मुंबई, टाटा ग्रुप के प्रमुख होल्डिंग कंपनी टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड (टीएसपीएल) को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टिंग से बचाने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को एक रणनीतिक पुनर्गठन का प्रस्ताव रखा है। ट्रस्ट्स, जिनके पास टाटा संस में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है, ने कंपनी के बोर्ड को टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (टीईएसएस) और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) का टाटा संस में विलय करने का सुझाव दिया है।
इस कदम का मकसद टाटा संस को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) और कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (सीआईसी) के नियामकीय दायरे से बाहर निकालना है। आरबीआई ने हाल ही में टाटा संस के सीआईसी रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने के आवेदन को खारिज कर दिया था और लिस्टिंग के निर्देश दिए थे। इसके बाद 17 सितंबर को टाटा संस बोर्ड ने लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया था, जबकि टाटा ट्रस्ट्स लगातार अनलिस्टेड रहने पर जोर देते रहे हैं।
प्रस्ताव की मुख्य बातें
टाटा ट्रस्ट्स के अनुसार, विलय के बाद नई इकाई 31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर, ऑपरेटिंग रेवेन्यू लगभग 1,05,043 करोड़ रुपये का होगा। वित्तीय परिसंपत्तियों से आय 40,072 करोड़ रुपये रहेगी। कुल आय में ऑपरेटिंग रेवेन्यू का हिस्सा 64.3 प्रतिशत होगा। इससे कंपनी एनबीएफसी के ‘प्रिंसिपल बिजनेस क्राइटेरिया’ को पूरा नहीं करेगी। साथ ही, कुल नेट एसेट्स 2,00,158 करोड़ रुपये होंगे, जिनमें ग्रुप कंपनियों में निवेश 1,77,120 करोड़ रुपये (90 प्रतिशत से कम) रहेगा। इससे सीआईसी की शर्तें भी पूरी नहीं होंगी।
ट्रस्ट्स ने कहा कि यह कोई नया रास्ता नहीं है। टाटा संस ने अपने लगभग 100 साल के इतिहास में से करीब 80 साल तक ऑपरेटिंग बिजनेस और रेवेन्यू के साथ काम किया है, जिससे नए उद्यमों को फंडिंग मिलती रही। इस पुनर्गठन से कंपनी फिर से ऑपरेटिंग मॉडल पर लौटेगी, जबकि होल्डिंग कंपनी की भूमिका बनी रहेगी।
आरबीआई की मंजूरी जरूरी
प्रस्तावित विलय आरबीआई के नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनीज – वॉलंटरी अमलगमेशन डायरेक्शंस, 2025 के तहत होगा। इसके लिए आरबीआई से पूर्व नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य है। विलय के बाद टाटा संस सीआईसी नहीं रहेगी, इसलिए उसे अपना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी सरेंडर करना होगा। टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वे टाटा संस के साथ मिलकर आरबीआई से इस पूरे प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे।
यह प्रस्ताव जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट के बोर्डों द्वारा पारित सर्वसम्मत प्रस्तावों के अनुरूप है, जिनमें टाटा संस को अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी बनाए रखने पर जोर दिया गया था। पहले मार्च 2024 में भी स्वर्गीय रतन टाटा के मार्गदर्शन में बोर्ड ने अनलिस्टेड रहने का फैसला लिया था।
पृष्ठभूमि और आगे की राह
आरबीआई ने सितंबर 2022 में टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया था, जिसके तहत लिस्टिंग की समय-सीमा थी। कंपनी ने कर्ज चुकाकर रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की कोशिश की, लेकिन आरबीआई ने इसे खारिज कर दिया। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने पहले भी सभी विकल्पों की जांच करने और ‘टाटा मॉडल’ को बचाने की बात कही थी। अब टाटा संस बोर्ड इस प्रस्ताव पर विचार करेगा। अगर मंजूरी मिल गई और आरबीआई हरी झंडी दिखा देता है, तो टाटा संस निजी कंपनी बनी रह सकती है और लिस्टिंग से बच सकती है। यह विकासशील खबर है और आगे के अपडेट का इंतजार है।
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