उन्हें फेलिक्स हॉस्पिटल लाया गया तो हालत पहले से ही नाजुक थी।
चार मोर्चों पर एक साथ लड़नी थी जंग
आॅपरेशन से पहले की तैयारी — हर पहलू पर नजर
डॉ. दानिश और डॉ. अनुराधा की टीम ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बिना देर किए सिजेरियन आॅपरेशन का निर्णय लिया। लेकिन इससे पहले मरीज को यथासंभव स्थिर करने के लिए सभी आवश्यक जांचें कराई गईं —
जांच — 1
लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) — लिवर की मौजूदा कार्यक्षमता का आकलन
जांच — 2
हीमोग्लोबिन स्तर — एनीमिया की गंभीरता को परखना
जांच — 3
बिलीरुबिन स्तर — पीलिया की तीव्रता का सटीक माप
जांच — 4
HBsAg स्थिति — नवजात को संक्रमण से बचाने की रणनीति तय करना
सभी जांचों के आधार पर मरीज को जितना संभव हो सका स्थिर किया गया और फिर पूरी सावधानी के साथ सिजेरियन आॅपरेशन किया गया। टीम की एकजुटता और त्वरित निर्णय क्षमता ने इस जटिल केस में जीत दिलाई।

