मुज़फ्फरनगर ‘लव जिहाद’ का कहर: छोले-भटूरे खा रहे युवक-युवती को घेरकर पीटा, ‘लव जिहाद’ का आरोप निकला झूठा

मुज़फ्फरनगर ‘लव जिहाद’ का कहर: मुज़फ्फरनगर। उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर ज़िले के सिविल लाइंस थाना क्षेत्र स्थित व्यस्त जिला परिषद मार्केट में रविवार दोपहर उस वक्त भारी हंगामा खड़ा हो गया, जब एक मुस्लिम युवक और उसकी हिंदू महिला मित्र को भीड़ ने घेरकर बुरी तरह पीटा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही मामले ने तूल पकड़ लिया और पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।

क्या है पूरा मामला

पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, शामली ज़िले की रहने वाली एक युवती अपने मित्र मेहताब (पुत्र अमीर अहमद) के साथ रविवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे दवाइयां खरीदने जिला परिषद मार्केट पहुंची थी। इसी दौरान दोनों एक दुकान पर छोले-भटूरे खाने बैठ गए। तभी कुछ लोग वहां आए और दोनों से उनकी पहचान पूछने लगे। आरोप है कि पहचान बताने के बाद मौजूद लोगों ने मेहताब के साथ मारपीट शुरू कर दी। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवती लगातार अपने मित्र को बचाने की कोशिश कर रही है, लेकिन भीड़ ने उसे भी धक्का-मुक्की और छेड़छाड़ का शिकार बनाया। घटनास्थल पर देखते ही देखते सैकड़ों लोग जमा हो गए।

‘लव जिहाद’ के आरोप की हकीकत

स्थानीय संगठन क्रांति सेना के ज़िलाध्यक्ष लोकेश सैनी ने पुलिस को तहरीर देकर आरोप लगाया कि यह मामला ‘लव जिहाद’ को बढ़ावा देने का है, जिसमें युवक हिंदू नाम बताकर हिंदू युवतियों को गुमराह कर रहे हैं। हालांकि पुलिस जांच में यह आरोप निराधार साबित हुआ पता चला कि युवती अपने मित्र मेहताब के साथ केवल अपनी मां की दवाई लेने आई थी, और दोनों के बीच कोई प्रेम-प्रसंग या धोखाधड़ी का मामला नहीं था। घटना में नामज़द युवक ने अपनी सफाई में कहा कि उसने कोई मारपीट नहीं की, बल्कि झूठा नाम बताए जाने पर सिर्फ सवाल किया था, और भीड़ में से किसने हाथ उठाया, इसकी उसे जानकारी नहीं है।

पुलिस कार्रवाई: हमलावरों पर दर्ज हुआ केस

घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने युवती की शिकायत पर गौरव शर्मा, कुशलवीर, शुभम, प्रशांत शर्मा और लोकेश सैनी समेत करीब 10-12 अज्ञात लोगों के खिलाफ छेड़खानी, मारपीट और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया है। यानी इस मामले में पीड़ित नहीं, बल्कि हमलावर आरोपी बनाए गए हैं जो भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की घटनाओं में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। पुलिस ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है।

बड़ा सवाल: क्या भीड़ बन रही है कानून से ऊपर?

यह घटना एक बार फिर उस चिंताजनक प्रवृत्ति को उजागर करती है, जिसमें बिना किसी ठोस सबूत के महज शक के आधार पर भीड़ कानून अपने हाथ में ले लेती है। सार्वजनिक स्थानों पर किसी जोड़े को देखकर पहचान पूछना, आरोप मढ़ना और सरेआम मारपीट करना यह न सिर्फ कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और निजता पर भी सवाल खड़ा करता है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर सख्त और त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी संगठन या समूह खुद को कानून और अदालत से ऊपर समझने की गलती न करे। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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