लखनऊ क्राइम न्यूज़: 24 साल का इंतजार खत्म, नोएडा पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता के हत्यारे दोषी करार, मिली उम्रकैद

लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में सीबीआई कोर्ट का बड़ा फैसला, शूटर विक्रम यादव समेत तीन को आजीवन कारावास व जुर्माना

लखनऊ क्राइम न्यूज़: करीब 24 साल पुराने बहुचर्चित इंद्रदेव सिंह हत्याकांड में सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को अपना अंतिम फैसला सुना दिया। लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष और नोएडा (गौतमबुद्ध नगर) की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पिता, वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की हत्या के मामले में विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा की अदालत ने तीन दोषियों शूटर विक्रम यादव उर्फ कालिया, उसके साथी पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने तीनों दोषियों पर कुल डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। 

30 जून को ठहराया गया था दोषी अदालत ने इससे पहले 30 जून को तीनों आरोपियों को हत्या (धारा 302) और आपराधिक साजिश (धारा 120-बी) का दोषी करार दिया था और सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तारीख तय की थी। दोष सिद्ध होने के तुरंत बाद जमानत पर चल रहे पन्ना सिंह और बृजेश यादव की जमानत रद्द कर उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था, जबकि विक्रम यादव पहले से ही जेल में बंद था। कैसे हुई थी वारदात यह मामला 8 अगस्त 2002 का है, जब लखनऊ में डीएम कार्यालय के पीछे मौजूद गली में इंद्रदेव सिंह की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के वक्त वे स्कूटर से घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आए स्कूटर सवार बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली उनकी गर्दन में लगी और वह मौके पर ही गिर पड़े, बाद में उनकी मौत हो गई। इस घटना ने उस समय पूरे प्रदेश में सनसनी फैला दी थी। हत्या के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने कैसरबाग थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।

सीबीआई जांच में सामने आए कई नाम मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच सीबीआई को सौंपी गई, जिसने 2004 में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया। जांच में सामने आया कि बृजेश यादव स्कूटर चला रहा था, जबकि पीछे बैठे विक्रम यादव उर्फ कालिया ने इंद्रदेव सिंह पर गोली चलाई थी। शुरुआती एफआईआर में सुरजन लाल वर्मा, सुषमा वर्मा और सुरेश वर्मा जैसे कुछ अन्य नाम भी शामिल थे, लेकिन जांच में उनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य न मिलने से वे बरी हो गए। मामले के तीन अन्य कथित साजिशकर्ता  मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता और छोटेलाल उर्फ छोटू की ट्रायल के दौरान ही मृत्यु हो गई, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी गई थी।

भावुक हुईं पत्नी नयनतारा फैसला सुनाए जाने के दौरान अदालत में मौजूद इंद्रदेव सिंह की पत्नी नयनतारा भावुक हो गईं। सुनवाई के दौरान विशेष लोक अभियोजक के.पी. सिंह ने सीबीआई पक्ष की ओर से साक्ष्य प्रस्तुत किए। गौरतलब है कि इंद्रदेव सिंह सरोजनीनगर विधायक राजेश्वर सिंह के ससुर भी थे। करीब ढाई दशक की लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को लखनऊ के सबसे चर्चित हत्याकांडों में न्याय की दिशा में एक अहम पड़ाव माना जा रहा है।

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