टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स को राहत: तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने Apple के iPhone पुर्जे बनाने वाले होसूर संयंत्र की जाँच बंद की

भूजल प्रदूषण के आरोपों के बाद बंद होने का था ख़तरा, अब कंपनी को मिली क्लीन चिट

Apple के iPhone की आपूर्ति शृंखला के लिए एक बड़ी राहत की ख़बर आई है। Apple की भारतीय आपूर्तिकर्ता कंपनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने मंगलवार को कहा कि तमिलनाडु राज्य के प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी के iPhone कलपुर्जों वाले संयंत्र की जाँच बंद कर दी है, क्योंकि कंपनी ने प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं को संतोषजनक ढंग से दूर कर लिया है।

क्या था पूरा मामला?

टाटा के जिस संयंत्र की जाँच हो रही थी, वह दक्षिणी तमिलनाडु के होसूर शहर में स्थित है और iPhone के बैक पैनल तथा अन्य पुर्जे बनाता है। संयंत्र के पास स्थित कृषि भूमि के मालिकों ने महीनों से तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को शिकायत दी थी कि कारखाने से निकला अपशिष्ट जल (वेस्टवॉटर) उनकी ज़मीन और खुले कुओं को दूषित कर रहा है। इन शिकायतों के आधार पर दिसंबर 2025 से मई 2026 के बीच पाँच बार राज्य निरीक्षण हुए। इन निरीक्षणों में पाया गया कि टाटा ने अपने संयंत्र के भीतर बने वर्षा जल संग्रह तालाब में अपशिष्ट जल छोड़ा था और यह तालाब उफन कर पड़ोसी कृषि भूमि के खुले कुओं के भूजल को दूषित करने का कारण बना। तमिलनाडु राज्य के प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण ने टाटा को चेतावनी दी थी कि जब तक वह इस सरकारी निष्कर्ष का स्पष्टीकरण नहीं देता, संयंत्र को बलपूर्वक बंद किया जा सकता है। 25 मई 2026 को जारी तीन पृष्ठों के नोटिस में बोर्ड ने कहा था कि टाटा ने 23 दिसंबर 2025 को दिए गए पिछले पत्र में जारी सुधारात्मक निर्देशों पर कोई कार्यवाही नहीं की थी।

टाटा का जवाब और क्लीन चिट

मंगलवार को टाटा ने रॉयटर्स को दिए एक बयान में कहा कि तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पुष्टि की है कि कंपनी ने चेतावनी नोटिस में उल्लिखित सभी प्रश्नों को संतोषजनक ढंग से हल कर लिया है और इस मामले पर “आगे किसी भी कार्रवाई को बंद कर दिया गया है।” टाटा ने यह भी कहा कि बोर्ड ने इस बात की पुष्टि की है कि होसूर, तमिलनाडु स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स की विनिर्माण इकाई से हाल ही में एकत्र किए गए जल नमूनों के विश्लेषण की बोर्ड की रिपोर्ट में किसी तरह का प्रदूषण नहीं पाया गया है। इसके अतिरिक्त, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने एक मान्यताप्राप्त प्रयोगशाला के माध्यम से स्वतंत्र विश्लेषण भी करवाया था, जिसके परिणामों में पाया गया कि कंपनी “सभी नियामक मानकों का पूरी तरह पालन कर रही है।” कंपनी ने ये नतीजे प्रदूषण प्राधिकरण को सौंपे।

Apple की भारत रणनीति पर असर

होसूर में स्थित यह संयंत्र तकनीकी केंद्र बेंगलुरू से महज 25 मील दक्षिण में है और iPhone के बैक पैनल सहित अनेक महत्त्वपूर्ण पुर्जे बनाता है। टाटा Apple की उस महत्त्वाकांक्षी योजना के केंद्र में है जिसके तहत Apple अपने iPhone उत्पादन को चीन से बाहर विविधता देना चाहता है। भारत इस रणनीति में Apple के लिए सबसे अहम देश बनकर उभरा है।

पहले भी आई हैं मुश्किलें

यह मामला अकेला नहीं है। सितंबर 2024 में होसूर के इसी टाटा संयंत्र में लगी भीषण आग ने iPhone के कलपुर्जों का उत्पादन कुछ समय के लिए ठप कर दिया था, जबकि सितंबर 2023 में Apple के एक अन्य आपूर्तिकर्ता के संयंत्र में भी आग लगी थी। भारत के पर्यावरण मंत्रालय ने इस वर्ष संसद को बताया कि पिछले पाँच वर्षों में जाँचे गए पाँच लाख से अधिक उद्योगों में से 4.4% पर्यावरण मानकों का पालन करने में विफल पाए गए, और लगभग 3,600 इकाइयों को प्रदूषण नियंत्रण विभागों ने बंद करवा दिया। इस मामले में टाटा को मिली राहत न केवल कंपनी के लिए, बल्कि Apple और भारत की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के लिए भी अहम है। होसूर संयंत्र की बंदी की स्थिति में iPhone की वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर गंभीर असर पड़ सकता था। बोर्ड की क्लीन चिट से अब संयंत्र निर्बाध रूप से अपना उत्पादन जारी रख सकता है।

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