युवराज मेहता मौत: नोएडा। सेक्टर 150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की दर्दनाक मौत के मामले को अब करीब 6 महीने बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को अब भी न्याय का इंतजार है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) की जांच पूरी हुए महीनों बीत गए, फिर भी युवराज के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।
क्या था पूरा मामला
16 जनवरी 2026 की रात घने कोहरे के बीच युवराज मेहता की कार नोएडा सेक्टर-150 में एक निर्माणाधीन कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी थी। हादसे की जगह पर न कोई चेतावनी बोर्ड था, न बैरिकेडिंग और न ही रात में दिखने वाली कोई रिफ्लेक्टर लाइट। घंटों तक मदद की गुहार लगाने और पिता को फोन पर स्थिति बताने के बावजूद समय पर रेस्क्यू नहीं पहुंच सका, और आखिरकार युवराज की जान चली गई। इस घटना ने पूरे प्रशासनिक तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया था।
पिता का दर्द: सस्पेंशन वापस, बिल्डर जमानत पर बाहर
पीड़ित के पिता राजकुमार मेहता का कहना है कि मामले में शुरू में जो दो अधिकारी निलंबित किए गए थे, बाद में उनका निलंबन वापस ले लिया गया। इसके अलावा गिरफ्तार हुए बिल्डर भी अब जमानत पर बाहर आ चुके हैं। पिता ने निराशा जताते हुए कहा कि SIT की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे पूरा मामला अनिश्चितता में लटका हुआ नजर आ रहा है। गौरतलब है कि जांच के दौरान सामने आई एक रिपोर्ट में पुलिस कंट्रोल रूम के तीन कर्मियों को दोषी मानते हुए निलंबित किया गया था, जबकि नोएडा अथॉरिटी, फायर ब्रिगेड और NDRF को क्लीन चिट दे दी गई थी। परिजनों और स्थानीय लोगों का मानना रहा है कि असली जिम्मेदार माने जाने वाली अथॉरिटी को बचा लिया गया, जिससे न्याय की उम्मीदों को गहरा झटका लगा।
पिता की मांग: रिपोर्ट सार्वजनिक हो, सख्त कार्रवाई हो
युवराज के पिता ने उत्तर प्रदेश सरकार से अपील की है कि SIT की पूरी रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए और जिम्मेदार अधिकारियों व एजेंसियों पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। उनका मानना है कि प्रशासन तभी सक्रिय होता है जब कोई बड़ी घटना हो जाती है या किसी की जान चली जाती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि उनके बेटे की मौत के बाद ही उस स्थान पर सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल बनाई गई — अगर यह पहले हो गया होता, तो शायद युवराज की जान बचाई जा सकती थी।
आर्यन की मौत ने फिर खोली सिस्टम की पोल
हाल ही में नोएडा सेक्टर-58 में एक और युवा इंजीनियर, आर्यन की मौत ने शहर की जर्जर व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के मुताबिक भारी बारिश के दौरान जलभराव वाली सड़क पर चलते समय पास के बिजली के खंभे से करंट फैल गया, जिसकी चपेट में आकर आर्यन का संतुलन बिगड़ गया और वह पास के खुले नाले में जा गिरा। बिजली आपूर्ति बंद कराए जाने के बाद उसे बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मानसून से पहले नालों की सफाई और खुले गड्ढों को ढकने के दावे केवल कागजों तक सीमित रहे। युवराज के पिता ने आर्यन की मौत पर भी गहरी चिंता जताई और कहा कि प्रशासन को हादसों के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से ही एहतियाती कदम उठाने चाहिए, ताकि किसी और परिवार को इस तरह के दर्द से न गुजरना पड़े।
निष्कर्ष
छह महीने बीत जाने के बावजूद युवराज मेहता के परिवार को न्याय का इंतजार है। पिता राजकुमार मेहता चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश सरकार SIT रिपोर्ट सार्वजनिक कर जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जाए और नोएडा जैसे शहरों में बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाओं की अनदेखी दोबारा किसी की जान न ले।

