JPSC Exam Canceled: छात्रों के आंदोलन के आगे झुकी हेमंत सोरेन सरकार, 14वीं JPSC रद्द, CID जांच के आदेश

JPSC Exam Canceled: रांची में परीक्षा अनियमितताओं को लेकर पिछले 18 दिनों से चल रहे छात्र आंदोलन के आगे आखिरकार हेमंत सोरेन सरकार को झुकना पड़ा है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया। हालांकि JSSC-CGL परीक्षा को लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है और छात्रों की मांग पर सस्पेंस बना हुआ है।

सरकार ने इसके साथ ही टीडीपीएल (TDPL) द्वारा आयोजित सभी परीक्षाओं के साथ-साथ JSSC-CGL से जुड़ी अनियमितताओं की जांच राज्य की जांच एजेंसी CID को सौंपने का निर्णय लिया है और इसके लिए 90 दिन की समयसीमा तय की गई है। सरकार की ओर से यह भी संकेत दिया गया है कि यदि जरूरत पड़ी तो केंद्रीय एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) से भी जांच के लिए संपर्क किया जा सकता है। JSSC-CGL को लेकर सरकार का रुख अब भी सतर्कता भरा है। अधिकारियों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में इस परीक्षा के परिणाम पहले ही जारी किए जा चुके हैं और कई अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र भी सौंपे जा चुके हैं, इसलिए इसे रद्द करने में कानूनी पेचीदगियां सामने आ रही हैं। यही वजह है कि आंदोलनरत छात्र अब भी CGL परीक्षा पर ठोस कार्रवाई और पूरे मामले की CBI जांच की मांग पर अड़े हुए हैं।

वहीं दूसरी ओर, जिन अभ्यर्थियों ने JSSC-CGL और JPSC परीक्षा सफलतापूर्वक पास कर ली थी, वे भी बड़ी संख्या में प्रोजेक्ट भवन पहुंचकर परीक्षा रद्द न करने की अपील कर चुके हैं। उनका कहना है कि आंदोलन के दबाव में परीक्षा रद्द होने से उनका भविष्य प्रभावित होगा। आंदोलन के दौरान जांच एजेंसियां भी सक्रिय रहीं। CID की एक टीम JSSC कार्यालय पहुंची थी और सचिव सुधीर गुप्ता से पूछताछ करते हुए परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई थी। इससे पहले सुधीर गुप्ता के आवास पर भी छापेमारी हो चुकी है। इसके अलावा JPSC की तत्कालीन सदस्य डॉ. अजीता भट्टाचार्य के निजी सहायक को भी गिरफ्तार किया गया था।

इस पूरे विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर उनसे व्यक्तिगत रूप से आंदोलनरत छात्रों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करने की अपील की थी, ताकि छात्रों की चिंताओं को दूर करने की सरकार की प्रतिबद्धता मजबूत हो सके। इस पत्र पर भाजपा नेता अमित मालवीय ने पलटवार करते हुए कहा था कि यह पत्र नसीहत देने वाला और अपमानजनक है, और सवाल उठाया कि यदि राहुल गांधी वाकई चिंतित थे तो वे खुद रांची जाकर छात्रों से क्यों नहीं मिले। 15 दिनों तक अनशन पर बैठे छात्र नेता देवेंद्रनाथ महतो सहित आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अन्य छात्र नेताओं ने कहा है कि यदि CBI जांच होती है तो सरकार में कई लोगों की भूमिका उजागर हो सकती है, इसी वजह से जांच से बचने की कोशिश हो रही है। छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक शांतिपूर्ण संघर्ष जारी रहेगा। फिलहाल राज्य सरकार की ओर से प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के संकेत भी दिए गए हैं, लेकिन JSSC-CGL पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

यह भी पढ़ें: BJP’s new team: स्मृति-राम माधव की वापसी, अमित मालवीय बाहर

यहां से शेयर करें