Vande Mataram controversy: वाराणसी, स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब उत्तर प्रदेश के वाराणसी तक पहुंच गया है। कथित अपमान के विरोध में भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) के कार्यकर्ताओं ने मैदागिन स्थित कांग्रेस कार्यालय के बाहर मशाल जुलूस और प्रदर्शन किया। इसी दौरान भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल उस समय असहज स्थिति में घिर गए, जब कांग्रेस कार्यकर्ताओं और मौके पर मौजूद लोगों ने उनसे खुद ‘वंदे मातरम’ पूरा गाने को कहा।
वाराणसी में प्रदर्शन और दोनों पक्षों के आमने-सामने आने की खबर कई स्थानीय रिपोर्टों में सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, भाजयुमो के 100 से अधिक कार्यकर्ता मशाल लेकर कांग्रेस कार्यालय के बाहर पहुंचे और सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ का गायन किया। इसके बाद कांग्रेस नेताओं के खिलाफ नारेबाजी की गई।
दिल्ली से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 15 अगस्त 2026 को नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह से हुई। ध्वजारोहण कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाए जाने पर भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से इसे रोकने का संकेत दिया गया।
भाजपा ने इस घटनाक्रम को राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से माफी की मांग की। कुछ भाजपा नेताओं ने वायरल वीडियो के आधार पर यह दावा भी किया कि कांग्रेस नेताओं ने पूरा ‘वंदे मातरम’ गाए जाने पर आपत्ति जताई। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज किया। पार्टी नेता जयराम रमेश ने सफाई देते हुए कहा कि सोनिया गांधी का इशारा गीत रुकवाने के लिए नहीं था, बल्कि वह लंबे समय से खड़े मल्लिकार्जुन खरगे के लिए कुर्सी लाने की बात कर रही थीं। कांग्रेस का कहना है कि कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ पूरा गाया गया और किसी ने इसे बीच में नहीं रोका।
वाराणसी में मशाल जुलूस
भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया। इसी क्रम में वाराणसी में भाजयुमो कार्यकर्ताओं ने मशाल जुलूस निकाला। जुलूस का मार्ग मैदागिन स्थित कांग्रेस कार्यालय के सामने से तय था, लेकिन कार्यालय के पास पहुंचते ही दोनों पक्षों के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए और नारेबाजी शुरू हो गई। कुछ रिपोर्टों में बहस, अभद्र भाषा और धक्का-मुक्की की स्थिति बनने का भी उल्लेख है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों को अलग किया और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भाजयुमो कार्यकर्ताओं पर अभद्र भाषा के इस्तेमाल तथा पानी और पत्थर फेंके जाने का आरोप लगाया है। इन आरोपों की पुलिस या प्रशासन की ओर से स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
रजत जायसवाल से गाने की मांग
प्रदर्शन के दौरान जब भाजपा युवा मोर्चा के महानगर अध्यक्ष रजत जायसवाल से ‘वंदे मातरम’ सुनाने या इसे पूरा गाने को कहा गया, तो वह कथित तौर पर गीत शुरू नहीं कर पाए। वायरल वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने गाने के बजाय कांग्रेस कार्यकर्ताओं को ही चुनौती देना शुरू कर दिया।
वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है। इसलिए यह निश्चित रूप से कहना उचित नहीं होगा कि रजत जायसवाल जानबूझकर गीत नहीं गा पाए या मौके की नारेबाजी और तनावपूर्ण माहौल के कारण ऐसा हुआ। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, स्थिति बिगड़ती देख वह अपने समर्थकों के साथ वहां से लौट गए।
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भाजपा नेता को लेकर तरह-तरह की टिप्पणियां की जा रही हैं। कांग्रेस समर्थकों ने इसे भाजपा की ‘दोहरे मापदंड वाली राजनीति’ बताया, जबकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि प्रदर्शन का मूल मुद्दा कांग्रेस मुख्यालय में कथित तौर पर ‘वंदे मातरम’ के अपमान का है।
कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने
कांग्रेस ने वाराणसी की घटना को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि भाजपा राष्ट्रभक्ति जैसे संवेदनशील विषय को चुनावी और दलगत राजनीति का मुद्दा बना रही है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि तिरंगा, राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किसी एक राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं हैं। वहीं भाजपा का कहना है कि ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा राष्ट्रगीत है। पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करने और कथित अपमान के लिए माफी मांगने की मांग दोहराई है। वाराणसी के अलावा अयोध्या, जौनपुर, शाहजहांपुर और अन्य जिलों में भी भाजपा कार्यकर्ताओं द्वारा मशाल जुलूस और विरोध प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं।
जांच और तथ्य की जरूरत
इस पूरे विवाद में दो अलग-अलग घटनाएं चर्चा में हैं—पहली, दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के कार्यक्रम का वायरल वीडियो और उस पर भाजपा-कांग्रेस के आरोप-प्रत्यारोप; दूसरी, वाराणसी में प्रदर्शन के दौरान दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच हुआ टकराव और रजत जायसवाल से जुड़ा वायरल वीडियो।
किसी भी वायरल वीडियो को अंतिम प्रमाण मानने से पहले उसका पूरा संदर्भ, रिकॉर्डिंग का मूल स्रोत और संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान सामने आना जरूरी है। उपलब्ध रिपोर्टों में वाराणसी की घटना के बाद पुलिस की भूमिका और शिकायतों का उल्लेख है, लेकिन मामले में प्राथमिकी या जांच की अंतिम स्थिति की स्पष्ट आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रगीत को लेकर छिड़ी यह बहस अब सड़क पर प्रदर्शन, नारेबाजी और सोशल मीडिया वीडियो तक पहुंच चुकी है। ऐसे में प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ दोनों पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की चुनौती भी है।

