लखनऊ/नोएडा। नोएडा प्राधिकरण के करीब 3,800 करोड़ रुपये के लीजबैक घोटाले में उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की है। शासन ने नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन सचिव हरीश चंद्र को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। नियुक्ति विभाग ने सोमवार को उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। प्रमुख सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक एम. देवराज के आदेश के अनुसार यह कार्रवाई विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही में सिद्ध आरोपों, लोक सेवा आयोग प्रयागराज की सहमति और इलाहाबाद हाईकोर्ट लखनऊ खंडपीठ के 3 सितंबर 2026 के आदेश के आधार पर की गई है।
हरीश चंद्र वर्तमान में खाद्य एवं रसद विभाग में स्थानिक प्रतिनिधि के पद पर कोलकाता में तैनात थे। उन पर नोएडा प्राधिकरण में तैनाती के दौरान प्राधिकरण की अर्जित और कब्जा प्राप्त जमीन को नियमों को दरकिनार कर लीजबैक कराने का आरोप है।
क्या है पूरा मामला?
विभागीय जांच में ग्राम शहदरा के सेक्टर-140ए, 141, 142 और 143 के आसपास एक्सप्रेसवे से सटे इलाके में करीब 3 लाख 81 हजार 527 वर्गमीटर जमीन की नियम विरुद्ध लीजबैक किए जाने की बात सामने आई। इस जमीन की बाजार कीमत जांच में करीब 3,800 करोड़ रुपये आंकी गई थी। कुछ रिपोर्टों में यह आंकड़ा करीब 4,000 करोड़ रुपये भी बताया गया है।
मामला वर्ष 2011 का है। नियमों के मुताबिक लीजबैक की सुविधा गांव के किसानों के लिए थी और एक परिवार के नाम अधिकतम 450 वर्गमीटर जमीन लीजबैक किए जाने का प्रावधान था। आरोप है कि इन नियमों का उल्लंघन कर गांव के गैर-निवासी लोगों और तीन निजी कंपनियों के नाम 175 वर्गमीटर से लेकर 15,340 वर्गमीटर तक के बड़े भूखंड लीजबैक कर दिए गए। जांच में यह भी सामने आया कि समिति को भ्रामक आख्या प्रस्तुत कर जमीन भू-माफिया से साठगांठ कर आवंटित की गई। सरकार ने मामले की जांच नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी को सौंपी थी। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी गई, जिसमें हरीश चंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद शासन ने उनकी सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की।
अन्य कार्रवाइयां और पिछला रिकॉर्ड
लीजबैक मामले में कार्रवाई के दौरान तत्कालीन प्राधिकरण के नायब तहसीलदार मनोज कुमार को कार्यमुक्त किया गया था। तत्कालीन विशेष कार्याधिकारी (लैंड) अजय श्रीवास्तव और सचिव हरीश चंद्र के खिलाफ निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति भी की गई थी।
हरीश चंद्र वर्ष 2018 में भी निलंबित हो चुके हैं। उस समय वह मुजफ्फरनगर के एडीएम थे। उन पर रिटायर्ड कर्नल वीएस चौहान को एक मामले में जेल भेजने के लिए पुलिस पर दबाव बनाने के आरोप लगे थे। बाद में कर्नल की शिकायत पर हरीश चंद्र, उनकी पत्नी और बेटे समेत सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। यह कार्रवाई योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्ती का एक और उदाहरण मानी जा रही है। शासन स्तर पर नुकसान की भरपाई के लिए दोषियों की संपत्ति जब्त करने जैसे कदम भी पहले से चर्चा में रहे हैं।

