नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (NIA) से कमर्शियल फ्लाइट ऑपरेशन 15 जून 2026 से शुरू होंगे। इस घोषणा के साथ ही नेशनल कैपिटल रीजन और पूरे उत्तर भारत के यात्रियों, एयरलाइनों और कार्गो ऑपरेटरों के लिए एक नया हवाई गेटवे खुलने जा रहा है। यह एयरपोर्ट IATA कोड DXN के तहत संचालित होगा।
PM के उद्घाटन के बाद मिली सभी मंजूरियां
माननीय प्रधानमंत्री द्वारा एयरपोर्ट का उद्घाटन होने के बाद ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी (BCAS) ने एयरोड्रोम सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) के लिए हरी झंडी दे दी है। इस मंजूरी से यह स्पष्ट हो गया है कि एयरपोर्ट का सुरक्षा ढांचा, सिस्टम और ऑपरेटिंग प्रक्रियाएं सभी नियामक आवश्यकताओं के अनुरूप हैं।
IndiGo पहली, फिर Akasa Air और Air India Express
इंडिगो नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से पहली कमर्शियल फ्लाइट ऑपरेट करेगी। इसके तुरंत बाद अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस भी अपनी सेवाएं शुरू करेंगी। शेड्यूल, डेस्टिनेशन और अन्य विस्तृत जानकारी एयरलाइनों द्वारा सही समय पर साझा की जाएगी।
12 मिलियन से 70 मिलियन यात्रियों की क्षमता का लक्ष्य
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (YIAPL) द्वारा विकसित किया गया है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG की 100% सहायक कंपनी है। यह उत्तर प्रदेश सरकार और भारत सरकार के साथ पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत संचालित है। कंसेशन पीरियड 1 अक्टूबर 2021 से शुरू होकर 40 साल तक चलेगा।
फिलहाल एयरपोर्ट में एक रनवे और एक पैसेंजर टर्मिनल है, जिसकी सालाना क्षमता 1 करोड़ 20 लाख (12 मिलियन) यात्रियों की है। भविष्य के मास्टरप्लान के तहत इसे 7 करोड़ (70 मिलियन) से अधिक यात्रियों की सेवा के लिए विकसित किया जाएगा।
स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का संगम
यह एयरपोर्ट दिल्ली के बड़े इलाके और पश्चिमी उत्तर प्रदेश को देश-विदेश के शहरों से जोड़ेगा। इसे स्विस एफिशिएंसी और भारतीय मेहमाननवाजी के अनूठे संगम के साथ डिजाइन किया गया है। साथ ही यह एयरपोर्ट नेट ज़ीरो एमिशन के लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध है और सस्टेनेबल डिजाइन व ऑपरेशन के सिद्धांतों पर आधारित है।
क्षेत्रीय विकास को मिलेगी रफ्तार
इस एयरपोर्ट के शुरू होने से नोएडा, ग्रेटर नोएडा और आसपास के इलाकों में पर्यटन, व्यापार और निवेश के नए अवसर खुलेंगे। मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के साथ यह एयरपोर्ट दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते यात्री दबाव को कम करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।

